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जय भोले, जय भंडारी, महिमा न्यारी
ब्यूरो/अमर उजाला,हरदोई
Updated Sun, 02 Aug 2015 12:09 AM IST
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हिंदू पंचांग का पांचवां माह यानी सावन के पहले दिन
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शनिवार से ही भगवान शिव के मंदिरों में भक्तों का सुबह से ही मेला सा लगा
रहा। हर कोई विधि विधान से पूजन अर्चन करने के बाद अपने भोले को खुश करने
में लगा रहा। बहरहाल सावन मास के पहले दिन से ही न सिर्फ वातावरण शिवमय हो
गया, बल्कि चाहे घर हो या मंदिर हर जगह से बम भोले, बम भोले की आवाजें
सुनाई देती रहीं।
धर्म शास्त्रों में इसे श्रावण भी कहा जाता है। श्रावण का अर्थ है सुनना, इसलिए यह भी कहा जाता है कि इस माह में सत्संग, प्रवचन व धर्मोपदेश से विशेष फल मिलता है। अबकी श्रावण का आरंभ शनिवार से हो गया। शास्त्रों के जानकारों का कहना है कि यह माह भगवान शंकर की भक्ति के लिए विशेष माना जाता है।
धर्म ग्रंथों में इस मास में विधि पूर्वक शिव उपासना करने से मनचाहे फल की प्राप्ति होती है। सावन में ही कई प्रमुख त्योहार जैसे हरियाली अमावस्या, नाग पंचमी तथा रक्षा बंधन आदि आते हैं। कहना गलत न होगा कि इस माह में भक्ति, आराधना और प्रकृति के कई रंग देखने को मिलते हैं।
कुल मिलाकर सावन मास के पहले दिन ही जिले भर के मंदिरों में भक्तों का जमावड़ा रहा। उधर, जिले के मंदिरों में सकाहा मंदिर, सुनासीर नाथ मंदिर, बाबा विश्वनाथ, तुरंत नाथ मंदिर, बूढ़े बाबा मंदिर, शिव भोले मंदिर आदि मंदिरों में शिव के पूजन अर्चन को भक्तों का जमावड़ा लगा रहा।
बेल पत्र, धतूरा आदि चढ़ाकर भगवान शिव का पूजन किया गया। उधर, शिव की आराधना और्र उससे मिलने वाला फल किसी भी माह, किसी भी क्षण प्राप्त होता है, पर सावन में भगवान शिव जल्द प्रसन्न होते हैं, तो पूरा माह हर जगह बम बम भोले के ही स्वर सुनाई देते हैं।
शास्त्रों के जानकारों की माने तो शिव की प्रसन्नता के बाद श्रद्धालुओं पर शनि देव की कृपा भी बरसती है। जानकारों का कहना है कि श्रद्धालु शिव को प्रसन्न कर कुंडली में शनि दशा के दोष को दूर क र सकते हैं। पौराणिक प्रसंगों की भी माने तो शनिदेव ने शिव भक्ति से नवग्रहों में ऊंचा स्थान पाया है।
मान्यता तो यह भी है कि शनि महादेव के आदेश का पालन कर प्राणियों को उनके कर्मों के मुताबिक दंड देते हैं। शास्त्रों के जानकर उमाकांत अवस्थी का कहना है कि शास्त्रों में बताए गए शिव उपासना के कुछ आसान उपाय कुंडली में शनि दशा या दोष से जीवन में आ रही तमाम परेशानियों से राहत पा सकता है।
शास्त्री ने बताया कि शनि या सोमवार के दिन शिव को शिव मंत्र ऊं नम शिवाय बोलते हुए जल से अभिषेक कर गंध, अक्षत फूल चढ़ाएं। साथ में काले तिल भी अर्पित करें। भगवान शिव को सफेद मिठाई का भोग लगाकर आरती कर शनि दशा से मुक्ति पाई जा सकती है।
इसके अलावा दूसरी युक्ति में शिव की पूजा में कोई भी शिव मंत्र या स्तुति बोलकर 108 आंकड़े के फूल हर रोज अर्पित करने से भी कृपा प्राप्त होगी। शास्त्री का कहना है कि सावन मास अपने आप में ही इतना पावन है कि हर हाथ खुद भगवान शिव की आराधना करने को उठते हैं, तो हर जुबान पर भोले के स्वर आ ही जाते हैं।
