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वर्ष 2017 से कंपोनेंट सेपरेटर यूनिट तैयार, उपकरणों का इंतजार

Mon, 17 May 2021 10:04 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 17 May 2021 10:04 PM IST
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हरदोई। रक्त की कीमत समझते हुए एक यूनिट से चार लोगों को जीवन दान देने के उद्देश्य से जिले में भी कंपोनेंट सेपरेटर यूनिट की परिकल्पना की गई थी।
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इसे साकार करने के लिए तत्कालीन सरकार की देखरेख में इमारत वर्ष 2017 में ही तैयार कर दी गई थी लेकिन उपकरण आज तक उपलब्ध नहीं कराए जा सके।
जिसके चलते यह इमारत सफेद हाथी ही साबित हो रही है और गोदाम के काम आ रही है। जबकि कोरोना काल में प्लाज्मा आदि को लेकर जरूरतमंद दर दर भटकते नजर आ रहे हैं।
जिले में अभी तक किसी रक्तदाता का दिया गया एक यूनिट रक्त सिर्फ एक की ही जान बचा सकता है। कंपोनेंट सेपरेटर यूनिट के कार्य करने के बाद इस एक यूनिट ब्लड को आरबीसी, प्लेट्लेट्स, प्लाज्मा व क्रयाओं में विभक्त किया जा सकता है।
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यानी एक यूनिट ब्लड जरूरत के हिसाब से चार लोगों के काम आ सकता है। इसकी उपयोगिता को समझते हुए वर्ष 2016 में प्रदेश में आठ जिलों को कंपोनेंट सेपरेटर यूनिट की स्थापना का निर्णय लिया गया।
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जिसमें हरदोई को भी शामिल था। प्रत्येक यूनिट की स्थापना के लिए शासन स्तर से एक करोड़ का बजट भी आवंटित कर दिया गया था। इस एक करोड़ के बजट से इमारत से लेकर उसमें उपकरण की उपलब्धता भी सुनिश्चित कराई जानी थी।
नवंबर 2017 तक जिले में जिला चिकित्सालय के ब्लड बैंक के पीछे यूनिट की इमारत तैयार करवा दी गई है। जिसके बाद से उपकरणों को लेकर इंतजार किया जा रहा है। चार साल का लंबा इंतजार खिंचने के बाद भी अब तक यहां उपकरण नहीं उपलब्ध कराए जा सके हैं।
इस संबंध में लैब टेक्नीशियन मो.अकील खान का कहना है कि इस बीच मुख्य चिकित्सा अधीक्षक द्वारा कई बार शासन को पत्र लिखा जा चुका है लेकिन इस ओर कोई सार्थक कदम उठते नहीं दिख रहे हैं। निश्चित रूप से यदि उपकरण आ जाए और यह यूनिट काम करना शुरू कर दे तो चार गुने लोगों को इसका फायदा हो सकता है।
एक यूनिट से यह चार चीजें होंगी अलग
- पीआरबीसी--पैक्ड आरबीसी
- प्लेटलेट्स
- प्लाज्मा
- क्रयाओ प्रेसिपिटर
अभी चार सौ तो बाद में 1200 को मिलेगा लाभ
ब्लड बैंक प्रभारी अकील खान का कहना है कि औसतन एक माह में ब्लड बैंक से चार सौ यूनिट रक्त दिया जाता है। जिससे सिर्फ चार सौ लोगों की ही जान बचाई जा सकती है।

लेकिन यूनिट के काम करने के बाद एक यूनिट को चार जगह विभक्त कर चार की जान बचाई जा सकेगी। क्योंकि फिर यदि किसी रोगी को प्लाज्मा या प्लेटलेट्स की जरूरत है तो उसे वही दिया जाएगा। आरबीसी, प्लाज्मा व क्रयाओ की बचत होगी।
इन आठ जिलों में हुई है स्थापना
प्रदेश के रायबरेली, जौनपुर, बिजनौर, सोनभद्र, खीरी, फर्रुखाबाद, ललितपुर व हरदोई में स्थापना किए जाने के आदेश थे।
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