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मृदा स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए खेतों में बोंएं हरी खाद

Sun, 02 May 2021 06:37 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 02 May 2021 06:37 PM IST
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हरदोई। मृदा स्वास्थ्य सघन कृषि प्रणाली (वर्ष में तीन-चार फसलें लेना) व धान एवं गेहूं के फसल चक्र के कारण दिनों दिन गिरता जा रहा है। ऐसे मेें खेतों की मृदा में कार्बन प्रतिशत काफी कम (0.40 से भी कम) हो गया है।
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जिससे उपज प्रभावित होने लगती है या होने लगी है। कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि वैज्ञानिक मुकेश सिंह ने बताया कि ऐसे मेें समय पर मृदा का परीक्षण एवं उसका उचित उपचार आवश्यक हो जाता है।
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कृषि वैज्ञानिक ने बताया कि अच्छी उपज पाने के लिए यह आवश्यक है कि किसान मृदा का स्वास्थ्य बनाए रखें। मृदा स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है कि किसान रबी की फसलों की कटाई के बाद खाली पड़े खेतों में ढैंचा की बुवाई करें।
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इससे मृदा का स्वास्थ्य ठीक होगा और पैदावार बढ़ेगी। खेतों में हरी खाद को बोने और पलटाई करने के लिए लगभग दो माह का समय चाहिए। अगली फसल की बुवाई होने मेें वक्त है, इसलिए यह समय हरी खाद की बुवाई का उपयुक्त समय है।

कहा कि खेतों का पलेवा कर उसमें 40-50 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर ढैंचा की बुवाई करें। ढैंचा की फसल की जड़ों में विशेष प्रकार की गांठे पाई जाती हैं जो वातावरण में स्वतंत्र रूप से विद्यमान नाइट्रोजन को अपनी जड़ों द्वारा एकत्र कर पौधों को उपलब्ध कराती हैं।
इसके जरिये भूमि में जातिवार 60 से 100 किलोग्राम नाइट्रोजन उपलब्ध होती है, जिससे आगामी खरीफ की फसल में नाइट्रोजन की खपत काफी कम हो जाएगी।
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