इसी तरह भगवान शिव भी इस माह आशीर्वाद देने को अपने हाथों को खुला ही रखते हैं, इसलिए भगवान शिव की कृपा पाने को इससे अच्छा मौका श्रद्धालुओं के पास कोई नहीं है, तो शनि दशा में सुधार को लेकर भी भगवान शिव के पास से होकर रास्ता गुजरता है। इसलिए विधि विधान से पूजन कष्टों का निवारण कर सकता है।
धर्म शास्त्रों में इसे श्रावण भी कहा जाता है। श्रावण का अर्थ है सुनना, इसलिए यह भी कहा जाता है कि इस माह में सत्संग, प्रवचन व धर्मोपदेश से विशेष फल मिलता है। अबकी श्रावण का आरंभ शनिवार से हो गया। शास्त्रों के जानकारों का कहना है कि यह माह भगवान शंकर की भक्ति के लिए विशेष माना जाता है।
धर्म ग्रंथों में इस मास में विधि पूर्वक शिव उपासना करने से मनचाहे फल की प्राप्ति होती है। सावन में ही कई प्रमुख त्योहार जैसे हरियाली अमावस्या, नाग पंचमी तथा रक्षा बंधन आदि आते हैं। कहना गलत न होगा कि इस माह में भक्ति, आराधना और प्रकृति के कई रंग देखने को मिलते हैं।
कुल मिलाकर सावन मास के पहले दिन ही जिले भर के मंदिरों में भक्तों का जमावड़ा रहा। उधर, जिले के मंदिरों में सकाहा मंदिर, सुनासीर नाथ मंदिर, बाबा विश्वनाथ, तुरंत नाथ मंदिर, बूढ़े बाबा मंदिर, शिव भोले मंदिर आदि मंदिरों में शिव के पूजन अर्चन को भक्तों का जमावड़ा लगा रहा।
बेल पत्र, धतूरा आदि चढ़ाकर भगवान शिव का पूजन किया गया। उधर, शिव की आराधना और्र उससे मिलने वाला फल किसी भी माह, किसी भी क्षण प्राप्त होता है, पर सावन में भगवान शिव जल्द प्रसन्न होते हैं, तो पूरा माह हर जगह बम बम भोले के ही स्वर सुनाई देते हैं।
शास्त्रों के जानकारों की माने तो शिव की प्रसन्नता के बाद श्रद्धालुओं पर शनि देव की कृपा भी बरसती है। जानकारों का कहना है कि श्रद्धालु शिव को प्रसन्न कर कुंडली में शनि दशा के दोष को दूर क र सकते हैं। पौराणिक प्रसंगों की भी माने तो शनिदेव ने शिव भक्ति से नवग्रहों में ऊंचा स्थान पाया है।
मान्यता तो यह भी है कि शनि महादेव के आदेश का पालन कर प्राणियों को उनके कर्मों के मुताबिक दंड देते हैं। शास्त्रों के जानकर उमाकांत अवस्थी का कहना है कि शास्त्रों में बताए गए शिव उपासना के कुछ आसान उपाय कुंडली में शनि दशा या दोष से जीवन में आ रही तमाम परेशानियों से राहत पा सकता है।
शास्त्री ने बताया कि शनि या सोमवार के दिन शिव को शिव मंत्र ऊं नम शिवाय बोलते हुए जल से अभिषेक कर गंध, अक्षत फूल चढ़ाएं। साथ में काले तिल भी अर्पित करें। भगवान शिव को सफेद मिठाई का भोग लगाकर आरती कर शनि दशा से मुक्ति पाई जा सकती है।
इसके अलावा दूसरी युक्ति में शिव की पूजा में कोई भी शिव मंत्र या स्तुति बोलकर 108 आंकड़े के फूल हर रोज अर्पित करने से भी कृपा प्राप्त होगी। शास्त्री का कहना है कि सावन मास अपने आप में ही इतना पावन है कि हर हाथ खुद भगवान शिव की आराधना करने को उठते हैं, तो हर जुबान पर भोले के स्वर आ ही जाते हैं।
इसी तरह भगवान शिव भी इस माह आशीर्वाद देने को अपने हाथों को खुला ही रखते हैं, इसलिए भगवान शिव की कृपा पाने को इससे अच्छा मौका श्रद्धालुओं के पास कोई नहीं है, तो शनि दशा में सुधार को लेकर भी भगवान शिव के पास से होकर रास्ता गुजरता है। इसलिए विधि विधान से पूजन कष्टों का निवारण कर सकता है।