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...गर्दिशे हालात कभी खत्म न होंगे
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई
Updated Tue, 02 Jun 2015 12:04 AM IST
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आयोजित मुशायरा नात ओ मनकबत में श्रोताओं की भीड़ उमड़ी। इस दौरान पूर्व
विधायक खालिद गौरी ने नातिया मुशायरों के आयोजन का महत्व बताया और मोहम्मद
साहब की तारीफ बयान की।
तिलावते कुरान से शुरू हुए कार्यक्रम में आकिल गौहर महमूदाबादी ने कहा ‘दुनिया के मुसलमान अगर एक न होंगे, तो गर्दिशे हालात कभी खत्म न होंगे’। शादाब सरल लखनऊ ने पढ़ा ‘नबी से रिश्ता जोड़ मुसलमां, नेक अमल अपना ले प्यारे, बदी से नाता तोड़’।
अली मोहम्मद सादातगंज ने इन लाइनों के जरिए खुदा की तारीफ बयां की ‘हर मर्ज तेरे इशारे पर जन्म लेता है, दर्द तेरा है दवा तेरी है मसीहा तेरा’। संचालन उमर फारूकी ने मदीने की तारीफ यूं की ‘मेरी रसाई न हो पाई शहरे तैयबा तक, मगर मदीने की खुशबू लगा के आया हूं’।
अबरार घोसवी ने कहा ‘लिखूं जो नात कलम की जबान खुशबू दे, शह उमम का मुबारक बयान खुशबू दे’। इशरत सीतापुरी ने पढ़ा ‘जमीं पर जो शहरे मदीना न होता, अंगूठी में गोया नगीना न होता’। साजिद लखीमपुरी की नात पसंद की गई ‘मिले दीदारे काबा भी मदीने की जियारत भी, सफर ऐसा हो तो किस को सफर अच्छा नहीं लगता’।
इसके अलावा फारूक दिलकश, सगीर भारती, आरजू व फहीम आदि ने भी नात पेश की। कार्यक्रम में विधायक श्यामप्रकाश व सपा जिलाध्यक्ष शराफत अली मुख्य अतिथि थे। अध्यक्षता चेयरमैन डा. सईद खां व संचालन उमर फारूकी लहरपुरी ने किया।
इस मौके पर सपा महिला सभा की अध्यक्ष गीता सिंह, अल्पसंख्यक के हफीज मंसूरी, संजय कश्यप आदि मौजूद थे। कार्यक्रम का समापन दुआ के साथ हुआ। अंत में आयोजक मुईनुद्दीन ने सभी का आभार जताया।
तिलावते कुरान से शुरू हुए कार्यक्रम में आकिल गौहर महमूदाबादी ने कहा ‘दुनिया के मुसलमान अगर एक न होंगे, तो गर्दिशे हालात कभी खत्म न होंगे’। शादाब सरल लखनऊ ने पढ़ा ‘नबी से रिश्ता जोड़ मुसलमां, नेक अमल अपना ले प्यारे, बदी से नाता तोड़’।
अली मोहम्मद सादातगंज ने इन लाइनों के जरिए खुदा की तारीफ बयां की ‘हर मर्ज तेरे इशारे पर जन्म लेता है, दर्द तेरा है दवा तेरी है मसीहा तेरा’। संचालन उमर फारूकी ने मदीने की तारीफ यूं की ‘मेरी रसाई न हो पाई शहरे तैयबा तक, मगर मदीने की खुशबू लगा के आया हूं’।
अबरार घोसवी ने कहा ‘लिखूं जो नात कलम की जबान खुशबू दे, शह उमम का मुबारक बयान खुशबू दे’। इशरत सीतापुरी ने पढ़ा ‘जमीं पर जो शहरे मदीना न होता, अंगूठी में गोया नगीना न होता’। साजिद लखीमपुरी की नात पसंद की गई ‘मिले दीदारे काबा भी मदीने की जियारत भी, सफर ऐसा हो तो किस को सफर अच्छा नहीं लगता’।
इसके अलावा फारूक दिलकश, सगीर भारती, आरजू व फहीम आदि ने भी नात पेश की। कार्यक्रम में विधायक श्यामप्रकाश व सपा जिलाध्यक्ष शराफत अली मुख्य अतिथि थे। अध्यक्षता चेयरमैन डा. सईद खां व संचालन उमर फारूकी लहरपुरी ने किया।
इस मौके पर सपा महिला सभा की अध्यक्ष गीता सिंह, अल्पसंख्यक के हफीज मंसूरी, संजय कश्यप आदि मौजूद थे। कार्यक्रम का समापन दुआ के साथ हुआ। अंत में आयोजक मुईनुद्दीन ने सभी का आभार जताया।