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जनता की सेवा में खो दिया बेटा, फिर क्यों कटा टिकट
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संडीला। विधायक राजकुमार अग्रवाल ने विधानसभा चुनाव में उनके स्थान पर अलका अर्कवंशी को टिकट देने के भाजपा के निर्णय को जातिगत बताया है। टिकट कटने के बाद उन्होंने कहा कि जनता की सेवा करते हुए उन्होंने बेटा खो दिया, फिर भी भाजपा ने उन्हें दोबारा मौका नहीं दिया। जबकि 40 हजार अर्कवंशी वोट के लिए पार्टी ने अलका अर्कवंशी को टिकट दे दिया।
राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो इस सीट पर टिकट की सियासत निकाय चुनाव से ही चल रही है। स्थानीय निकाय से एमएलसी के चुनाव के दौरान भाजपा से कोई प्रत्याशी चुनाव लड़ने के लिए तैयार नहीं था।
उस समय भाजपा ने राजकुमार अग्रवाल से निकाय चुनाव लड़ने की पेशकश की थी। 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले हुए इस निकाय चुनाव में यह तय हुआ कि यदि राजकुमार अग्रवाल निकाय चुनाव लड़ते हैं तो उन्हें भाजपा विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी घोषित करेगी। राजकुमार इस शर्त पर निकाय चुनाव लड़े और जीते भी।
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वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने शर्त पूरी की और उन्हें चुनाव लड़ाया। मोदी लहर में वह भारी बहुमत से चुनाव जीते। लेकिन इस बार भाजपा ने अप्रत्याशित तरीके से उनका टिकट काटकर अलका अर्कवंशी को प्रत्याशी बना दिया। इससे नाखुश विधायक ने भाजपा पर जातिगत राजनीति का आरोप मढ़ दिया। उनका कहना है कि कोरोनाकाल में उनका पुत्र उनके साथ जनता की सेवा में लगा था। तभी कोरोना संक्रमण से उसकी मौत हो गई। इसके बावजूद वह पूरे पांच वर्ष जनता की सेवा में लगे रहे। पार्टी जवाब दे कि उसने उनका टिकट क्यों काटा।
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राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो इस सीट पर टिकट की सियासत निकाय चुनाव से ही चल रही है। स्थानीय निकाय से एमएलसी के चुनाव के दौरान भाजपा से कोई प्रत्याशी चुनाव लड़ने के लिए तैयार नहीं था।
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उस समय भाजपा ने राजकुमार अग्रवाल से निकाय चुनाव लड़ने की पेशकश की थी। 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले हुए इस निकाय चुनाव में यह तय हुआ कि यदि राजकुमार अग्रवाल निकाय चुनाव लड़ते हैं तो उन्हें भाजपा विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी घोषित करेगी। राजकुमार इस शर्त पर निकाय चुनाव लड़े और जीते भी।
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वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने शर्त पूरी की और उन्हें चुनाव लड़ाया। मोदी लहर में वह भारी बहुमत से चुनाव जीते। लेकिन इस बार भाजपा ने अप्रत्याशित तरीके से उनका टिकट काटकर अलका अर्कवंशी को प्रत्याशी बना दिया। इससे नाखुश विधायक ने भाजपा पर जातिगत राजनीति का आरोप मढ़ दिया। उनका कहना है कि कोरोनाकाल में उनका पुत्र उनके साथ जनता की सेवा में लगा था। तभी कोरोना संक्रमण से उसकी मौत हो गई। इसके बावजूद वह पूरे पांच वर्ष जनता की सेवा में लगे रहे। पार्टी जवाब दे कि उसने उनका टिकट क्यों काटा।