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कोटपा का असर, जिम्मेदारों पर बेअसर
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई
Updated Fri, 03 Apr 2015 12:43 AM IST
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जिले को तंबाकू मुक्त बनाकर जिले में राष्ट्रीय
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तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम कोटपा को कड़ाई से प्रभावी बनाने के डीएम के
निर्देशों का अनुपालन कहां तक हो पाता है, यह तो वक्त बताएगा, पर अभी का सच
यही है कि इस कानून को प्रभावी बनाने वाले अधिकांश जिम्मेदारों के सरकारी
चैंबरों में से खुद धुआं बाहर आता दिख रहा है।
यही नहीं कई जिम्मेदारों के माथे पर इस कानून को लेकर अभी से बल दिखने लगा है। खून दूषित हो या चेहरा तेजहीन। पाचन क्रिया बिगड़े या दमा हो जाए। जिले के तंबाकू के शौकीन इसका इस्तेमाल बंद करने को तैयार नहीं हैं। इन शौकीनों में आम आदमी ही नहीं, बल्कि वह जिम्मेदार भी शामिल हैं, जिनके कंधों पर कहीं न कहीं राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम कोटपा का पालन कराने की जिम्मेदारी रखी गई है।
कहना गलत न होगा कि आम लोगों के साथ साथ यह जिम्मेदार भी सार्वजनिक स्थलों पर सिगरेट के धुएं के छल्ले बना कर उड़ा देते हैं। यहीं नहीं शौक पूरा करने को क्या घर, क्या गाड़ी और क्या सरकारी दफ्तर वह इस पर भी ध्यान नहीं देते। कहना गलत न होगा कि कई सरकारी दफ्तरों में न सिर्फ धुआं नजर आता है, बल्कि इसके साथ कोटपा भी धुआं-धुआं नजर आता है।
उधर, राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम कोटपा को प्रभावी बनाने को एक बैठक का आयोजन कर जिलाधिकारी रमेश मिश्र भी निर्देश जारी कर चुके हैं। उन्होंने जिले को धूूम्रपान रहित बनाए जाने को लेकर सार्वजनिक स्थलों पर कड़ाई से निरीक्षण चरणवार कराने के निर्देश दिए।
प्रथम चरण में कचहरी, तहसीलों में द्वितीय चरण में अस्पताल, स्कूलों, कालेजों और तीसरे चरण में सार्वजनिक स्थानों पर नामित विभागाें के अफसरों द्वारा निरीक्षण होगा। धूम्रपान करने वालों पर कार्रवाई होगी। सार्वजनिक स्थानों पर धुएं के छल्ले उड़ाना महंगा पड़ सकता है।
होटल, ढाबा संचालक व रेस्टोरेंट में सार्वजनिक रूप से सिगरेट के कश नहीं लगा सकेंगे। अस्पताल, नर्सिंग होम, स्कूल, बस स्टाप, रेलवे स्टेशन, बस आदि नो स्मोकिंग जोन में शामिल है। यहां तक सरकारी कार्यालयों में भी धुएं के छल्ले उड़ाने पर जुर्माना देना पड़ सकता है।
इससे जिले में युवाओं में बढ़ रही नशे के लत में कुछ कमी आएगी। इसके क्रियान्वयन के लिए शासन से जिला प्रशासन को निर्देश जारी किए गए हैं। बताते चले कि तंबाकू उत्पाद अधिनियम के लागू होने के बाद देश में कहीं भी सार्वजनिक स्थानों पर धूम्र्रपान नहीं किया जा सकता है। इसके लिए जुर्माने को प्रावधान किया गया है।
यही नहीं कई जिम्मेदारों के माथे पर इस कानून को लेकर अभी से बल दिखने लगा है। खून दूषित हो या चेहरा तेजहीन। पाचन क्रिया बिगड़े या दमा हो जाए। जिले के तंबाकू के शौकीन इसका इस्तेमाल बंद करने को तैयार नहीं हैं। इन शौकीनों में आम आदमी ही नहीं, बल्कि वह जिम्मेदार भी शामिल हैं, जिनके कंधों पर कहीं न कहीं राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम कोटपा का पालन कराने की जिम्मेदारी रखी गई है।
कहना गलत न होगा कि आम लोगों के साथ साथ यह जिम्मेदार भी सार्वजनिक स्थलों पर सिगरेट के धुएं के छल्ले बना कर उड़ा देते हैं। यहीं नहीं शौक पूरा करने को क्या घर, क्या गाड़ी और क्या सरकारी दफ्तर वह इस पर भी ध्यान नहीं देते। कहना गलत न होगा कि कई सरकारी दफ्तरों में न सिर्फ धुआं नजर आता है, बल्कि इसके साथ कोटपा भी धुआं-धुआं नजर आता है।
उधर, राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम कोटपा को प्रभावी बनाने को एक बैठक का आयोजन कर जिलाधिकारी रमेश मिश्र भी निर्देश जारी कर चुके हैं। उन्होंने जिले को धूूम्रपान रहित बनाए जाने को लेकर सार्वजनिक स्थलों पर कड़ाई से निरीक्षण चरणवार कराने के निर्देश दिए।
प्रथम चरण में कचहरी, तहसीलों में द्वितीय चरण में अस्पताल, स्कूलों, कालेजों और तीसरे चरण में सार्वजनिक स्थानों पर नामित विभागाें के अफसरों द्वारा निरीक्षण होगा। धूम्रपान करने वालों पर कार्रवाई होगी। सार्वजनिक स्थानों पर धुएं के छल्ले उड़ाना महंगा पड़ सकता है।
होटल, ढाबा संचालक व रेस्टोरेंट में सार्वजनिक रूप से सिगरेट के कश नहीं लगा सकेंगे। अस्पताल, नर्सिंग होम, स्कूल, बस स्टाप, रेलवे स्टेशन, बस आदि नो स्मोकिंग जोन में शामिल है। यहां तक सरकारी कार्यालयों में भी धुएं के छल्ले उड़ाने पर जुर्माना देना पड़ सकता है।
इससे जिले में युवाओं में बढ़ रही नशे के लत में कुछ कमी आएगी। इसके क्रियान्वयन के लिए शासन से जिला प्रशासन को निर्देश जारी किए गए हैं। बताते चले कि तंबाकू उत्पाद अधिनियम के लागू होने के बाद देश में कहीं भी सार्वजनिक स्थानों पर धूम्र्रपान नहीं किया जा सकता है। इसके लिए जुर्माने को प्रावधान किया गया है।