{"_id":"5fd4ff718ebc3e3d92219bd0","slug":"efforts-to-make-vocational-education-employable-are-praiseworthy-hardoi-news-knp5995404159","type":"story","status":"publish","title_hn":"व्यवसायिक शिक्षा को रोजगारपरक बनाने का प्रयास सराहनीय","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
व्यवसायिक शिक्षा को रोजगारपरक बनाने का प्रयास सराहनीय
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अखिल भारतीय साहित्य परिषद की जनपदीय इकाई की विचार गोष्ठी शनिवार को हुई। इसमें राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 पर चर्चा की गई। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि व्यवसायिक शिक्षा को उच्चतर शिक्षा तक समाहित कर रोजगारपरक बनाने का प्रयास सराहनीय है।
अखिल भारतीय साहित्य परिषद के वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ. ईश्वरचंद्र वर्मा के धर्मशाला रोड स्थित आवास पर हुई विचार गोष्ठी में परिषद के अध्यक्ष डॉ. बीएस पांडेय ने कहा कि नई शिक्षा नीति में मातृ भाषा और क्षेत्रीय भाषा पर विशेष बल दिया गया है।
स्कूल शिक्षा में प्राथमिक तौर पर ही तीन से छह वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से शिक्षित करने की व्यवस्था नई शिक्षा नीति में की गई है। इससे निजी स्कूूलों की तरह बच्चों को बुनियादी मजबूती मिलेगी।
विज्ञापन
डॉ. ईश्वरचंद्र वर्मा ने कहा कि नई शिक्षा नीति में संस्कृत भाषा के उन्नयन का कोई विशेष प्रावधान न होना आश्चर्यचकित करता है। डॉ. शीर्षेंदु शील त्रिवेदी, सुशील कुमार वर्मा, राज कुमार सिंह, डॉ. शीला पांडेय और रणविजय सिंह सोमवंशी ने भी शिक्षा नीति पर अपने विचार व्यक्त किए।
यहां शिक्षा नीति 2020 पर एक सूचना पत्र भी वितरित किया गया। गोष्ठी का संचालन डॉ. शीला पांडेय नेे किया। इस दौरान गिरीश चंद्र श्रीवास्तव, वेद प्रकाश अवस्थी, अशोक कुमार, डॉ. देश दीपक शुक्ला आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
अखिल भारतीय साहित्य परिषद के वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ. ईश्वरचंद्र वर्मा के धर्मशाला रोड स्थित आवास पर हुई विचार गोष्ठी में परिषद के अध्यक्ष डॉ. बीएस पांडेय ने कहा कि नई शिक्षा नीति में मातृ भाषा और क्षेत्रीय भाषा पर विशेष बल दिया गया है।
विज्ञापन
स्कूल शिक्षा में प्राथमिक तौर पर ही तीन से छह वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से शिक्षित करने की व्यवस्था नई शिक्षा नीति में की गई है। इससे निजी स्कूूलों की तरह बच्चों को बुनियादी मजबूती मिलेगी।
विज्ञापन
डॉ. ईश्वरचंद्र वर्मा ने कहा कि नई शिक्षा नीति में संस्कृत भाषा के उन्नयन का कोई विशेष प्रावधान न होना आश्चर्यचकित करता है। डॉ. शीर्षेंदु शील त्रिवेदी, सुशील कुमार वर्मा, राज कुमार सिंह, डॉ. शीला पांडेय और रणविजय सिंह सोमवंशी ने भी शिक्षा नीति पर अपने विचार व्यक्त किए।
यहां शिक्षा नीति 2020 पर एक सूचना पत्र भी वितरित किया गया। गोष्ठी का संचालन डॉ. शीला पांडेय नेे किया। इस दौरान गिरीश चंद्र श्रीवास्तव, वेद प्रकाश अवस्थी, अशोक कुमार, डॉ. देश दीपक शुक्ला आदि मौजूद रहे।