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कर्मी नजरबंद, डोले मंसूबे, गूंजा हल्ला बोल
ब्यूरो/अमर उजाला,हरदोई
Updated Fri, 24 Jul 2015 12:17 AM IST
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राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के प्रांतीय नेतृत्व के
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आह्वान पर गुरुवार को लखनऊ के लक्ष्मण मेला पार्क में होने वाली रैली को
नाकाम करने को सुबह से ही लखनऊ जाने वाले मार्गाें और साधनों पर पुलिस
महकमे ने रैली में जाने वाले कर्मियों के वाहनों को रोक सवार कर्मियों को
नजर बंद कर लिया।
जिला ही नहीं आस पास के तीन जिलों के वाहनों को रोक उसमें सवार कर्मियों को कलक्ट्रेट में नजरबंद रखा गया। हालांकि, विरोध करते हुए जनपदीय शाखा के पदाधिकारियों व कर्मचारियों ने पुलिस अफसरों की निगहबानी में ही शहर भर में पैदल मार्च कर अपना विरोध जताया।
ज्ञात हो कि राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के प्रदेश नेतृत्व ने राज्य कर्मचारियों को केंद्रीय कर्मचारियों की भांति समस्त भत्तों की समानता प्रदान करने, नई पेंशन व्यवस्था को समाप्त कर पुरानी पेंशन व्यवस्था को बहाल करने, राज्य कर्मचारियों को आठ, 16, 24 वर्षो की कुल सेवा के आधार पर तीन पदोन्नति पद का ग्रेड देने समेत आठ सूत्री मांगों को लेकर लखनऊ मेला पार्क में हल्ला बोल का आगाज किया था।
जिसको लेकर जिले से भी हजारों की संख्या में राज्य कर्मचारी लखनऊ जाने को तैयार थे, पर शासन के निर्देश पर गुरुवार की शहर की सीमाओं से लगे चौराहों, रेलवे स्टेशन, बस अड्डे पर तो पुलिस अफसरों व तैनात मजिस्ट्रेटों ने रैली में शामिल होने वाले कर्मियों के वाहनों को रोक पहले पुलिस लाइन ले गए।
इसके बाद वहां से कलक्ट्रेट परिसर में नजर बंद रखा। इस दौरान जिले के अलावा फर्रुखाबाद, शाहजहांपुर व बरेली के उन वाहनों को भी रोका गया, जो रैली में शामिल होने जा रहे थे। इसके बाद कलक्ट्रेट परिसर में नजर बंद रखे गए राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के बैनर तले कर्मियों ने परिसर में ही जोरदार प्रदर्शन किया।
इसके अलावा एकजुट होकर पुलिस व प्रशासनिक अफसरों की निगहबानी में शहर के प्रमुख मार्गों पर पैदल मार्च व नारेबाजी कर विरोध प्रदर्शन भी जताया। दोपहर बाद जिले के अलावा आसपास के जिलों के कर्मचारियों को भी उनके जिलों के साथ अनुमति दे दी गई।
कुल मिलाकर शासन के निर्देशों पर प्रशासनिक तौर पर जिले में ही रोके गए कर्मियों ने इस पूरे घटनाक्रम का पुरजोर विरोध किया। एडीएम लक्ष्मी शंकर सिंह, एएसपी पूर्वी बीसी दुबे के नेतृत्व में रेलवे स्टेशन, बस अड्डे, सड़क मार्ग आदि पर अभियान चलाकर रैली में शामिल होने वाले वाहनों को रोक कर कर्मियों को कलक्ट्रेट लाया जाता रहा।
उधर, बुधवार की रात 10 बजे से पूर्व ही जिला प्रशासन को शासन स्तर से सूचित किया जा चुका था कि जिले से कर्मियों को लखनऊ न आने दिया जाए। यहां से गुजरने वाले कर्मियों को जिले पर ही रोक लिया जाए। इसके बाद रात 10 बजे से ही प्रशासन ने जिले के राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के पदाधिकारियों को फोन पर ही यही रुक कर प्रदर्शन व रैली करने को गया था, जिसका पदाधिकारियों द्वारा विरोध किया गया था, पर सुबह वही हुआ जो प्रशासन करना चाहता था।
