{"_id":"6172f746af0c5008687c8493","slug":"garra-water-level-increases-flood-in-villages-hardoi-news-knp659780559","type":"story","status":"publish","title_hn":"गर्रा उफान पर, कहारकोला का पाली से संपर्क कटा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गर्रा उफान पर, कहारकोला का पाली से संपर्क कटा
विज्ञापन
कहारकोला में पानी घुसने के बाद कुछ इस तरह हो रहा मकानों का कटान। संवाद
- फोटो : HARDOI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हरदोई। पहाड़ों पर हुई बारिश और बांधों से छोड़े गए पानी का असर दिखने लगा है। पाली क्षेत्र से गुजरी गर्रा नदी पानी बढ़ने से उफना गई है। तटवर्ती गांव इसकी चपेट में आ गए हैं। ग्राम कहारकोला में पानी भर गया है। गांव के दो कच्चे मकान नदी में समा गए हैं। जबकि पांच मकान कटान की जद में है। गांव का पाली से संपर्क कट गया है और आवागमन प्रभावित है। लोग नाव किराये पर लेकर आ-जा रहे हैं।
पहाड़ों पर बारिश के बाद बांधों पर दबाव बना तो पानी नदियों में छोड़ा जाने लगा। तीन-चार दिन में नदियों में चार लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़ा जा चुका है।
इसके कारण गंगा व रामगंगा समेत गर्रा नदी के जलस्तर में वृद्धि हुई है। पाली क्षेत्र में उफनाई गर्रा नदी अब खतरनाक हो गई है। इसके किनारे बसा गांव कहारकोला टापू बन गया है। लोगों से गांव से निकलकर मुख्य मार्ग या कस्बे तक आने के लिए कमर तक पानी में होकर गुजरना पड़ रहा है। जहां पानी और गहरा है, वहां नाव का सहारा लेना पड़ रहा है।
विज्ञापन
इन्हें सता रहा खतरा
गांव के दृगपाल, रजनीश व इतवारी के कच्चे मकान का एक-एक कमरा कट कर नदी में समा चुका है। जबकि जदुराम, सुरेंद्र, गप्पू, मोहन व महिपाल आदि के मकान कटान की जद में हैं। ग्रामीणों का कहना है कि ऐसी ही स्थिति वर्ष 2008 में बनी थीं। नदी के बढ़े जलस्तर ने काफी नुकसान किया था।
किराये पर नाव लेकर चला रहे काम
कहारकोला गांव में बने लगभग 700 कच्चे व पक्के मकानों में रहने वाले लगभग दो हजार लोगों का पाली से सीधा संपर्क कट गया है। ग्रामीणों ने मिलकर नाव किराये पर ली है। इसी का सहारा ले रहे हैं।
दर्जनों गांव चपेट में, दो हजार बीघा फसल डूबी
गर्रा नदी में उफान से कहारकोला के साथ ही पपरिया, कूड़ी, खेरिया, चंद्रमपुर, खजुआई, कपूरापुर, उमरिया, ख्वाजगीपुर, रंधीरपुर, बाबरपुर, अतरजी, लालुआपुर समेत दर्जनों गांवों के आसपास पानी पहुंच गया है। पानी भरने से कई जगह खेतों में खड़ी धान की फसल डूब गई है। वहीं गन्ना को भी नुकसान पहुंचा है। ग्रामीणों का कहना है कि पानी भरने से लगभग दो हजार बीघा से अधिक फसल जलमग्न हो गई है।
विज्ञापन
पहाड़ों पर बारिश के बाद बांधों पर दबाव बना तो पानी नदियों में छोड़ा जाने लगा। तीन-चार दिन में नदियों में चार लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़ा जा चुका है।
विज्ञापन
इसके कारण गंगा व रामगंगा समेत गर्रा नदी के जलस्तर में वृद्धि हुई है। पाली क्षेत्र में उफनाई गर्रा नदी अब खतरनाक हो गई है। इसके किनारे बसा गांव कहारकोला टापू बन गया है। लोगों से गांव से निकलकर मुख्य मार्ग या कस्बे तक आने के लिए कमर तक पानी में होकर गुजरना पड़ रहा है। जहां पानी और गहरा है, वहां नाव का सहारा लेना पड़ रहा है।
विज्ञापन
इन्हें सता रहा खतरा
गांव के दृगपाल, रजनीश व इतवारी के कच्चे मकान का एक-एक कमरा कट कर नदी में समा चुका है। जबकि जदुराम, सुरेंद्र, गप्पू, मोहन व महिपाल आदि के मकान कटान की जद में हैं। ग्रामीणों का कहना है कि ऐसी ही स्थिति वर्ष 2008 में बनी थीं। नदी के बढ़े जलस्तर ने काफी नुकसान किया था।
किराये पर नाव लेकर चला रहे काम
कहारकोला गांव में बने लगभग 700 कच्चे व पक्के मकानों में रहने वाले लगभग दो हजार लोगों का पाली से सीधा संपर्क कट गया है। ग्रामीणों ने मिलकर नाव किराये पर ली है। इसी का सहारा ले रहे हैं।
दर्जनों गांव चपेट में, दो हजार बीघा फसल डूबी
गर्रा नदी में उफान से कहारकोला के साथ ही पपरिया, कूड़ी, खेरिया, चंद्रमपुर, खजुआई, कपूरापुर, उमरिया, ख्वाजगीपुर, रंधीरपुर, बाबरपुर, अतरजी, लालुआपुर समेत दर्जनों गांवों के आसपास पानी पहुंच गया है। पानी भरने से कई जगह खेतों में खड़ी धान की फसल डूब गई है। वहीं गन्ना को भी नुकसान पहुंचा है। ग्रामीणों का कहना है कि पानी भरने से लगभग दो हजार बीघा से अधिक फसल जलमग्न हो गई है।