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जय मां दुर्गे खप्पर वाली के लगे जयकारे
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई
Updated Mon, 23 Mar 2015 12:11 AM IST
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नवरात्र में माता को प्रसन्न करने के बाद उनकी कृपा
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का पात्र बनने को श्रद्धालु कई प्रकार के पूजन पाठ करते हैं। जिनसे मां
प्रसन्न होकर उन्हें अद्भुत शक्तियां प्रदान करती है। शास्त्रों के
जानकारों का कहना है कि नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती का नियमित पाठ विधि
विधान से किया जाए तो माता न सिर्फ प्रसन्न ही होती हैं, बल्कि श्रद्धालु
को अद्भुत शक्तियां भी प्रदान करती हैं।
शास्त्रों के जानकार शास्त्री उमाकांत अवस्थी का कहना है कि दुर्गा सप्तशती में 700 प्रयोग हैं, इसका नियमित पाठ विधि विधान से करने के बाद ही लाभ मिलता है। उन्होंने विधि के बारे में बताते हुए कहा कि सर्वप्रथम साधक को स्नान कर शुद्ध हो जाना चाहिए।
आसन शुद्धि की प्रक्रिया को पूरा करने के बाद आसन पर बैठ जाएं। माथे पर अपनी पसंद के अनुसार भस्म, चंदन व रोली लगा लेे। शिखा बांध ले फिर पूर्वाभिमुख होकर चार बार आचमन करें फिर मंत्र से कुश की पवित्री धारण करके हाथ में लाल फूल, अक्षत व जल लेकर देवी को अर्पित करें।
देवी का ध्यान करते हुए पंचोपचार विधि से पुस्तक की पूजा करें। फिर मूल नवणि मंत्र से पीठ आदि में आधार शक्ति की स्थापना करके उसके ऊपर पुस्तक को विराजमान करें। इसके बाद विधि विधान से सप्तशती पुस्तक का पाठ करें। उधर, नवरात्र के दूसरे दिन रविवार को भी मंदिरों में माता के नाम के जयकारे गूंजते रहे।
दूसरे दिन ब्रह्मचारिणी और चंद्रघंटा के जयकारों से मंदिर गूंजते रहे। शहर के श्रवण देवी मंदिर, तुरंतनाथ मंदिर, बाबा सिद्धनाथ मंदिर, जिला अस्पताल चौराहा स्थित मौनी बाबा मंदिर, दुर्गा देवी मंदिर, फूलमती मंदिर आदि में मां के पूजन को लेकर दिन भर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।
मां के दर्शन व पूजन को लेकर श्रद्धालुओं को लाइनें तक लगानी पड़ गई। ब्रह्मचारिणी देवी के बारे में बताया गया कि देवी का यह स्वरूप पूर्व ज्योर्तिमय एवं अत्यंत सुंदर है। इनके दाहिने हाथ में जप की माला एवं बाए हाथ में कमंडल रहता है। इनकी उपासना से श्रद्धालुओं के अंदर सहनशीलता, तप, त्याग, सदाचार एवं संयम की वृद्धि होती है।
उधर, पिहानी में नवरात्र के दूसरे दिन मंदिरों में पूजन के साथ देवी के गुणगान का सिलसिला भी चला। कस्बे के इच्छापूर्णी मंदिर पर विशेष आयोजन कर महिलाओं ने माता रानी का गुणगान किया। इसी तरह से गायत्री प्रज्ञा पीठ पिहानी और गायत्री शक्ति पीठ मझिया पर भी नवरात्र पर विशेष कार्यक्रमों के जरिए पूजन और जाप किया गया।
शास्त्रों के जानकार शास्त्री उमाकांत अवस्थी का कहना है कि दुर्गा सप्तशती में 700 प्रयोग हैं, इसका नियमित पाठ विधि विधान से करने के बाद ही लाभ मिलता है। उन्होंने विधि के बारे में बताते हुए कहा कि सर्वप्रथम साधक को स्नान कर शुद्ध हो जाना चाहिए।
आसन शुद्धि की प्रक्रिया को पूरा करने के बाद आसन पर बैठ जाएं। माथे पर अपनी पसंद के अनुसार भस्म, चंदन व रोली लगा लेे। शिखा बांध ले फिर पूर्वाभिमुख होकर चार बार आचमन करें फिर मंत्र से कुश की पवित्री धारण करके हाथ में लाल फूल, अक्षत व जल लेकर देवी को अर्पित करें।
देवी का ध्यान करते हुए पंचोपचार विधि से पुस्तक की पूजा करें। फिर मूल नवणि मंत्र से पीठ आदि में आधार शक्ति की स्थापना करके उसके ऊपर पुस्तक को विराजमान करें। इसके बाद विधि विधान से सप्तशती पुस्तक का पाठ करें। उधर, नवरात्र के दूसरे दिन रविवार को भी मंदिरों में माता के नाम के जयकारे गूंजते रहे।
दूसरे दिन ब्रह्मचारिणी और चंद्रघंटा के जयकारों से मंदिर गूंजते रहे। शहर के श्रवण देवी मंदिर, तुरंतनाथ मंदिर, बाबा सिद्धनाथ मंदिर, जिला अस्पताल चौराहा स्थित मौनी बाबा मंदिर, दुर्गा देवी मंदिर, फूलमती मंदिर आदि में मां के पूजन को लेकर दिन भर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।
मां के दर्शन व पूजन को लेकर श्रद्धालुओं को लाइनें तक लगानी पड़ गई। ब्रह्मचारिणी देवी के बारे में बताया गया कि देवी का यह स्वरूप पूर्व ज्योर्तिमय एवं अत्यंत सुंदर है। इनके दाहिने हाथ में जप की माला एवं बाए हाथ में कमंडल रहता है। इनकी उपासना से श्रद्धालुओं के अंदर सहनशीलता, तप, त्याग, सदाचार एवं संयम की वृद्धि होती है।
उधर, पिहानी में नवरात्र के दूसरे दिन मंदिरों में पूजन के साथ देवी के गुणगान का सिलसिला भी चला। कस्बे के इच्छापूर्णी मंदिर पर विशेष आयोजन कर महिलाओं ने माता रानी का गुणगान किया। इसी तरह से गायत्री प्रज्ञा पीठ पिहानी और गायत्री शक्ति पीठ मझिया पर भी नवरात्र पर विशेष कार्यक्रमों के जरिए पूजन और जाप किया गया।