उधर, लखनऊ की रैली को लेकर जिले में ही 15 बड़ी व 20 छोटी गाड़ियों को कर्मचारी संगठनों द्वारा बुक कराया गया था। जिनके वाहनों की तलाश प्रशासन ने रात में ही करनी शुरू कर दी थी। सूत्रों की माने तो रात्रि करीब एक बजे प्रशासन के पास वाहनों के नंबर भी मुहैया थे, जिनकी सुबह धरपकड़ शुरू कर दी गई।
जिला ही नहीं आस पास के तीन जिलों के वाहनों को रोक उसमें सवार कर्मियों को कलक्ट्रेट में नजरबंद रखा गया। हालांकि, विरोध करते हुए जनपदीय शाखा के पदाधिकारियों व कर्मचारियों ने पुलिस अफसरों की निगहबानी में ही शहर भर में पैदल मार्च कर अपना विरोध जताया।
ज्ञात हो कि राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के प्रदेश नेतृत्व ने राज्य कर्मचारियों को केंद्रीय कर्मचारियों की भांति समस्त भत्तों की समानता प्रदान करने, नई पेंशन व्यवस्था को समाप्त कर पुरानी पेंशन व्यवस्था को बहाल करने, राज्य कर्मचारियों को आठ, 16, 24 वर्षो की कुल सेवा के आधार पर तीन पदोन्नति पद का ग्रेड देने समेत आठ सूत्री मांगों को लेकर लखनऊ मेला पार्क में हल्ला बोल का आगाज किया था।
जिसको लेकर जिले से भी हजारों की संख्या में राज्य कर्मचारी लखनऊ जाने को तैयार थे, पर शासन के निर्देश पर गुरुवार की शहर की सीमाओं से लगे चौराहों, रेलवे स्टेशन, बस अड्डे पर तो पुलिस अफसरों व तैनात मजिस्ट्रेटों ने रैली में शामिल होने वाले कर्मियों के वाहनों को रोक पहले पुलिस लाइन ले गए।
इसके बाद वहां से कलक्ट्रेट परिसर में नजर बंद रखा। इस दौरान जिले के अलावा फर्रुखाबाद, शाहजहांपुर व बरेली के उन वाहनों को भी रोका गया, जो रैली में शामिल होने जा रहे थे। इसके बाद कलक्ट्रेट परिसर में नजर बंद रखे गए राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के बैनर तले कर्मियों ने परिसर में ही जोरदार प्रदर्शन किया।
इसके अलावा एकजुट होकर पुलिस व प्रशासनिक अफसरों की निगहबानी में शहर के प्रमुख मार्गों पर पैदल मार्च व नारेबाजी कर विरोध प्रदर्शन भी जताया। दोपहर बाद जिले के अलावा आसपास के जिलों के कर्मचारियों को भी उनके जिलों के साथ अनुमति दे दी गई।
कुल मिलाकर शासन के निर्देशों पर प्रशासनिक तौर पर जिले में ही रोके गए कर्मियों ने इस पूरे घटनाक्रम का पुरजोर विरोध किया। एडीएम लक्ष्मी शंकर सिंह, एएसपी पूर्वी बीसी दुबे के नेतृत्व में रेलवे स्टेशन, बस अड्डे, सड़क मार्ग आदि पर अभियान चलाकर रैली में शामिल होने वाले वाहनों को रोक कर कर्मियों को कलक्ट्रेट लाया जाता रहा।
उधर, बुधवार की रात 10 बजे से पूर्व ही जिला प्रशासन को शासन स्तर से सूचित किया जा चुका था कि जिले से कर्मियों को लखनऊ न आने दिया जाए। यहां से गुजरने वाले कर्मियों को जिले पर ही रोक लिया जाए। इसके बाद रात 10 बजे से ही प्रशासन ने जिले के राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के पदाधिकारियों को फोन पर ही यही रुक कर प्रदर्शन व रैली करने को गया था, जिसका पदाधिकारियों द्वारा विरोध किया गया था, पर सुबह वही हुआ जो प्रशासन करना चाहता था।
उधर, लखनऊ की रैली को लेकर जिले में ही 15 बड़ी व 20 छोटी गाड़ियों को कर्मचारी संगठनों द्वारा बुक कराया गया था। जिनके वाहनों की तलाश प्रशासन ने रात में ही करनी शुरू कर दी थी। सूत्रों की माने तो रात्रि करीब एक बजे प्रशासन के पास वाहनों के नंबर भी मुहैया थे, जिनकी सुबह धरपकड़ शुरू कर दी गई।