फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Hardoi News ›   Emphasis on helmet, but regardless of life

हेलमेट पर जोर, पर जान से बेपरवाह

Tue, 22 Feb 2022 10:50 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 22 Feb 2022 10:50 PM IST
विज्ञापन
Emphasis on helmet, but regardless of life
हरदोई। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने बच्चों के लिए रोड सेफ्टी की नई गाइडलाइंस जारी की हैं। इसके तहत चार साल के बच्चों के दोपहिया पर सवार होने के दौरान चालक के साथ क्रैश हेलमेट एवं सेफ्टी हार्नेस पहनना अनिवार्य कर दिया है।
विज्ञापन

अब यहां इस गाइडलाइन का पालन कैसे होगा, इसको लेकर सवाल है। यहां तो बड़े और उम्रदराज दोपहिया सवार ही हेलमेट नहीं लगाते हैं। दोपहिया चलाने वाले हों या फिर पीछे बैठने वाले, ज्यादातर लोगों को खुद की सुरक्षा की फ्रिक नहीं है।
विज्ञापन

रोड सेफ्टी को लेकर नियमों को दरकिनार कर चलने वाले ये लोग शहर हो या गांव हर जगह मिल जाते हैं। तस्वीरों में देख सकते हैं कि नियमों को लेकर कितनी बेपरवाही कर रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

