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रिकार्ड गन्ना उत्पादक किसान को प्रधानमंत्री ने दिलाया जैविक खेती का संकल्प
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हरदोई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर जैविक खेती में रुचि दिखाकर गन्ने की रिकॉर्ड पैदावार करने वाले हरदोई के किसान अरविंद कुमार से वीडियो कॉंफ्रेंसिंग के जरिए बातचीत की। इस दौरान प्रधानमंत्री ने अरविंद को शत-प्रतिशत जैविक खेती का संकल्प दिलाया और वैज्ञानिक विधि से गन्ने का रिकार्ड पैदावार करने के लिए बधाई देते हुए भविष्य के लिए शुभकामनाएं भी दीं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पर्यावरण दिवस पर प्रगतिशील किसानों के साथ ही जैविक खेती करने वाले किसानों से बातचीत की। हरियावां चीनी मिल में जनपद के टडियांवां विकास खंड के ग्राम पुरवा देवरिया निवासी अरविंद कुमार प्रधानमंत्री से बातचीत के लिए मौजूद रहे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अरविंद कुमार से उनके कृषि कार्यों को लेकर सवाल पूछे, इस पर अरविंद ने बेबाकी से जवाब दिए। जैविक खेती को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में अरविंद ने कहा कि शत- प्रतिशत जैवित खेती नहीं करते हैं, लेकिन अधिकांश खेती में जैविक खाद का ही इस्तेमाल करते हैं।
इस पर प्रधानमंत्री ने अरविंद को शत-प्रतिशत जैविक खेती के लिए संकल्प करने के लिए प्रेरित किया। इस पर अरविंद ने जैविक खेती करने का संकल्प ले लिया। इस दौरान प्रधानमंत्री ने यह भी पूछा कि जिस चीनी मिल में गन्ना बेचते हो वहां एथनॉल बनता है या नहीं। इस पर अरविंद ने हरियावां चीनी मिल का हवाला देते हुए कहा कि एथनॉल बनता है। इस पर प्रधानमंत्री ने कहा कि गन्ना किसानों के नियमित और समयबद्ध भुगतान के लिए यह जरूरी है कि चीनी और गुड़ के अलावा भी अन्य उत्पाद चीनी मिल तैयार करें। ऐसे में एथनॉल तैयार कर बिक्री करने की योजना बनी और अब समय से अधिकांश किसानों का भुगतान हो जाता है।
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17 मार्च को पुरस्कृत होने के बाद चर्चा में आए थे अरविंद
कृषि स्नातक अरविंद कुमार पिछले कई वर्ष से खेती कर रहे हैं, लेकिन पिछले दो-तीन वर्ष से उन्होंने खेती का तरीका बदला है। बीती 17 मार्च को शाहजहांपुर में आयोजित गन्ना मिठास मेला में अरविंद कुमार को गन्ना विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय भूसरेड्डी ने जिला गन्ना अधिकारी सना आफरीन की मौजूदगी में सम्मानित किया था।
गन्ने का किया है रिकॉर्ड उत्पादन
जिला गन्ना अधिकारी सना आफरीन बताती हैं कि जिले में गन्ने की औसत पैदावार 784 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है, लेकिन अरविंद कुमार के खेतों में गन्ने की उपज 2631 क्विंटल प्रति हेक्टेयर के हिसाब से हुई। अरविंद की मेहनत, तकनीक के इस्तेमाल और जैविक खादों के प्रयोग के बारे में विभाग के उच्चाधिकारियों को अवगत कराया था। विभिन्न किसान गोष्ठियों और कार्यशालाओं में दी जाने वाली जानकारी का उपयोग कर अरविंद कुमार ने ट्रेंच विधि से गन्ने की बुवाई की। इससे इतर उन्होंने शरदकालीन बुवाई अक्टूबर में ही कर दी और बसंत कालीन बुवाई भी नियम के मुताबिक फरवरी में कर दी।
नए प्रयोगों और तकनीक से हुई उन्नति
प्रगतिशील किसान अरविंद कुमार कहते हैं कि विभिन्न प्रशिक्षणों और कार्यशालाओं में जो कुछ सिखाया गया उसका इस्तेमाल खेती में किया। अच्छी उपज के लिए गन्ने की खेती से पहले खेत में ढैंचा बोया, गोबर की खाद से खेत में जुताई की, ट्रेंच विधि से गन्ना बोया, बीज शोधन कराया और बीज के चयन पर भी ध्यान दिया। जैविक खाद का उपयोग किया, तो कंप्यूटरीकृत लेवलर से खेत को बराबर कराने में मदद ली।
अबकी तो सरसों भी अच्छी हुई
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अरविंद से पूछा कि गन्ना के अलावा कोई फसल नहीं करते, तो अरविंद ने अन्य फसलों के साथ सरसों का नाम लिया। बताया कि इस बार सरसों 24 क्विंटल प्रति हेक्टेयर के हिसाब से हुई, तो प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि अबकी बार तो सरसों का भाव भी अच्छा रहा और फसल भी।
जिंदगी भर नहीं भूलेंगे यह गर्व के यह पल
