जादू की छड़ी नहीं, व्यवहार परिवर्तन से होंगे ओडीएफ
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ओडीएफ (खुले में शौच से मुक्त) के लिए ग्राम सचिवों पर नहीं जनता पर दबाव बनाया जाए। इस अभियान को लक्ष्य परक न समझा जाए। ओडीएफ जनता के हृदय और व्यवहार परिवर्तन से संबंधित है। अकेले सचिव के पास कोई जादू की छड़ी नहीं है। ये बात ग्राम पंचायत अधिकारी-ग्राम विकास अधिकारी समन्वय समिति के संयुक्त तत्वावधान में जिलाधिकारी को संबोधित ज्ञापन में कही गई है। नगर मजिस्ट्रेट को दिए गए ज्ञापन में ग्राम पंचायत और ग्राम विकास अधिकारियों ने स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय निर्माण और प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) में आ रहीं व्यावहारिक कठिनाइयां बताईं हैं।
ग्राम विकास अधिकारी संघ के कार्यकारी अध्यक्ष कृष्ण गोविंद मिश्रा, मंत्री राजवीर सिंह, ग्राम पंचायत अधिकारी संघ के उपाध्यक्ष आनंद सिंह, जिला मंत्री रामकिशोर आदि की मौजूदगी में दिए गए ज्ञापन में ग्राम सचिवों ने अपने मन की बात कही। कहा गया कि हजारों वर्ष पुरानी परंपरा को 450 दिन में नहीं बदला जा सकता। इसका प्रयास किया जा रहा है। आवास और शौचालय योजना के लाभार्थी परंपरावादी हैं। इसलिए बदलाव में समय लग रहा है। आए दिन अधिकारियों के निर्देश बदल जाते हैं, इसलिए सभी निर्देश लिखित में ही जारी किए जाने की मांग भी ग्राम सचिवों ने की। कहा गया है कि शौचालय निर्माण के लिए 12 हजार रुपये की सहायता दी जाती है, जो वास्तविक लागत से बहुत कम है। निर्माण सामग्री के मूल्यों का ध्यान रखते हुए इसे नए ढंग से निर्धारित किया जाए। ग्राम सचिवों से ज्यादा योग्य अधिकारी हैं। यदि एक-एक अधिकारी एक-एक ग्राम पंचायत में 30 दिन में समस्त शौचालय निर्माण पूर्ण करा दे तो उनसे प्रेरणा लेकर सचिव 27 दिन में ही निर्माण कार्य कराने का प्रण लेंगे। इस दौरान दिनेश गुप्ता, रमेश वर्मा, विमलेश गुप्ता आदि मौजूद रहे।