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Hardoi News: उपचार के बजाए बीमारियां बांट रहा मेडिकल कॉलेज
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फोटो- 25- इमरजेंसी और पैथोलॉजी के बीच में भरा बारिश का पानी। संवाद
- फोटो : credit
हरदोई। बेहतर इलाज की उम्मीद लेकर जिले के दूर-दराज से आए रोगियों को उपचार के बजाए मेडिकल कॉलेज में बीमारियां मिल रही हैं। तेजी से फैल रहे वायरल संक्रमण के बीच मेडिकल कॉलेज में जगह-जगह पानी भरा हुआ है और उसमें मच्छर पनप रहे हैं। जलभराव के चलते लंबे समय से मच्छर पैदा हो रहे हैं इससे यहां आने वाले हर व्यक्ति पर बीमारी से जान का संकट मंडरा रहा है। मच्छरों की भरमार के चलते मरीजों, तीमारदारों और कर्मचारियों में संक्रामक बीमारियां फैलने की आशंका बनी हुई है।
मेडिकल कॉलेज परिसर में बारिश के बाद जगह-जगह जलभराव की स्थिति बन गई है। पैथोलॉजी के पास, आईपीडी भवन के सामने और इमरजेंसी के पास सहित कई स्थानों पर कई दिनों से पानी जमा होने के कारण उसमें काई और गंदगी जमा हो गई है। इसी पानी में अब मच्छर पनपने लगे हैं। अस्पताल में प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज और तीमारदार पहुंचते हैं। ऐसे में परिसर में ही मच्छरों के पनपने से स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। सबसे गंभीर बात यह है कि मेडिकल कॉलेज में पहले से ही वायरल संक्रमण, डेंगू और अन्य मौसमी बीमारियों को लेकर मरीजों की संख्या बढ़ रही है। ऐसे में परिसर में जलभराव से मच्छरों का प्रकोप बढ़ना मरीजों के साथ-साथ स्वस्थ लोगों के लिए भी परेशानी का सबब बन सकता है।
जल निकासी की लचर व्यवस्था बनी नासूर
मेडिकल कॉलेज में जल निकास की समुचित व्यवस्था नहीं है। बारिश होने के बाद पूरा परिसर तालाब में तब्दील हो जाता है। इमरजेंसी के बाहर तो पंजों से ऊपर पानी भर जाता है। इस वजह से गंभीर मरीजों को इमरजेंसी वार्ड के अंदर तक पहुंचने में काफी परेशानियां उठानी पड़ती हैं। इसी प्रकार पैथोलॉजी के बाहर पानी भरने से जांच के लिए सैंपल देने जाने वाले मरीज को भी अंदर जाने में गंदे पानी के बीच से होकर निकलना पड़ रहा है। पूरे मेडिकल कॉलेज परिसर का यही हाल है।
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गंदे पानी के पास बैठने को मजबूर तीमारदार
परिसर में पानी जमा होने का सबसे बड़ा खामियाजा तीमारदारों को भुगतना पड़ रहा है। इमरजेंसी के बाहर गंदा और काला पानी जमा हुआ है। इसमें मच्छरों की भरमार है। पड़ोस में ही तीमारदार बैठे रहते हैं। शाम के समय मच्छरों की संख्या बढ़ जाती है। तीमारदार सुनील शुक्ला, महेंद्र वर्मा, अतुल रस्तोगी का कहना है कि मच्छरों की वजह से बैठना मुश्किल हो जाता है। मच्छरों से बचाव के लिए कई जतन करने पड़ते हैं लेकिन परिसर की सफाई और जल निकासी न होने से मच्छर कम नहीं हो रहे हैं।
परिसर में निर्माण की वजह से जलभराव की समस्या उत्पन्न हुई है। सफाई कर्मियों को निर्देशित कर दिया गया है कि वह लोग जहां भी पानी भरा है उसे सुखाएं और दवा का छिड़काव करें। -डॉ. जेबी गोगोई, प्रधानाचार्य, मेडिकल कॉलेज
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मेडिकल कॉलेज परिसर में बारिश के बाद जगह-जगह जलभराव की स्थिति बन गई है। पैथोलॉजी के पास, आईपीडी भवन के सामने और इमरजेंसी के पास सहित कई स्थानों पर कई दिनों से पानी जमा होने के कारण उसमें काई और गंदगी जमा हो गई है। इसी पानी में अब मच्छर पनपने लगे हैं। अस्पताल में प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज और तीमारदार पहुंचते हैं। ऐसे में परिसर में ही मच्छरों के पनपने से स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। सबसे गंभीर बात यह है कि मेडिकल कॉलेज में पहले से ही वायरल संक्रमण, डेंगू और अन्य मौसमी बीमारियों को लेकर मरीजों की संख्या बढ़ रही है। ऐसे में परिसर में जलभराव से मच्छरों का प्रकोप बढ़ना मरीजों के साथ-साथ स्वस्थ लोगों के लिए भी परेशानी का सबब बन सकता है।
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जल निकासी की लचर व्यवस्था बनी नासूर
मेडिकल कॉलेज में जल निकास की समुचित व्यवस्था नहीं है। बारिश होने के बाद पूरा परिसर तालाब में तब्दील हो जाता है। इमरजेंसी के बाहर तो पंजों से ऊपर पानी भर जाता है। इस वजह से गंभीर मरीजों को इमरजेंसी वार्ड के अंदर तक पहुंचने में काफी परेशानियां उठानी पड़ती हैं। इसी प्रकार पैथोलॉजी के बाहर पानी भरने से जांच के लिए सैंपल देने जाने वाले मरीज को भी अंदर जाने में गंदे पानी के बीच से होकर निकलना पड़ रहा है। पूरे मेडिकल कॉलेज परिसर का यही हाल है।
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गंदे पानी के पास बैठने को मजबूर तीमारदार
परिसर में पानी जमा होने का सबसे बड़ा खामियाजा तीमारदारों को भुगतना पड़ रहा है। इमरजेंसी के बाहर गंदा और काला पानी जमा हुआ है। इसमें मच्छरों की भरमार है। पड़ोस में ही तीमारदार बैठे रहते हैं। शाम के समय मच्छरों की संख्या बढ़ जाती है। तीमारदार सुनील शुक्ला, महेंद्र वर्मा, अतुल रस्तोगी का कहना है कि मच्छरों की वजह से बैठना मुश्किल हो जाता है। मच्छरों से बचाव के लिए कई जतन करने पड़ते हैं लेकिन परिसर की सफाई और जल निकासी न होने से मच्छर कम नहीं हो रहे हैं।
परिसर में निर्माण की वजह से जलभराव की समस्या उत्पन्न हुई है। सफाई कर्मियों को निर्देशित कर दिया गया है कि वह लोग जहां भी पानी भरा है उसे सुखाएं और दवा का छिड़काव करें। -डॉ. जेबी गोगोई, प्रधानाचार्य, मेडिकल कॉलेज

फोटो- 25- इमरजेंसी और पैथोलॉजी के बीच में भरा बारिश का पानी। संवाद- फोटो : credit