अरविंद कुमार कहते हैं कि ताउम्र गर्व के यह पल कभी नहीं भूलेंगे। देश ही नहीं विश्व की सबसे शक्तिशाली शख्सियतों में शुमार नरेंद्र मोदी से बातचीत होने की कभी कल्पना भी नहीं की थी। जब प्रधानमंत्री से बातचीत हुई तो लगा कि न जाने कितना बड़ा गर्व का यह पल है।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पर्यावरण दिवस पर प्रगतिशील किसानों के साथ ही जैविक खेती करने वाले किसानों से बातचीत की। हरियावां चीनी मिल में जनपद के टडियांवां विकास खंड के ग्राम पुरवा देवरिया निवासी अरविंद कुमार प्रधानमंत्री से बातचीत के लिए मौजूद रहे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अरविंद कुमार से उनके कृषि कार्यों को लेकर सवाल पूछे, इस पर अरविंद ने बेबाकी से जवाब दिए। जैविक खेती को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में अरविंद ने कहा कि शत- प्रतिशत जैवित खेती नहीं करते हैं, लेकिन अधिकांश खेती में जैविक खाद का ही इस्तेमाल करते हैं।
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इस पर प्रधानमंत्री ने अरविंद को शत-प्रतिशत जैविक खेती के लिए संकल्प करने के लिए प्रेरित किया। इस पर अरविंद ने जैविक खेती करने का संकल्प ले लिया। इस दौरान प्रधानमंत्री ने यह भी पूछा कि जिस चीनी मिल में गन्ना बेचते हो वहां एथनॉल बनता है या नहीं। इस पर अरविंद ने हरियावां चीनी मिल का हवाला देते हुए कहा कि एथनॉल बनता है। इस पर प्रधानमंत्री ने कहा कि गन्ना किसानों के नियमित और समयबद्ध भुगतान के लिए यह जरूरी है कि चीनी और गुड़ के अलावा भी अन्य उत्पाद चीनी मिल तैयार करें। ऐसे में एथनॉल तैयार कर बिक्री करने की योजना बनी और अब समय से अधिकांश किसानों का भुगतान हो जाता है।
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17 मार्च को पुरस्कृत होने के बाद चर्चा में आए थे अरविंद
कृषि स्नातक अरविंद कुमार पिछले कई वर्ष से खेती कर रहे हैं, लेकिन पिछले दो-तीन वर्ष से उन्होंने खेती का तरीका बदला है। बीती 17 मार्च को शाहजहांपुर में आयोजित गन्ना मिठास मेला में अरविंद कुमार को गन्ना विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय भूसरेड्डी ने जिला गन्ना अधिकारी सना आफरीन की मौजूदगी में सम्मानित किया था।
गन्ने का किया है रिकॉर्ड उत्पादन
जिला गन्ना अधिकारी सना आफरीन बताती हैं कि जिले में गन्ने की औसत पैदावार 784 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है, लेकिन अरविंद कुमार के खेतों में गन्ने की उपज 2631 क्विंटल प्रति हेक्टेयर के हिसाब से हुई। अरविंद की मेहनत, तकनीक के इस्तेमाल और जैविक खादों के प्रयोग के बारे में विभाग के उच्चाधिकारियों को अवगत कराया था। विभिन्न किसान गोष्ठियों और कार्यशालाओं में दी जाने वाली जानकारी का उपयोग कर अरविंद कुमार ने ट्रेंच विधि से गन्ने की बुवाई की। इससे इतर उन्होंने शरदकालीन बुवाई अक्टूबर में ही कर दी और बसंत कालीन बुवाई भी नियम के मुताबिक फरवरी में कर दी।
नए प्रयोगों और तकनीक से हुई उन्नति
प्रगतिशील किसान अरविंद कुमार कहते हैं कि विभिन्न प्रशिक्षणों और कार्यशालाओं में जो कुछ सिखाया गया उसका इस्तेमाल खेती में किया। अच्छी उपज के लिए गन्ने की खेती से पहले खेत में ढैंचा बोया, गोबर की खाद से खेत में जुताई की, ट्रेंच विधि से गन्ना बोया, बीज शोधन कराया और बीज के चयन पर भी ध्यान दिया। जैविक खाद का उपयोग किया, तो कंप्यूटरीकृत लेवलर से खेत को बराबर कराने में मदद ली।
अबकी तो सरसों भी अच्छी हुई
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अरविंद से पूछा कि गन्ना के अलावा कोई फसल नहीं करते, तो अरविंद ने अन्य फसलों के साथ सरसों का नाम लिया। बताया कि इस बार सरसों 24 क्विंटल प्रति हेक्टेयर के हिसाब से हुई, तो प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि अबकी बार तो सरसों का भाव भी अच्छा रहा और फसल भी।
जिंदगी भर नहीं भूलेंगे यह गर्व के यह पल
अरविंद कुमार कहते हैं कि ताउम्र गर्व के यह पल कभी नहीं भूलेंगे। देश ही नहीं विश्व की सबसे शक्तिशाली शख्सियतों में शुमार नरेंद्र मोदी से बातचीत होने की कभी कल्पना भी नहीं की थी। जब प्रधानमंत्री से बातचीत हुई तो लगा कि न जाने कितना बड़ा गर्व का यह पल है।