फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Hardoi News ›   New model of studies, children will reach school

पढ़ाई का नया मॉडल, स्कूल पहुंचेगा बच्चों के पास

Thu, 03 Dec 2020 10:41 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 03 Dec 2020 10:41 PM IST
विज्ञापन
New model of studies, children will reach school
फोटो-9-एक विद्यालय में पढ़ते परिषदीय विद्यालयों के छात्र। संवाद - फोटो : HARDOI
हरदोई। कोविड-19 में प्रदेश में नौनिहालों के लिए सारे स्कूल भले ही बंद हों पर सूबे में जिले के तीन ब्लाक ऐसे होंगे जहां के परिषदीय बच्चों के लिए स्कूल उनके घर की दहलीज पर खुद पहुंचेगा। एचसीएल फाउंडेशन ने ऐसा ही कुछ प्रयास कर जिले में एक नया मॉडल प्रस्तुत किया है। इससे तीन ब्लाकों के करीब 53 हजार बच्चों का भविष्य संवरेगा।
विज्ञापन

कोविड 19 की वजह से इंटर कालेज व डिग्री कालेजों के दरवाजे भले ही छात्र-छात्राओं के लिए खोल दिए गए हो लेकिन परिषदीय नौनिहालों के बच्चे अभी भी घर में ही रहने को विवश हैं। स्कूल खुले हैं पर उन्हें अभी स्कूल जाने की अनुमति नहीं है। इसको देखते हुए उन्हे ऑनलाइन पढ़ाई कराई जा रही है पर अधिकांश बच्चों के अभिभावकों के पास मोबाइल न होने से शासन की मंशा पूरी नहीं हो पा रही।
विज्ञापन

ऐसे ही बच्चों के लिए एचसीएल फाउंडेशन पड़ोस पाठशाला के रूप में नया सवेरा लेकर आया है। इस दौरान बच्चे भले ही स्कूल न जा पा रहे हो पर इस पहल में स्कूल खुद बच्चों के दरवाजे पहुंचेगा और उन्हें शिक्षित करेगा। इस संबंध में जिला समन्वयक प्रशिक्षण राकेश शुक्ला ने बताया कि जिले के तीन ब्लाकों कछौना, बेंहदर व कोथावां में इसकी शुरुआत हो रही है। यहां के समस्त स्कूलों के परिषदीय बच्चों को शिक्षित करने स्वयं स्कूल घरों में पहुंचेंगे और उन्हें शिक्षित करेंगे। ये सूबे के पहले ब्लॉक होंगे जहां एचसीएल फाउंडेशन इस तरह की शुरुआत करने जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

कछौना में 128 के 14560 बच्चे हैं। बेंहदर में 158 स्कूलों के 16737 और कोथवां में 171 स्कूलों में 21909 बच्चे हैं। पड़ोस पाठशाला का उद्देश्य पूरा करने के लिए एचसीएल फाउंडेशन 500 से अधिक वॉलिंटियर लगाएगा। स्कूलों से बच्चों की सूची लेकर बच्चों के घर जाएगा और उनको पढ़ाएगा। बच्चे यदि एक ही मोहल्ले में ज्यादा हुए तो उस मोहल्ले में किसी स्थान पर इन बच्चों को एकत्र कर बैच भी संचालित किए जा सकते हैं। जिसमें उन्हे हर पाठ्य सामग्री से संबंधित हर चीज मुहैया कराई जाएगी।

टीचिंग लर्निंग मैटेरियल यानी टीएलएम हर वॉलिंटियर को उपलब्ध कराया जाएगा। जिसके माध्यम से पड़ोस पाठशाला के बच्चों को विषयों को बारीकी से समझाया जा सकता है। इसके अलावा परिषदीय शिक्षकों का दायित्व होगा कि पड़ोस पाठशाला में अध्ययन करने वाले बच्चों तक सभी पुस्तकें पहुंच गईं हैं या नहीं। यदि नहीं तो निर्धारित समय में उसकी पूर्ति की जाएगी। बताते हैं कि एचसीएल फाउंडेशन के साथ साथ शिक्षा विभाग भी इस प्रोजेक्ट को सफल बनाने में पूरा सहयोग करेगी। समय-समय पर संबंधित क्षेत्र के शिक्षक व शिक्षा विभाग के अधिकारी भी भ्रमण करेंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed