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Hardoi News: अफसरों के भ्रम ने अटकाए तीन हजार जन्म प्रमाण पत्र
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हरदोई। जन्म के दो साल से अधिक समय बाद बनने वाले प्रमाण पत्रों के लिए अनुमति की प्रक्रिया को लेकर भ्रम की स्थिति बन गई। नतीजा यह हुआ कि जिले में करीब तीन हजार से अधिक जन्म प्रमाण पत्र के आवेदन लंबित हो गए। समय से आवेदन निस्तारित न होने से आवेदकों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।
जन्म प्रमाण पत्र जारी किए जाने की व्यवस्था में बदलाव किया गया। यह बदलाव दो या इससे अधिक साल पहले पैदा हुए बच्चों के जन्म पंजीकरण और जन्म प्रमाण पत्र पर लागू होता है। प्रभावी व्यवस्था में संबंधित एसडीएम की तरफ से शपथ पत्र पर आने वाले आवेदन पर अनुमति दी जाती है। भारत सरकार के एक आदेश ने अधिकारियों में भ्रम की स्थिति पैदा कर दी। इस आदेश में ऐसे आवेदनों पर एसडीएम के स्थान पर न्यायिक मजिस्ट्रेट को अनुमति दिए जाने का अधिकार दिए जाने की बात कही गई है, लेकिन नोटिफिकेशन नहीं हुआ है।
आदेश को मानते हुए अधिकारियों ने आवेदनों पर अनुमति देना बंद कर दिया। अधिकारियों की ऊहापोह से जन्म प्रमाण पत्र के बड़ी संख्या में आवेदन लंबित हो गए। सदर तहसील में करीब 2,500 आवेदन और सवायजपुर तहसील में 500 से अधिक आवेदन लंबित हो गए हैं। दो या इससे अधिक साल पहले पैदा हुए बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र की प्रक्रिया में न्यायिक मजिस्ट्रेट की अनुमति को लेकर हुए भ्रम ने आवेदकों की परेशानी बढ़ा दीं।
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केस एक : तहसील सवायजपुर के विकास खंड भरखनी के मुंडेर निवासी राजेश कुमार ने अपनी पुत्री पल्लवी और पुत्र अरुज के जन्म प्रमाण पत्र जारी किए जाने के लिए आवेदन किए हैं। दोनों आवेदन करीब एक माह से लंबित हैं।
केस दो :
तहसील सवायजपुर के विकास खंड भरखनी के सराय राघव निवासी दीपक कुमार ने अपने पुत्र अवनी और पुत्री निष्ठा के जन्म प्रमाण पत्र के लिए आवेदन दिए हैं। आवेदन एक माह से अधिक समय से लंबित हैं।
वीडियो कांफ्रेंसिंग में उठा मामला
बुधवार को मुख्य सचिव की वीडियो कांफ्रेंसिंग में जन्म प्रमाण पत्र के आवेदनों के लंबित होने का मामला अधिकारियों ने संज्ञान दिलाया। इस पर मुख्य सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिए कि नई व्यवस्था का नोटिफिकेशन होने तक पुरानी व्यवस्था को प्रभावी माना जाए। उसी व्यवस्था में आवेदनों को निस्तारित किया जाए। इससे राहत की उम्मीद है। -प्रफुल्ल कुमार त्रिपाठी, अपर जिलाधिकारी
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जन्म प्रमाण पत्र जारी किए जाने की व्यवस्था में बदलाव किया गया। यह बदलाव दो या इससे अधिक साल पहले पैदा हुए बच्चों के जन्म पंजीकरण और जन्म प्रमाण पत्र पर लागू होता है। प्रभावी व्यवस्था में संबंधित एसडीएम की तरफ से शपथ पत्र पर आने वाले आवेदन पर अनुमति दी जाती है। भारत सरकार के एक आदेश ने अधिकारियों में भ्रम की स्थिति पैदा कर दी। इस आदेश में ऐसे आवेदनों पर एसडीएम के स्थान पर न्यायिक मजिस्ट्रेट को अनुमति दिए जाने का अधिकार दिए जाने की बात कही गई है, लेकिन नोटिफिकेशन नहीं हुआ है।
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आदेश को मानते हुए अधिकारियों ने आवेदनों पर अनुमति देना बंद कर दिया। अधिकारियों की ऊहापोह से जन्म प्रमाण पत्र के बड़ी संख्या में आवेदन लंबित हो गए। सदर तहसील में करीब 2,500 आवेदन और सवायजपुर तहसील में 500 से अधिक आवेदन लंबित हो गए हैं। दो या इससे अधिक साल पहले पैदा हुए बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र की प्रक्रिया में न्यायिक मजिस्ट्रेट की अनुमति को लेकर हुए भ्रम ने आवेदकों की परेशानी बढ़ा दीं।
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केस एक : तहसील सवायजपुर के विकास खंड भरखनी के मुंडेर निवासी राजेश कुमार ने अपनी पुत्री पल्लवी और पुत्र अरुज के जन्म प्रमाण पत्र जारी किए जाने के लिए आवेदन किए हैं। दोनों आवेदन करीब एक माह से लंबित हैं।
केस दो :
तहसील सवायजपुर के विकास खंड भरखनी के सराय राघव निवासी दीपक कुमार ने अपने पुत्र अवनी और पुत्री निष्ठा के जन्म प्रमाण पत्र के लिए आवेदन दिए हैं। आवेदन एक माह से अधिक समय से लंबित हैं।
वीडियो कांफ्रेंसिंग में उठा मामला
बुधवार को मुख्य सचिव की वीडियो कांफ्रेंसिंग में जन्म प्रमाण पत्र के आवेदनों के लंबित होने का मामला अधिकारियों ने संज्ञान दिलाया। इस पर मुख्य सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिए कि नई व्यवस्था का नोटिफिकेशन होने तक पुरानी व्यवस्था को प्रभावी माना जाए। उसी व्यवस्था में आवेदनों को निस्तारित किया जाए। इससे राहत की उम्मीद है। -प्रफुल्ल कुमार त्रिपाठी, अपर जिलाधिकारी