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मनरेगा कार्यों में नियमो को दिखाया ठेंगा

Mon, 07 Oct 2019 11:33 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 07 Oct 2019 11:33 PM IST
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no rules followed in mnrega work
हरदोई। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के कार्यों में जिले में जमकर हीलाहवाली हो रही है। इसके लिए जारी सबसे अहम निर्देश की धज्जियां उड़ रहीं हैं। कमीशन के चक्कर में सामग्री और श्रमांश में 40 और 60 फीसदी का अनुपात जिले में बिगड़ गया है। चालू वित्तीय वर्ष में अब तक कराए गए कार्यों में सिर्फ भरखनी विकास खंड की ही 24 ग्राम पंचायतों में इस नियम को धता बता दिया गया। ये हाल तब है जब सीडीओ खुद हर रोज मनरेगा योजना की निगरानी कर रही हैं।
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मनरेगा में सबसे अहम निर्देश ये हैं कि किसी भी कार्य पर 40 फीसदी से अधिक बजट सामग्री अंश पर खर्च नहीं किया जाएगा। दरअसल मनरेगा का उद्देश्य है कि रोजगार के लिए ग्रामीणों का शहरों की ओर पलायन रोका जाए। ग्रामीणों को गांव में ही मनरेगा के तहत कार्य उपलब्ध कराया जाए। सीडीओ ने इस पर अमली जामा पहनाने के लिए पहल कर हर माह की पहली तारीख को सभी ग्राम पंचायतों में रोजगार दिवस का आयोजन करने के भी निर्देश दिए हैं।
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लेकिन हकीकत ये है कि मनरेगा के तहत श्रमांश पर कम और सामग्री अंश पर अधिक बजट खर्च किया जा रहा है। मनरेगा के कार्यों पर चालू वित्तीय वर्ष में हुए खर्च की आनलाइन फीडिंग देखने पर पता चलता है कि सिर्फ भरखनी विकास खंड की ही 24 ग्राम पंचायतों में मनरेगा के कार्यों में श्रमांश की अपेक्षा सामग्री अंश पर ज्यादा बजट खर्च कर दिया गया। सूत्रों के अनुसार मनरेगा के तहत कराए जाने वाले कार्यों में ब्लाक से लेकर प्रधान तक कमीशन का खेल चलता है।
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सामग्री अंश में अधिक भुगतान करने के बाद कमीशन का खेल आसानी से बन जाता है। मजदूरों के नाम पर होने वाले भुगतान में कमीशन के लिए जद्दोजहद अधिक करनी पड़ती है, जबकि सामग्री अंश के भुगतान में सीधे संबंधित फर्म से ही भुगतान प्राप्त हो जाता है।
86 फीसदी से अधिक तक खर्च हुआ सामग्री अंश पर
भरखनी विकास खंड के ग्राम रामापुर मिश्र में तो मनरेगा में खर्च के अनुपात की बुरी तरह अनदेखी की गई। इस ग्राम पंचायत में 1 लाख 18 हजार रुपये श्रमांश यानी मजदूरी पर खर्च किए गए, जबकि 7 लाख 47 हजार रुपये सामग्री अंश पर खर्च कर दिए गए। मतलब सामग्री अंश पर 86 फीसदी से अधिक बजट खर्च हो गया, जो कि नियमत: 40 फीसदी से अधिक नहीं होना चाहिए था। इसी तरह कन्हारी में 8 लाख 38 हजार रुपये मजदूरी पर खर्च हुए, लेकिन सामग्री अंश पर 13 लाख 31 हजार रुपये खर्च हो गए। गौरा उदयपुर में मजदूरी पर 7 लाख 57 हजार रुपये और सामग्री पर 12 लाख 1 हजार रुपये खर्च कर दिए गए।

जिम्मेदारों की सुनिए
भरखनी के खंड विकास अधिकारी और मनरेगा के कार्यक्रम अधिकारी विद्याशंकर कटियार से जब श्रम सामग्री अंश का अनुपात बिगड़ने के बारे में जानकारी ली गई तो उन्होंने कहा कि मामला संज्ञान में नहीं है। दिखवाने के बाद ही कुछ बता पाएंगे।
इन गांवों में बिगड़ा श्रम-सामग्री अनुपात
गांव का नाम श्रमांश सामग्री अंश (लाख रुपये में)
भाभर केशवपुर 8.99 10.37
भगवंतपुर 11.64 11.2
भाहापुर सपहा 4.89 3.72
चकराछा 17.16 17.68
चांदपुर 5.11 5.75
दधेला 5.11 4.96
चौडऱाई किर्तियापुर 6.12 7.39
वीरमपुर उमरिया 7.22 7.02
तिमिरपुर 5.86 9.42
सरसई 9.12 6.47
रामापुर खमरिहा 10.02 11.45
पिपरिया 11.37 8.76
नरभा 14.63 15.69
कुरारी 6.97 7.65
कन्हारी 8.38 13.31
कहराई नकटौरा 8.00 8.24
जमालपुर 15.76 12.09
गौरा उदयपुर 7.57 12.01
कनकापुर उबरिया 10.37 8.27
नादखेड़ा 5.95 4.65
नगला हुसैन 3.67 3.35
रामापुर मिश्र 1.18 7.47
रामदासपुर 2.83 6.93
सेमरझाला 6.79 10.02
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