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Hardoi News: बस यही संवेदनशीलता दिखाएं तो घट जाएं प्रसव के दौरान महिलाओं की मौत के आंकड़े

Wed, 24 Jun 2026 10:52 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 24 Jun 2026 10:52 PM IST
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If only this sensitivity is shown, the figures for maternal deaths during childbirth could decrease.
हरदोई। स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली की खबरें तो रोज ही आती हैं, लेकिन गर्भवती महिलाओं की देखरेख को लेकर प्रशासनिक संवेदनशीलता भी सामने आई है। हाईरिक्स प्रेग्नेंसी के मामलों को गंभीरता से लेते हुए इनमें रक्त संबंधी कमी दूर करने की कवायद किस गंभीरता से हो रही है, उसके कुछ मामले यहां दिए जा रहे हैं। हाल यह है कि हीमोग्लोबिन कम होने और इससे जच्चा बच्चा को खतरा होने की जानकारी के बाद भी परिजन और महिला बिना चिकित्सक को बताए घर चली जाती हैं। ऐसे तीन मामले सामने आए हैं जिनमें प्रशासन ने गर्भवती महिलाओं के घर पर स्वास्थ्य टीम भेजकर उनके रक्त चढ़वाने की व्यवस्था से लेकर अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं भी कराईं।
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केस-1

अतरौली थाना क्षेत्र के कुरौंध निवासी अन्नपूर्णा गर्भवती हैं। प्रसवपूर्व होने वाली जांचों के लिए वह बीती छह जून को सीएचसी भरावन गई थीं। यहां डाक्टर श्वेता राज ने उनकी जांच की, तो पता चला कि हीमोग्लोबिन महज 3.7 ग्राम है। सामान्य स्तर से कम हीमोग्लोबिन होने के कारण स्थिति गंभीर थी। उन्हें रक्त चढ़वाने की सलाह दी गई, लेकिन अन्नपूर्णा वापस अपने घर चली गई। इसका पता चलने पर सीएचसी अधीक्षक डॉ. अरविंद मिश्रा ने उनके घर टीम भेजी। टीम के जरिए उन्हें लखनऊ के क्वीनमैरी चिकित्सालय में भर्ती कराया गया और यहीं रक्त चढ़वाया गया। यहां से भी अन्नपूर्णा परिजनों के साथ बिना चिकित्सक को बताए वापस घर गईं। नौ जून को उन्हें फिर से संडीला सीएचसी में भर्ती कराया गया। अलग अलग तारीखों में रक्त चढ़ाए जाने के बाद अब उनका हीमोग्लोबिन 8.2 ग्राम है।
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केस-2
संडीला विकास खंड के तिलोइया निवासी पूजा ने 12 जून को सीएचसी में प्रसव पूर्व होने वाली जांचें कराईं। हीमो ग्लोबिन 5.1 आने पर उन्हें 12 और 16 जून को एक एक यूनिट ब्लड चढ़ाया गया। अब उनका हीमोग्लोबिन 7.5 है। इसी तरह संडीला विकास खंड की पटेहरा निवासी रीमा भी गर्भवती हैं। जांच के दौरान उनका हीमोग्लोबिन 6.1 मिला। इस पर सीएचसी प्रबंधन ने दो यूनिट रक्त अलग अलग तारीखों में चढ़वाया। अब उनका हीमोग्लोबिन 7.9 है।
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डीएम से लेकर ज्वाइंट मजिस्ट्रेट तक लेते रहे अपडेट
तीनों ही मामलों को जिला प्रशासन ने बेहद गंभीरता से लिया। जिलाधिकारी अनुनय झा से लेकर संडीला की ज्वाइंट मजिस्ट्रेट नारायणी भाटिया तक ने उक्त महिलाओं को लेकर संडीला सीएचसी के अधीक्षक डॉ. मनोज सिंह और भरावन सीएचसी के अधीक्षक डॉ. अरविंद मिश्रा से लगातार अपडेट लिया। इसी का नतीजा है कि चिकित्सक भी गंभीर हैं और अब इन महिलाओं के परिजन भी गंभीरता से इलाज करा रहे हैं।
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