जिले भर में हर रोड पर गांव से लेकर शहर तक आपको बिना हेलमेट के दोपहिया वाहन पर बैठने वाले एवं चलाने वालों के दृश्य दिख जाते हैैं। आए दिन होने वाले सड़क हादसों में तमाम दोपहिया वाहन सवार जान गंवा देते हैं।
ज्यादातर मामलों में हेड इंजरी लोगों की जान निगल जाती है। इससे बेफ्रिक होकर नियमों को दर किनार कर सवारों की रफ्तार जारी है। चार साल से छोटे बच्चों को दोपहिया वाहनों पर चालक के सवार रहने के दौरान क्रैश हेलमेट पहनना अनिवार्य कर दिया गया है।
बच्चा दोपहिया वाहन चलाने वाले चालक के पीछे सीट पर बैठता तो फिर उसके लिए सेफ्टी हार्नेस पहनना भी जरूरी किया जा चुका है। पिछले सप्ताह सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय रोड सेफ्टी की नई गाइडलाइंस जारी करते हुए इसे बच्चों की सुरक्षा के लिए अनिवार्य कर दिया है।
अक्सर देखा जाता है कि बड़े अपने बच्चों को बिना किसी सुरक्षा घेरे के साथ दोपहिया वाहनों पर अपने बच्चों को बैठाकर सड़कों पर निकल लेते हैं। ऐसे में हादसों के दौरान बच्चों को लेकर सबसे ज्यादा जोखिम रहता है, क्योंकि जागरूक लोग खुद तो हेलमेट पहनते है
मगर बच्चों को लेकर सुरक्षा प्रबंधन पर ध्यान नहीं रखते हैं। ऐसे में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने गाइडलाइन जारी कर बच्चों की सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित किया है।
गाइडलाइंस के मुताबिक, दोपहियां वाहनों पर चार साल से छोटे बच्चों को बैठाने पर नए नियमों का पालन करना होगा। बच्चों के लिए हेलमेट और हार्नेस बेल्ट का का उपयोग अनिवार्य हो गया है।
बच्चों के साथ दोपहिया वाहन की गति 40 किमी प्रति घंटा से कम रखनी होगी। नियमों का पालन न करने पर कार्यवाही का प्रावधान किया गया है ।
पांच लाख से अधिक हैं दोपहिया वाहन
जिले में करीब पांच लाख दोपहिया वाहन पंजीकृत एवं अपंजीकृत होने का अनुमान है। इनमें से हजारों वाहन ऐसे भी हैं जिनके पंजीकरण की अवधि समाप्त हो चुकी है।
एआरटीओ संजीव कुमार कहते हैं कि ई-स्कूटर एवं ई-बाइक के रजिस्ट्रेशन अनिवार्य न होने से अभी भी ज्यादातर लोग पंजीकरण नहीं कराते, जबकि सुरक्षा की दृष्टि से सभी को पंजीकरण कराना चाहिए।
तमाम लोग गैर जिलों के भी दोपहिया वाहन जिले में चला रहे हैं। ऐसे में इनकी अनुमानित संख्या पांच लाख के करीब हो सकती है। किसी के यहां एक दोपहिया है तो किसी के यहां दो और इससे अधिक भी हैं। हर वर्ष कमोवेश 10,000 नए दोपहिया वाहन पंजीकृत होने का औसत है।
50 फीसदी चालक नहीं लगाते हेलमेट
जिले में दोपहिया वाहन व्यवसाय से जुड़े पुराने व्यवसायी राजेश अग्रवाल के मुताबिक, पिछले एक दशक का औसत निकाले तो हर वर्ष जिले में करीब 20,000 दोपहिया वाहनों की बिक्री होती है।
नए नियमों के अनुसार वाहन विक्रेता अब वाहन बिक्री के समय अनिवार्य रूप से हेलमेट देते हैं। उधर, सामाजिक सरोकारों से जुड़े मुरलीधर कहते हैं कि अभी भी 50 फीसदी से ज्यादा लोग हेलमेट नहीं लगाते हैं।
पुलिस विभाग के सूत्रों के मुताबिक औसतन हर वर्ष 25,000 से अधिक चालान काटे जाते हैं।
मानकयुक्त हेलमेट ही मान्य
चालान से बचने के लिए लोग अक्सर काम चलाऊ की तर्ज पर लोकल हेलमेट खरीद कर यूज करते थे। इस संबंध में भी पूर्व में गाइडलाइन जारी की जा चुकी है। जिसके तहत दो पहिया सवारों के लिए आईएसआई मानक वाले हेलमेट का ही प्रयोग करना है।
मानक विहीन हेलमेट उपयोग करने पर भी जुर्माना लगाने एवं कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय इस ओर पूर्व में ही गाइडलाइन जारी कर चुका है।
जिसके चलते जागरूक लोग आईएसआई मानक वाले हेलमेट लेते, मगर अधिकांश लोग इस ओर अभी जागरूक नहीं हो सके हैं।
हेलमेट के साथ सेफ्टी हार्नेस भी
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा जारी बच्चों की सुरक्षा को लेकर नई गाइडलाइन में हेलमेट के साथ सेफ्टी हार्नेस पर भी जोर दिया गया है। सेफ्टी हार्नेस का मतलब बच्चों के उस सुरक्षा कवच से है, जिससे वह चालक के साथ जुड़े रहे और दोपहिया वाहन से गिरने का खतरा न रहे।
सेफ्टी हार्नेस एक बनियान की तरह या कवर बेल्ट जैकेट की तरह होता है। जिसकी पट्टियों की एक जोड़ी दोपहिया चालक द्वारा पहनी जाती है, जिससे बच्चे द्वारा पहनी जाने वाली इस सेफ्टी हार्नेस दोपहिया चालक से जुड़ी रहती है।
इससे बच्चे के पीछे बैठे होने पर सुरक्षित घेरा का रहता है। सेफ्टी हार्नेस बच्चे को पीछे बैठाने पर पहनाना अनिवार्य किया गया है।
सुरक्षा से समझौता, दुर्घटनाओं को न्योता
रोड सेफ्टी को लेकर शासन-प्रशासन द्वारा समय-समय पर जागरुकता अभियान चलाया जाता है। इसके बाद भी लोग जागरूक नहीं हो रहे हैं। सुरक्षा से समझौता करने वाले खुलेआम खुद के लिए हादसों को न्योता देते हैं।
नतीजन इसका खामियाजा दुर्घटनाओं में हताहत होने वाले पूरे परिवार को उठाना पड़ता है। कई ग्रामीण क्षेत्रों से मिलने वाली सूचनाओं के आधार पर औसतन चार से पांच सड़क हादसे रोजाना होते रहते हैं।
इनमें 50 फीसदी से अधिक मामलों में लोगों की जान चली जाती है। जान गंवाने वालों में ज्यादातर दोपहिया वाहन सवार होते हैं। उनमें भी अधिकतर मामले सिर पर चोट और हेलमेट न पहने होने के होते हैं।
डॉ. अजय सिंह कहते हैं कि ट्रैफिक नियमों का पालन सभी को करना चाहिए। हेलमेट पहनना खुद की सुरक्षा का कवच है, इसलिए हर दोपहिया वाहन सवार को हेलमेट अवश्य लगाना चाहिए।

बोले एसपी, नियमानुसार होगी कार्रवाई
ट्रैफिक नियमों का पालन सभी को करना चाहिए। शासन की ओर से आने वाली गाइडलाइन के अनुसार सभी को रोड सेफ्टी को लेकर जागरूक रहना चाहिए और दूसरों को भी जागरूक करना चाहिए।
जिले में इस ओर ट्रैफिक पुलिस कार्य कर रही है। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित कराई जाती है।
- राजेश द्विवेदी, पुलिस अधीक्षक
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed