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अब 19 एडीओ पंचायत के हाथों में 1306 गांवों की बागडोर
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हरदोई। जनपद की 1306 ग्राम पंचायतों की बागडोर अब ब्लॉकों पर तैनात एडीओ पंचायत के हाथों में आ गई है। शुक्रवार आधी रात से जनपद की 1306 ग्राम पंचायतों के निर्वाचित प्रधानों का कार्यकाल खत्म हो गया।
वर्ष 2015 में 1308 ग्राम पंचायतों में प्रधान पद के लिए निर्वाचन प्रक्रिया पूरी की गई थी। वर्ष 2017 में निकाय चुनाव से पहले संडीला विकास खंड की दो ग्राम पंचायत तरफअशराफ टोला और महतवाना देहात को संडीला नगर पालिका में शामिल कर लिया गया था। इसके बाद जनपद में 1306 ग्राम पंचायतें रह गई थीं। इन सभी ग्राम पंचायतों के प्रधानों का कार्यकाल 25 दिसंबर की रात 12 बजे तक ही था। पंचायत चुनाव को लेकर प्रशासन भले ही तैयारियां कर रहा हो, लेकिन इसको लेकर स्थिति बहुत स्पष्ट नहीं है। शासन के निर्देशों के अनुसार शुक्रवार रात 12 बजे के बाद ग्राम पंचायतों की बागडोर पंचायत राज विभाग में तैनात (ब्लॉकवार) सहायक विकास अधिकारियों के हाथ आ गई। ग्राम प्रधानों को जारी किए गए डीएससी (डिजिटल सिग्रेचर सर्टिफिकेट) भी रिजेक्ट कर दिए गए हैं।
सर्वर रहा डाउन, अधिकतर का अटक गया भुगतान
25 दिसंबर की रात 12 बजे से ग्राम प्रधानों के डीएससी रिजेक्ट होने की जानकारी पहले ही दे दी गई थी। ऐसे में ग्राम प्रधान अपने पूर्व में कराए गए कार्यों के लंबित भुगतान को कराने के लिए परेशान रहे। दरअसल नयी व्यवस्था में भुगतान सीधे खाते में डीएससी के जरिए भेजा जाता है। बीती 21 दिसंबर से सर्वर डाउन होने के कारण प्रधानों के भुगतान हो ही नहीं पाए। अब ग्राम प्रधानों को अपना भुगतान पाने के लिए एडीओ पंचायत पर न सिर्फ निर्भर रहना होगा, बल्कि उनकी चिरौरी भी करनी पड़ेगी।
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वर्ष 2015 में 1308 ग्राम पंचायतों में प्रधान पद के लिए निर्वाचन प्रक्रिया पूरी की गई थी। वर्ष 2017 में निकाय चुनाव से पहले संडीला विकास खंड की दो ग्राम पंचायत तरफअशराफ टोला और महतवाना देहात को संडीला नगर पालिका में शामिल कर लिया गया था। इसके बाद जनपद में 1306 ग्राम पंचायतें रह गई थीं। इन सभी ग्राम पंचायतों के प्रधानों का कार्यकाल 25 दिसंबर की रात 12 बजे तक ही था। पंचायत चुनाव को लेकर प्रशासन भले ही तैयारियां कर रहा हो, लेकिन इसको लेकर स्थिति बहुत स्पष्ट नहीं है। शासन के निर्देशों के अनुसार शुक्रवार रात 12 बजे के बाद ग्राम पंचायतों की बागडोर पंचायत राज विभाग में तैनात (ब्लॉकवार) सहायक विकास अधिकारियों के हाथ आ गई। ग्राम प्रधानों को जारी किए गए डीएससी (डिजिटल सिग्रेचर सर्टिफिकेट) भी रिजेक्ट कर दिए गए हैं।
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सर्वर रहा डाउन, अधिकतर का अटक गया भुगतान
25 दिसंबर की रात 12 बजे से ग्राम प्रधानों के डीएससी रिजेक्ट होने की जानकारी पहले ही दे दी गई थी। ऐसे में ग्राम प्रधान अपने पूर्व में कराए गए कार्यों के लंबित भुगतान को कराने के लिए परेशान रहे। दरअसल नयी व्यवस्था में भुगतान सीधे खाते में डीएससी के जरिए भेजा जाता है। बीती 21 दिसंबर से सर्वर डाउन होने के कारण प्रधानों के भुगतान हो ही नहीं पाए। अब ग्राम प्रधानों को अपना भुगतान पाने के लिए एडीओ पंचायत पर न सिर्फ निर्भर रहना होगा, बल्कि उनकी चिरौरी भी करनी पड़ेगी।
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