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Hardoi News: सॉफ्टवेयर के फेर में फंसे स्वास्थ्य विभाग के लाभार्थी, कर्मचारियों के मानदेय भी अटके
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हरदोई। स्पर्श के जरिये केंद्र सरकार के वित्तीय प्रबंधन में पारदर्शिता की कवायद शुरू हुई थी। इसके तहत सिंगल नोडल एजेंसी से भुगतान के लिए व्यवस्था होनी थी। यह काम वर्ष 2023 में पूरा होना था। इसके लिए कुछ औपचारिकताएं पूरी होनी थीं।
चर्चा है कि नेशनल हेल्थ मिशन के जिम्मेदारों ने लापरवाही की। अब नतीजा लाभार्थियों और कर्मचारियों को भुगतना पड़ रहा है। पिछले तीन माह से एनएचएम की विभिन्न योजनाएं प्रभावित हो रही हैं। 1280 कर्मचारियों का मानदेय अटका है। लगभग 34 हजार गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड की निशुल्क सुविधा नहीं मिल पा रही है। जननी सुरक्षा योजना का लाभ भी प्रसूताओं को नहीं मिल रहा है।
34,388 गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड के लिए खर्च करने पड़ रहे रुपये
हरदोई। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व योजना के तहत गर्भवती महिलाओं का निशुल्क अल्ट्रासाउंड किए जाने की व्यवस्था है। अगर किसी सीएचसी पर अल्ट्रासाउंड मशीन की व्यवस्था नहीं होती है तो वहां प्राइवेट सेंटर से स्वास्थ्य विभाग अनुबंध करता है। एक ई-रुपी वाउचर जनरेट कर क्यूआर कोड के माध्यम से संबंधित सेंटर को प्रति अल्ट्रासाउंड 425 रुपये का भुगतान किया जाता है। वाउचर संबंंधित गर्भवती को देकर प्राइवेट सेंटर भेजा जाता है ताकि निशुल्क अल्ट्रासाउंड हो सके। सॉफ्टवेयर में खामी के कारण पिछले तीन माह से प्राइवेट सेंटरों को भुगतान नहीं हो पा रहा है। जनपद में मौजूदा समय में 34 हजार, 388 गर्भवती महिलाएं हैं। वाउचर जनरेट न होने के कारण महिलाओं को प्राइवेट सेंटरों पर खुद रुपये खर्च कर अल्ट्रासाउंड कराना पड़ रहा है।
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15,512 प्रसूताओं की प्रोत्साहन राशि अटकी
संस्थागत प्रसव बढ़ाने के लिए जननी सुरक्षा योजना संचालित की जाती है। इसके तहत सरकारी अस्पतालों में प्रसव होने पर प्रसूता को प्रोत्साहन राशि दी जाती है। नगरीय क्षेत्र में एक हजार रुपये और ग्रामीण क्षेत्र में 1400 रुपये प्रसूता के बैंक खाते में भेजे जाते हैं। आशा को प्रत्येक संस्थागत प्रसव पर 600 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। जनपद में जुलाई के बाद से अब तक इस योजना के तहत किसी भी प्रसूता को लाभ नहीं दिया जा सका है। विभागीय सूत्र बताते हैं कि 15,512 प्रसूताओं की प्रोत्साहन राशि अटकी है। साथ ही आशा को दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि भी नहीं दी जा सकी है।
1280 कर्मचारियों के मानदेय भी अटके
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत जनपद में 1280 संविदा कर्मचारी तैनात हैं। इनमें चिकित्सक से लेकर चतुर्थ श्रेणी तक के कर्मचारी शामिल हैं। सॉफ्टवेयर में आई परेशानी संविदाकर्मियों के लिए भी मुसीबत का सबब बनी हुई है। अगस्त के बाद से इन कर्मचारियों को मानदेय नहीं मिल पाया है। दिवाली करीब होने के कारण इसको लेकर संविदा कर्मचारी आक्रोशित भी हैं।
क्या है एसएनए स्पर्श
हरदोई। एसएनए स्पर्श केंद्र सरकार के बजट से चलने वाली योजनाओं में भुगतान का गेटवे है। इससे केंद्र से राज्य सरकार को भेजे जाने वाले बजट की निगरानी में पारदर्शिता रहती है। यह सार्वजनिक वित्त प्रबंधन प्रणाली (पीएफएमएस), राज्य की एकीकृत वित्तीय प्रबंधन सूचना प्रणाली (आईएफएमआईएस) और आरबीआई के ई-कुबेर प्लेटफार्म से आपस में जुड़ी होती है। इससे केंद्र सरकार की योजनाओं में केंद्र सरकार का हिस्सा और राज्य सरकार का हिस्सा एक ही हेड ऑफ अकाउंट से क्लेम और बिल के रूप में तैयार होता है।
