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अब मनरेगा मजदूरों की आनलाइन हाजिरी
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हरदोई। अब मनरेगा में मजदूरों की हाजिरी ऑनलाइन लगेगी। सरकार ने इसके लिए मोबाइल मॉनीटरिंग सिस्टम की शुरुआत की है। इसमें पहले चरण में वर्क साइट से ही जिओ टैगिंग के माध्यम से मस्टर रोल बनेगा। दूसरे चरण में मोबाइल से बायोमीट्रिक हाजिरी लगनी शुरू हो जाएगी।
केंद्र सरकार ने वर्ष 2005 में मनरेगा की शुरुआत की थी। इसका मकसद मजदूरों को ज्यादा से ज्यादा रोजगार देना है। गांवों में काम न होने के बाद भी मजदूरों को साल में 100 दिन का रोजगार दिया जाता है। 15 दिन के भीतर भुगतान का प्रावधान है। 182 रुपये प्रतिदिन मजदूरी का प्रावधान है। फिलहाल जिले में करीब 1.20 लाख श्रमिक पंजीकृत हैं। जो ग्राम पंचायतों में होने वाले विकास कार्य में काम करते हैं। अब तक पंचायतों में मनरेगा मजदूरों की हाजिरी लगाने की जिम्मेदारी सचिव व रोजगार सेवक की होती है। वह रजिस्टर पर ही हाजिरी लगाकर मस्टर रोल बनाते थे। इसके बाद प्रधान की सहमति से उसे ब्लॉक पर भेज दिया जाता है। वहां से मजदूरी का भुगतान हो जाता है।
इसमें बड़े ही स्तर पर घपला होता है। ग्राम प्रधान अपने रिश्तेदारों के मनरेगा कार्ड बनवाकर भुगतान कर लेते हैं। अब सरकार ने मोबाइल मॉनीटरिंग सिस्टम की शुरुआत की है। इसमें सभी मजदूरों की ऑनलाइन हाजिरी लगेगी। हर ग्राम पंचायतों में मोबाइल फोन पर यह एप डाउनलोड करना होगा। दो चरणों में इसे शुरू किया जा रहा है। पहले चरण में वर्कसाइट से हाजिरी लगेगी। इससे जहां काम हो रहा है, उसकी लोकेशन भी आएगी। इसके बाद दूसरे चरण में मोबाइल फोन से ही बायोमीट्रिक हाजिरी लग जाएगी। यह डाटा खुद ही ब्लॉक पर पहुंच जाएगा और मजदूरी का भुगतान हो जाएगा।
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मनरेगा के कामों में पारदर्शिता के लिए सरकार ने मोबाइल मॉनीटरिंग सिस्टम की शुरुआत की है। इसमें वर्कसाइट से ही हाजिरी लगेगी। दूसरे चरण मेें सरकार ने अंगूठा लगाने की बात कही है।
- प्रमोद सिंह चंद्रौल, डीसी मनरेगा हरदोई।
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केंद्र सरकार ने वर्ष 2005 में मनरेगा की शुरुआत की थी। इसका मकसद मजदूरों को ज्यादा से ज्यादा रोजगार देना है। गांवों में काम न होने के बाद भी मजदूरों को साल में 100 दिन का रोजगार दिया जाता है। 15 दिन के भीतर भुगतान का प्रावधान है। 182 रुपये प्रतिदिन मजदूरी का प्रावधान है। फिलहाल जिले में करीब 1.20 लाख श्रमिक पंजीकृत हैं। जो ग्राम पंचायतों में होने वाले विकास कार्य में काम करते हैं। अब तक पंचायतों में मनरेगा मजदूरों की हाजिरी लगाने की जिम्मेदारी सचिव व रोजगार सेवक की होती है। वह रजिस्टर पर ही हाजिरी लगाकर मस्टर रोल बनाते थे। इसके बाद प्रधान की सहमति से उसे ब्लॉक पर भेज दिया जाता है। वहां से मजदूरी का भुगतान हो जाता है।
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इसमें बड़े ही स्तर पर घपला होता है। ग्राम प्रधान अपने रिश्तेदारों के मनरेगा कार्ड बनवाकर भुगतान कर लेते हैं। अब सरकार ने मोबाइल मॉनीटरिंग सिस्टम की शुरुआत की है। इसमें सभी मजदूरों की ऑनलाइन हाजिरी लगेगी। हर ग्राम पंचायतों में मोबाइल फोन पर यह एप डाउनलोड करना होगा। दो चरणों में इसे शुरू किया जा रहा है। पहले चरण में वर्कसाइट से हाजिरी लगेगी। इससे जहां काम हो रहा है, उसकी लोकेशन भी आएगी। इसके बाद दूसरे चरण में मोबाइल फोन से ही बायोमीट्रिक हाजिरी लग जाएगी। यह डाटा खुद ही ब्लॉक पर पहुंच जाएगा और मजदूरी का भुगतान हो जाएगा।
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मनरेगा के कामों में पारदर्शिता के लिए सरकार ने मोबाइल मॉनीटरिंग सिस्टम की शुरुआत की है। इसमें वर्कसाइट से ही हाजिरी लगेगी। दूसरे चरण मेें सरकार ने अंगूठा लगाने की बात कही है।
- प्रमोद सिंह चंद्रौल, डीसी मनरेगा हरदोई।