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न नौकरी मिली और न ही मुआवजा
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई
Updated Wed, 22 Apr 2015 12:45 AM IST
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है, लेकिन मल्लावां ब्लाक के बीकापुर गांव में अधिग्रहित जमीन के मुद्दे पर
हर तरफ खामोशी है। यहां करीब 24 साल पहले निजी कंपनी ने चीनी मिल के नाम
पर 284 किसानों की जमीन अधिग्रहित कर ली गई।
अधिग्रहण की जद में करीब 300 बीघा जमीन है, लेकिन अभी तक न तो मिल लगी और न ही किसानों को मुआवजा मिला। जिला प्रशासन भी इस मुद्दे पर चुप है। करीब तीन साल पहले किसानों ने हंगामा किया तो मिल प्रबंधन ने जमीन पर कुछ सामान रखवा दिए।
विरोध थमा तो सामान व यहां कार्यरत गार्ड भी गायब हो गए। अब सैकड़ों किसान खुद को ठगा सा महसूस कर रहे है। मल्लावां के बीकापुर गांव में 1991 में पेंट्रान शुगर डिस्लरी लिमिटेड का बोर्ड लगा। किसानों को सपना दिखाया गया कि चीनी मिल लगने से गन्ना किसानों को लाभ मिलेगा।
साथ ही सैकड़ों लोगों को रोजगार मिलेगा। जिन किसानों की जमीन अधिग्रहित की जाएगी, उसके परिवार के एक व्यक्ति को मिल में पक्की नौकरी मिलेगी। इस दलील पर गांव बीकापुर के अलावा बरौना, बारापुर, राघौरामपुर और नेवादा गांव के किसानों ने अपनी जमीन देने पर सहमति जता दी।
किसानों की करीब 300 बीघा जमीन अधिग्रहीत होने के बाद कंपनी के अफसरों ने बाउंड्रीवाल बनाकर अपना बोर्ड लगा दिया, लेकिन मिल का निर्माण नहीं किया गया। पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान यह मुद्दा जोरशोर से उठा। किसानों का विरोध बढ़ता देख कंपनी की ओर से अधिग्रहित जमीन पर कुछ पुरानी मशीनेें एवं अन्य सामान डलवा दिए गए।
सामान की देखभाल को सुरक्षा गार्ड भी तैनात किए गए। इससे किसानों को लगा कि उनका विरोध कारगर साबित हुआ। लेकिन चुनाव बीतते ही यहां से पुरानी मशीनें व गार्ड भी गायब हो गए। अभी तक किसानों को न तो किसी तरह का मुआवजा दिया गया और न ही उनके परिवार के किसी व्यक्ति को नौकरी दी गई है।
अधिग्रहण की जद में करीब 300 बीघा जमीन है, लेकिन अभी तक न तो मिल लगी और न ही किसानों को मुआवजा मिला। जिला प्रशासन भी इस मुद्दे पर चुप है। करीब तीन साल पहले किसानों ने हंगामा किया तो मिल प्रबंधन ने जमीन पर कुछ सामान रखवा दिए।
विरोध थमा तो सामान व यहां कार्यरत गार्ड भी गायब हो गए। अब सैकड़ों किसान खुद को ठगा सा महसूस कर रहे है। मल्लावां के बीकापुर गांव में 1991 में पेंट्रान शुगर डिस्लरी लिमिटेड का बोर्ड लगा। किसानों को सपना दिखाया गया कि चीनी मिल लगने से गन्ना किसानों को लाभ मिलेगा।
साथ ही सैकड़ों लोगों को रोजगार मिलेगा। जिन किसानों की जमीन अधिग्रहित की जाएगी, उसके परिवार के एक व्यक्ति को मिल में पक्की नौकरी मिलेगी। इस दलील पर गांव बीकापुर के अलावा बरौना, बारापुर, राघौरामपुर और नेवादा गांव के किसानों ने अपनी जमीन देने पर सहमति जता दी।
किसानों की करीब 300 बीघा जमीन अधिग्रहीत होने के बाद कंपनी के अफसरों ने बाउंड्रीवाल बनाकर अपना बोर्ड लगा दिया, लेकिन मिल का निर्माण नहीं किया गया। पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान यह मुद्दा जोरशोर से उठा। किसानों का विरोध बढ़ता देख कंपनी की ओर से अधिग्रहित जमीन पर कुछ पुरानी मशीनेें एवं अन्य सामान डलवा दिए गए।
सामान की देखभाल को सुरक्षा गार्ड भी तैनात किए गए। इससे किसानों को लगा कि उनका विरोध कारगर साबित हुआ। लेकिन चुनाव बीतते ही यहां से पुरानी मशीनें व गार्ड भी गायब हो गए। अभी तक किसानों को न तो किसी तरह का मुआवजा दिया गया और न ही उनके परिवार के किसी व्यक्ति को नौकरी दी गई है।