निदेशालय से एसएनए स्पर्श से भुगतान का प्रयास कराया जा रहा है। सबसे पहले कर्मचारियों की अगस्त माह का मानदेय दिया जाएगा। कर्मचारियों का मानदेय अपलोड हो चुका है, एक से दो दिन में खाते में पहुंचने की उम्मीद है। इसके बाद विभिन्न योजनाओं के भुगतान के लिए प्रयास किए जाएंगे। -डॉ. भवनाथ पांडेय, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
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चर्चा है कि नेशनल हेल्थ मिशन के जिम्मेदारों ने लापरवाही की। अब नतीजा लाभार्थियों और कर्मचारियों को भुगतना पड़ रहा है। पिछले तीन माह से एनएचएम की विभिन्न योजनाएं प्रभावित हो रही हैं। 1280 कर्मचारियों का मानदेय अटका है। लगभग 34 हजार गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड की निशुल्क सुविधा नहीं मिल पा रही है। जननी सुरक्षा योजना का लाभ भी प्रसूताओं को नहीं मिल रहा है।
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34,388 गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड के लिए खर्च करने पड़ रहे रुपये
हरदोई। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व योजना के तहत गर्भवती महिलाओं का निशुल्क अल्ट्रासाउंड किए जाने की व्यवस्था है। अगर किसी सीएचसी पर अल्ट्रासाउंड मशीन की व्यवस्था नहीं होती है तो वहां प्राइवेट सेंटर से स्वास्थ्य विभाग अनुबंध करता है। एक ई-रुपी वाउचर जनरेट कर क्यूआर कोड के माध्यम से संबंधित सेंटर को प्रति अल्ट्रासाउंड 425 रुपये का भुगतान किया जाता है। वाउचर संबंंधित गर्भवती को देकर प्राइवेट सेंटर भेजा जाता है ताकि निशुल्क अल्ट्रासाउंड हो सके। सॉफ्टवेयर में खामी के कारण पिछले तीन माह से प्राइवेट सेंटरों को भुगतान नहीं हो पा रहा है। जनपद में मौजूदा समय में 34 हजार, 388 गर्भवती महिलाएं हैं। वाउचर जनरेट न होने के कारण महिलाओं को प्राइवेट सेंटरों पर खुद रुपये खर्च कर अल्ट्रासाउंड कराना पड़ रहा है।
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15,512 प्रसूताओं की प्रोत्साहन राशि अटकी
संस्थागत प्रसव बढ़ाने के लिए जननी सुरक्षा योजना संचालित की जाती है। इसके तहत सरकारी अस्पतालों में प्रसव होने पर प्रसूता को प्रोत्साहन राशि दी जाती है। नगरीय क्षेत्र में एक हजार रुपये और ग्रामीण क्षेत्र में 1400 रुपये प्रसूता के बैंक खाते में भेजे जाते हैं। आशा को प्रत्येक संस्थागत प्रसव पर 600 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। जनपद में जुलाई के बाद से अब तक इस योजना के तहत किसी भी प्रसूता को लाभ नहीं दिया जा सका है। विभागीय सूत्र बताते हैं कि 15,512 प्रसूताओं की प्रोत्साहन राशि अटकी है। साथ ही आशा को दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि भी नहीं दी जा सकी है।
1280 कर्मचारियों के मानदेय भी अटके
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत जनपद में 1280 संविदा कर्मचारी तैनात हैं। इनमें चिकित्सक से लेकर चतुर्थ श्रेणी तक के कर्मचारी शामिल हैं। सॉफ्टवेयर में आई परेशानी संविदाकर्मियों के लिए भी मुसीबत का सबब बनी हुई है। अगस्त के बाद से इन कर्मचारियों को मानदेय नहीं मिल पाया है। दिवाली करीब होने के कारण इसको लेकर संविदा कर्मचारी आक्रोशित भी हैं।
क्या है एसएनए स्पर्श
हरदोई। एसएनए स्पर्श केंद्र सरकार के बजट से चलने वाली योजनाओं में भुगतान का गेटवे है। इससे केंद्र से राज्य सरकार को भेजे जाने वाले बजट की निगरानी में पारदर्शिता रहती है। यह सार्वजनिक वित्त प्रबंधन प्रणाली (पीएफएमएस), राज्य की एकीकृत वित्तीय प्रबंधन सूचना प्रणाली (आईएफएमआईएस) और आरबीआई के ई-कुबेर प्लेटफार्म से आपस में जुड़ी होती है। इससे केंद्र सरकार की योजनाओं में केंद्र सरकार का हिस्सा और राज्य सरकार का हिस्सा एक ही हेड ऑफ अकाउंट से क्लेम और बिल के रूप में तैयार होता है।
निदेशालय से एसएनए स्पर्श से भुगतान का प्रयास कराया जा रहा है। सबसे पहले कर्मचारियों की अगस्त माह का मानदेय दिया जाएगा। कर्मचारियों का मानदेय अपलोड हो चुका है, एक से दो दिन में खाते में पहुंचने की उम्मीद है। इसके बाद विभिन्न योजनाओं के भुगतान के लिए प्रयास किए जाएंगे। -डॉ. भवनाथ पांडेय, मुख्य चिकित्सा अधिकारी