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अलग बैरक में रखा गय गब्बू, अफसरों ने की काउंसलिंग

Tue, 23 Feb 2021 10:53 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 23 Feb 2021 10:53 PM IST
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हरदोई। डेढ़ वर्ष की मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म और फिर हत्या किए जाने के मामले में फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद दोषी गुड्डू उर्फ गब्बू को जिला कारागार में अलग बैरक में रखा गया है। सजा सुनाए जाने के बाद जेल पहुंचने पर गब्बू की काउंसलिंग भी की गई और उसके अधिकारों के बारे में बताया गया। उच्च न्यायालय में पैरवी की स्थिति में न होने की बात पता चलने पर जेल प्रशासन ने उसकी अपील के लिए विधिक प्रक्रिया भी शुरू करा दी है।
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सात वर्ष पहले डेढ़ वर्ष की मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म और हत्या किए जाने के मामले में सोमवार को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) कोर्ट संख्या 14 चंद्र विजय श्रीनेत ने गुड्डू उर्फ गब्बू को फांसी की सजा सुनाई थी। सजा सुनाए जाने के बाद गब्बू को कड़ी सुरक्षा के बीच वापस जेल ले जाया गया था। जिला कारागार में पहुंचने पर गब्बू को सजायाफ्ता मुजरिमों को दी जाने वाली वर्दी दे दी गई। वर्दी पहनाने के बाद उसे एक अलग बैरक में रखा गया। उसकी विशेष निगरानी की जा रही है। कारागार में वरिष्ठ अधिकारियों ने उसकी काउंसलिंग की व फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद की स्थिति में उसके अधिकारों की जानकारी दी। विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक काउंसलिंग के दौरान गब्बू सामान्य स्थिति में रहा। अवसाद के कोई लक्षण फौरी तौर पर उसमें नजर नहीं आए। जेल के अफसरों ने गब्बू से यह भी पूछा कि क्या वह हाईकोर्ट में फैसले के विरुद्ध अपील करेगा, तो गब्बू ने संसाधन न होने की बात कह दी। इस पर जेल प्रशासन की ओर से व्यवस्था के मुताबिक उच्च न्यायालय में पैरवी की प्रक्रिया को लेकर कार्रवाई आगे बढ़ा दी गई। जिला कारागार में फांसी दिए जाने की कोई व्यवस्था नहीं है, ऐसे में शासन स्तर से निर्णय लिया जाता है।
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मनोचिकित्सक को भेजी गई जानकारी
जेल अधीक्षक बृजेंद्र सिंह यादव व जेलर संजय कुमार सिंह ने बताया कि जिला कारागार में बंद गब्बू को फांसी की सजा सुनाए जाने की जानकारी मनोचिकित्सक टीम को दे दी गई है। दरअसल, मनोचिकित्सक डॉ. अंसू सूरी के नेतृत्व में एक टीम माह में एक बार जिला कारागार के बंदियों का जायजा लेती है। चूंकि गब्बू को फांसी की सजा सुनाई गई है, इसलिए इसकी सूचना अलग से टीम को दी गई है।
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सात वर्ष में कमाए 42 हजार से अधिक रुपये
जिला कारागार में बंद रहने के दौरान गब्बू ने किचन हेल्पर के रूप में कार्य किया। इस दौरान उसने 42,676 रुपये कमाए। जेल प्रशासन से जुड़े सूत्र बताते हैं कि निजी खर्चे के लिए उसने 25 हजार रुपये अलग-अलग निकाले। अब उसके हिस्से में लगभग 17 हजार रुपये हैं।
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