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हरदोईः अधिकारी-कर्मियों बिना लड़ रहे कुपोषण से जंग
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हरदोई। नौनिहालों एवं गर्भवती महिलाओं की सेहत सुधारने के लिए बना महिला एवं बाल विकास महकमा खुद ही संसाधनों की कमी से जूझ रहा है।
विभाग में सृजित के सापेक्ष तमाम पद खाली पड़े हैं। जिन पदों पर अधिकारियों एवं कर्मचारियों की तैनाती है, वह भी अपनी जिम्मेदारियों से जी चुरा रहे हैं। ऐसे में यहां मासूमों की सेहत में सुधार की कल्पना भी बेमानी है।
जनपद में शून्य से छह वर्ष आयु के सैम श्रेणी के 2800, लाल श्रेणी के 7600 तथा आंशिक श्रेणी के 12 हजार कुपोषित बच्चे चिह्नित किए गए हैं। हर माह तीन हजार बच्चे जिले में पैदा हो रहे हैं।
इनकी सेहत को लेकर अभिलेखों में तमाम कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। यह दीगर बात है कि वास्तविकता से इनका कोई सरोकार नहीं है। खाली कुर्सियां कुपोषण के खिलाफ जंग लड़ रही हैं
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जिले के 3,930 आंगनबाड़ी केंद्रों पर कार्यकर्ताओं की नियुक्ति के साथ निगरानी व सहयोग के लिए 20 बाल विकास परियोजना अधिकारी (सीडीपीओ) व 138 मुख्य सेविकाओं के पद सृजित हैं।
तबादलों व सेवानिवृत्ति की वजह से पद खाली होते गए। नई नियुक्तियां कम हुईं, सेवानिवृत्ति व तबादले ज्यादा हुए। वर्तमान में 20 सीडीपीओ के पदों के सापेक्ष केवल सात सीडीपीओ और 138 मुख्य सेविकाओं के पदों के सापेक्ष 55 मुख्य सेविकाएं बची हैं।
कुपोषण से जंग लड़ने और जीतने के लिए प्रशासन के पास पर्याप्त अधिकारी-कर्मचारी नहीं बचे। इस लड़ाई में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ही जुटी हैं।
प्रशासन का यही विभाग कुपोषण से जंग की अगुवाई करता है। ऐसे में जिले से कुपोषण मिटाने का मिशन डगमगाने लगा है। डीएम ने इस स्थिति से निपटने के लिए शासन को पत्र लिखकर स्टाफ की मांग की है।
आंगनबाड़ी केंद्र भी हो रहे खाली
जिले में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता भी कम हुई हैं। 3930 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के सापेक्ष केवल 3422 आंगनबाड़ी कार्यकर्ता विभाग में सेवाएं दे रही हैं। 508 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के पद खाली हैं। पिछले वर्ष नई नियुक्तियों की उम्मीद जगी थी, लेकिन रोक लग जाने से विभाग को मायूसी मिली।
स्टाफ की कमी से संभव अभियान पर संकट
बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की ओर से जिले में तीन माह का संभव अभियान चलाया जा रहा है। पहले माह का आखिरी सप्ताह शुरू हो चुका है। विभाग को स्टाफ की कमी की वजह से पहले माह में ही अभियान को आगे बढ़ाने में कई परेशानियों का सामना करना पड़ा। अगस्त और सितंबर माह में इस अभियान के लिए स्टाफ की कमी रुकावट बन सकती है।
वर्जन
जिले से स्थानांतरित सीडीपीओ व मुख्य सेविकाओं के सापेक्ष नई नियुक्तियों के लिए डीएम स्तर से शासन को पत्र लिखा गया है। जल्द ही नए स्टाफ की तैनाती होने की उम्मीद है। - बुद्धि मिश्रा, जिला कार्यक्रम अधिकारी, हरदोई
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विभाग में सृजित के सापेक्ष तमाम पद खाली पड़े हैं। जिन पदों पर अधिकारियों एवं कर्मचारियों की तैनाती है, वह भी अपनी जिम्मेदारियों से जी चुरा रहे हैं। ऐसे में यहां मासूमों की सेहत में सुधार की कल्पना भी बेमानी है।
जनपद में शून्य से छह वर्ष आयु के सैम श्रेणी के 2800, लाल श्रेणी के 7600 तथा आंशिक श्रेणी के 12 हजार कुपोषित बच्चे चिह्नित किए गए हैं। हर माह तीन हजार बच्चे जिले में पैदा हो रहे हैं।
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इनकी सेहत को लेकर अभिलेखों में तमाम कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। यह दीगर बात है कि वास्तविकता से इनका कोई सरोकार नहीं है। खाली कुर्सियां कुपोषण के खिलाफ जंग लड़ रही हैं
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जिले के 3,930 आंगनबाड़ी केंद्रों पर कार्यकर्ताओं की नियुक्ति के साथ निगरानी व सहयोग के लिए 20 बाल विकास परियोजना अधिकारी (सीडीपीओ) व 138 मुख्य सेविकाओं के पद सृजित हैं।
तबादलों व सेवानिवृत्ति की वजह से पद खाली होते गए। नई नियुक्तियां कम हुईं, सेवानिवृत्ति व तबादले ज्यादा हुए। वर्तमान में 20 सीडीपीओ के पदों के सापेक्ष केवल सात सीडीपीओ और 138 मुख्य सेविकाओं के पदों के सापेक्ष 55 मुख्य सेविकाएं बची हैं।
कुपोषण से जंग लड़ने और जीतने के लिए प्रशासन के पास पर्याप्त अधिकारी-कर्मचारी नहीं बचे। इस लड़ाई में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ही जुटी हैं।
प्रशासन का यही विभाग कुपोषण से जंग की अगुवाई करता है। ऐसे में जिले से कुपोषण मिटाने का मिशन डगमगाने लगा है। डीएम ने इस स्थिति से निपटने के लिए शासन को पत्र लिखकर स्टाफ की मांग की है।
आंगनबाड़ी केंद्र भी हो रहे खाली
जिले में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता भी कम हुई हैं। 3930 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के सापेक्ष केवल 3422 आंगनबाड़ी कार्यकर्ता विभाग में सेवाएं दे रही हैं। 508 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के पद खाली हैं। पिछले वर्ष नई नियुक्तियों की उम्मीद जगी थी, लेकिन रोक लग जाने से विभाग को मायूसी मिली।
स्टाफ की कमी से संभव अभियान पर संकट
बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की ओर से जिले में तीन माह का संभव अभियान चलाया जा रहा है। पहले माह का आखिरी सप्ताह शुरू हो चुका है। विभाग को स्टाफ की कमी की वजह से पहले माह में ही अभियान को आगे बढ़ाने में कई परेशानियों का सामना करना पड़ा। अगस्त और सितंबर माह में इस अभियान के लिए स्टाफ की कमी रुकावट बन सकती है।
वर्जन
जिले से स्थानांतरित सीडीपीओ व मुख्य सेविकाओं के सापेक्ष नई नियुक्तियों के लिए डीएम स्तर से शासन को पत्र लिखा गया है। जल्द ही नए स्टाफ की तैनाती होने की उम्मीद है। - बुद्धि मिश्रा, जिला कार्यक्रम अधिकारी, हरदोई