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राख के ढेर में अब ढूंढ रहे सामान

Sun, 24 May 2015 12:15 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई Updated Sun, 24 May 2015 12:15 AM IST
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Now looking at the pile of ash Goods

तपती दोपहरी में खुले आसमान के नीचे डेरा डाले

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अग्निपीड़ित शनिवार को परेशान नजर आए। महिलाएं घर में जले पड़े सामान की राख को खंगाल रही थी, वहीं बच्चे राख के ढेर में अपने खिलौने ढूंढ रहे थे। उधर, राजस्व कर्मियों ने नुकसान का सर्वे कर बताया कि अग्निकांड में 114 झोपड़ियां व कच्चे मकान जले हैं।

अनुमान है कि करीब पचास लाख से अधिक का नुकसान हुआ है। ज्ञात हो कि बंजारन पुरवा बस्ती में शुक्रवार शाम 3 बजे कूड़े केे ढेर से निकली चिंगारी फत्ते के छप्पर पर गिरी और गांव में बनी झुग्गी- झोपड़ियां और छप्पर जलने लगे थे। दो दमकल गाड़ियों की मदद से शाम करीब सवा छह बजे आग पर काबू पाया गया।

अग्निकांड से बेघर करीब 114 परिवार शनिवार को खुले आसमान के नीचे नजर आए। रहीस, बबलू, शेर खां ने कहा कि आग से ऐसी तबाही हुई कि वह दाने दाने को मोहताज हो गए हैं। परिवार की महिलाएं जले पड़े मलबे को खंगाल रही थी और उनको उम्मीद थी कि शायद कुछ बर्तन और गृहस्थी बच गई हो।

बच्चे शकील, अब्बू, चांद ने बताया कि वह अपने खिलौने ढूंढ रहे हैं। पीड़ित रांझा, नूर मोहम्मद, अनवार, करिया ने बताया कि अगस्त 11 में इसी तरह से आग ने बंजारन पुरवा में तबाही मचाई थी। जैसे-तैसे उन लोगों ने अपनी गृहस्थी बनाई थी कि इस अग्निकांड में सब कुछ तबाह हो गया।

उधर, लेखपाल गोविंद ने बताया कि इस अग्निकांड में 114 झोपड़ी व कच्चे मकान जले हैं और नुकसान का आकलन किया जा रहा है। संभावना है कि 50 लाख से ज्यादा रुपये का नुकसान हुआ है। उधर, पीड़ितों ने एसडीएम पीपी तिवारी आग से हुए नुकसान का सर्वे तत्काल करा मदद मुहैया कराने की मांग की है, जबकि ग्रामीणों को एसडीएम ने बताया कि तहसीलदार द्वारा निरीक्षण किया गया है।

इसके अलावा कोटेदार को चावल, गेहूं बांटने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से मिलने वाली सभी सहायता अग्नि पीड़ितों को दिलाई जाएगी। उधर, गांव के गुलशन और लखिया ने बताया कि अगस्त 11 में हुए अग्निकांड में तत्कालीन अफसरों ने उन्हें आश्वासन देकर बताया था कि सभी अग्निपीड़ित परिवारों को इंदिरा आवास मिलेंगे।

कुछ लोगों को ही आवास मिले, शेष को आवास नहीं मिले हैं। उधर, प्रधान कमला देवी ने शनिवार को सुबह खाना बनवाकर अग्निपीड़ितों में बंटवाया, पर बच्चों के लिए दूध की व्यवस्था नहीं हो सकी, जबकि शनिवार को कोटेदार ने अग्निपीड़िताें को 5-5 किलो चावल बांटा।

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