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Hardoi News: इंफेक्शन का डर, डेढ़ महीने से नहीं हो पा रहे आंख के ऑपरेशन
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संवाद न्यूज एजेंसी
हरदोई। नेत्र शल्य विभाग के ऑपरेशन थियेटर(ओटी) में सीलन, नमी व बरसात में टपकने वाले पानी के कारण आंख के ऑपरेशन बंद कर दिए गए हैं। मेडिकल कॉलेज के अधीन जिला अस्पताल के नेत्र शल्य विभाग में डेढ़ महीने से आंख के मरीजों का ऑपरेशन न होने क कारण मरीजों को इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। निजी संस्थानों पर जाकर महंगी दर पर ऑपरेशन कराना पड़ रहा है।
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के तहत संचालित राष्ट्रीय अंधता निवारण कार्यक्रम में मोतियाबिंद आदि के निशुल्क ऑपरेशन की व्यवस्था दी गई है। इसकी जिम्मेदारी मुख्य चिकित्साधिकारी को सौंपी गई हैं। अस्पताल में जुलाई माह में 25 से 30 मोतियाबिंद के ऑपरेशन हुए थे। वहीं एक अगस्त से पांच अगस्त तक मात्र 10 ऑपरेशन करके ओटी बंद कर दी गई। आई के दो वार्ड है, लेकिन इन दिनों एक वार्ड में आर्थो वार्ड व दूसरे में दैवीय आपदा का वार्ड बना दिया गया।
यहां पर सिर्फ ओटी में मरीज के आंखों के मोतियाबिंद की ऑपरेशन किए जाते हैं, लेकिन पिछले डेढ़ महीने से मोतियाबिंद के ऑपरेशन नहीं हो पा रहे हैं। जिसके कारण मरीज को ओपीडी में जांच करके बैरंग लौटा दिया जाता है। जिन्हें इमरजेंसी होती है वह निजी अस्पतालों में मोतियाबिंद का 50 से 60 हजार तक की कीमत चुका रहे हैं।
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इंसेट
लेंस के नाम पर होता है खेल
मरीज की माने तो ऑपरेशन तो एनजीओ के माध्यम से फ्री में किए जाते हैं, लेकिन लेंस के नाम पर महंगी फीस ली जाती है। हालांकि नेत्र विभाग में सीलन होने के कारण ऑपरेशन नहीं हो पा रहे हैं। जिम्मेदारों का मानना है कि ऐसे हालत में ऑपरेशन करने से मरीज को इंफेक्शन होने का डर रहता है।
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अक्तूबर माह में अधिक होते हैं मोतियाबिंद ऑपरेशन
नेत्र विभाग के डॉक्टरों की माने तो सर्दियों के शुरुआत में अक्तूबर से मार्च तक मोतियाबिंद के ऑपरेशन अधिक होते हैं। इन दिनों में रोजाना 10 से 15 मरीज के ऑपरेशन होते हैं। पिछले साल 1800 मरीजों के ऑपरेशन किए गए थे।
वर्जन
पिछले करीब डेढ़ महीने से ओटी में सीलन होने के कारण मोतियाबिंद के ऑपरेशन नहीं हो पा रहे हैं। फिलहाल इस समस्या को दूर करने के लिए उच्च अधिकारियों के पास सूचना भेजी गई है। जल्द ही इस सीलन की व्यवस्था को दूर करने की बात कही गई है।
आदित्य कुमार त्रिपाठी
नेत्र परीक्षण अधिकारी
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हरदोई। नेत्र शल्य विभाग के ऑपरेशन थियेटर(ओटी) में सीलन, नमी व बरसात में टपकने वाले पानी के कारण आंख के ऑपरेशन बंद कर दिए गए हैं। मेडिकल कॉलेज के अधीन जिला अस्पताल के नेत्र शल्य विभाग में डेढ़ महीने से आंख के मरीजों का ऑपरेशन न होने क कारण मरीजों को इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। निजी संस्थानों पर जाकर महंगी दर पर ऑपरेशन कराना पड़ रहा है।
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के तहत संचालित राष्ट्रीय अंधता निवारण कार्यक्रम में मोतियाबिंद आदि के निशुल्क ऑपरेशन की व्यवस्था दी गई है। इसकी जिम्मेदारी मुख्य चिकित्साधिकारी को सौंपी गई हैं। अस्पताल में जुलाई माह में 25 से 30 मोतियाबिंद के ऑपरेशन हुए थे। वहीं एक अगस्त से पांच अगस्त तक मात्र 10 ऑपरेशन करके ओटी बंद कर दी गई। आई के दो वार्ड है, लेकिन इन दिनों एक वार्ड में आर्थो वार्ड व दूसरे में दैवीय आपदा का वार्ड बना दिया गया।
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यहां पर सिर्फ ओटी में मरीज के आंखों के मोतियाबिंद की ऑपरेशन किए जाते हैं, लेकिन पिछले डेढ़ महीने से मोतियाबिंद के ऑपरेशन नहीं हो पा रहे हैं। जिसके कारण मरीज को ओपीडी में जांच करके बैरंग लौटा दिया जाता है। जिन्हें इमरजेंसी होती है वह निजी अस्पतालों में मोतियाबिंद का 50 से 60 हजार तक की कीमत चुका रहे हैं।
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लेंस के नाम पर होता है खेल
मरीज की माने तो ऑपरेशन तो एनजीओ के माध्यम से फ्री में किए जाते हैं, लेकिन लेंस के नाम पर महंगी फीस ली जाती है। हालांकि नेत्र विभाग में सीलन होने के कारण ऑपरेशन नहीं हो पा रहे हैं। जिम्मेदारों का मानना है कि ऐसे हालत में ऑपरेशन करने से मरीज को इंफेक्शन होने का डर रहता है।
अक्तूबर माह में अधिक होते हैं मोतियाबिंद ऑपरेशन
नेत्र विभाग के डॉक्टरों की माने तो सर्दियों के शुरुआत में अक्तूबर से मार्च तक मोतियाबिंद के ऑपरेशन अधिक होते हैं। इन दिनों में रोजाना 10 से 15 मरीज के ऑपरेशन होते हैं। पिछले साल 1800 मरीजों के ऑपरेशन किए गए थे।
वर्जन
पिछले करीब डेढ़ महीने से ओटी में सीलन होने के कारण मोतियाबिंद के ऑपरेशन नहीं हो पा रहे हैं। फिलहाल इस समस्या को दूर करने के लिए उच्च अधिकारियों के पास सूचना भेजी गई है। जल्द ही इस सीलन की व्यवस्था को दूर करने की बात कही गई है।
आदित्य कुमार त्रिपाठी
नेत्र परीक्षण अधिकारी