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प्रभु दरबार में शिकायत नहीं, सेवा करें
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बावन। ब्लॉक के ग्राम लोनार में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में कथा व्यास अनूप ठाकुर महाराज ने शुक्रवार को कहा कि आज कल लोग मंदिरों में जाकर कमी निकालते हैं, बल्कि ऐसा नहीं होना चाहिए।
कहा कि परमात्मा के दरबार में जाकर शिकायत नहीं सेवा करें। इसी से मानव जीवन का कल्याण संभव है। कहा कि इस संसार में कर्म बंधनों में बंधकर जीव का जन्म होता है और भगवान का अवतार अपनी इच्छा से होता है।
भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव बड़े धूमधाम से कई महीनों तक बृज में मनाया गया। भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी दिव्य बाल लीलाओं से बृज के गोपी, ग्वालों को आनंद प्रदान किया। महाराज ने कहा कि ग्वाल बालों के साथ यमुना किनारे खेलते समय गेंद कालियादह में चली गई।
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यहां कालिया नाग के विष से घाट का पानी तक जहरीला हो गया था। भगवान श्रीकृष्ण गेंद लेने यमुना में कूद गए और कालिया नाग के फन पर खड़े होकर नृत्य करने लगे।
भगवान को पहचान कर नाग कन्याओं ने उनकी स्तुति की और कालिया नाग क्षमा मांगते हुए वहां से चला गया। आयोजक मोनू सिंह राठौड़, श्रीकृष्ण सिंह राठौड़, बलराम सिंह राठौड़, श्याम सिंह, पुलंदर सिंह, रामदत्त मिश्रा, सूरज त्रिवेदी समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु रहे।
बुद्ध का पंचशील अपनाने पर जोर
पिहानी। छुट्टूपुरवा में जारी बुद्ध कथा के दौरान कथा वाचक मुरैना मध्य प्रदेश के देशराज बौद्ध ने कहा कि संगठित और शिक्षित समाज ही अपने अंदर बदलाव ला सकता है।
उन्होंने भगवान बुद्ध के त्याग पर प्रकाश डालते हुए नेक बनने की नसीहत दी। कथा व्यास ने भगवान बुद्ध के जीवन से जुड़े प्रेरक प्रसंग सुनाकर कहा कि उनके बताए मार्ग पर चलें। आज विश्व में फैली हुई अशांति का इलाज केवल बुद्ध का पंचशील सिद्धांत है, इसे अपनाएं।
बौद्ध गायक राजेश बौद्ध, बबलू, बंटी व बब्ली व अनुष्का बौद्ध ने समाज सुधार के गीत सुनाए। कार्यक्रम में दिनेश कुमार भारती, संजय भारती, जमुना प्रसाद, नीरज व धर्मेंद्र आदि ने व्यवस्थाएं देखीं।
धर्म के बिना मनुष्य अधूरा : राजीव लोचन
मल्लावां। शांति सत्संग मंच श्यामपुर के तत्वावधान में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में संत राजीव लोचन दास महाराज ने शुक्रवार को सत्संग में भागवत कथा में धर्म की महत्ता का वर्णन किया।
बताया कि धर्म के वास्तविक स्वरूप को पहचान कर उस पर चलने वाला मनुष्य ही समाज व देश एवं राष्ट्र का कल्याण कर सकता है। धर्म को धारण करने के लिए समर्पण के साथ साथ चरित्रवान होना परम जरूरी है।
भारतीय संस्कृति के स्थान पर धर्म के प्रति मनुष्य अनाशक्त होता जा रहा, जो उसके पतन का प्रतीक है। कहा कि हर व्यक्ति को राष्ट्र के संरक्षण के बारे में सोचना चाहिए, जो धर्म के बिना असंभव है।
समाज व राष्ट्र के उत्थान और सही मार्ग पर ले जाने के लिए धर्म की बड़ी आवश्यकता है। धर्म के बिना मनुष्य अधूरा है।
महाराज ने बताया कि विशिष्ट क्षमताओं से परिपूर्ण मानव शरीर का जीव को सदुपयोग कर इसे भगवान के प्रति अर्पित कर देना चाहिए, क्योंकि मानव जीवन में ईश्वर की कथा सुनने के बाद उसका चिंतन करना जरूरी है।
महायज्ञ और प्रज्ञा पुराण का समापन
संडीला। घुमना खेड़ा गांव में शांतिकुंज हरिद्वार के तत्वावधान में चल रहे नौ कुंडीय गायत्री महायज्ञ व प्रज्ञा पुराण का शुक्रवार को पूर्णाहुति एवं कन्या भोज के साथ समापन हो गया।
सुबह हवन पूजन किया गया। बृहस्पतिवार को शाम कथा वाचक आर्यन पाल ने प्रज्ञा पुराण की कथा सुनाई। दीप यज्ञ में 1100 दीपक जलाकर गायत्री मंत्रों के साथ आहुतियां दी गईं।
शांतिकुंज हरिद्वार से आई टोली पर फूलों की वर्षा कर विदाई दी। इस मौके पर श्रीराम यादव, रवि शर्मा, शिवदत्त यादव, उमेश यादव, हरनाम यादव, अनिल गुप्ता, ऋषि कुमार गुप्ता, रामानुज यादव आदि रहे।
कलश यात्रा के साथ कथा का शुभारंभ
सवायजपुर। भरखनी ब्लाक के ग्राम बिरुआपुर में श्रीमद्भागवत कथा का शुक्रवार को कलश यात्रा के साथ शुभारंभ हुआ। कलश यात्रा पांचाल घाट से अमिरता स्थित बाबा लक्ष्मण दास आश्रम होकर कथा स्थल पर समाप्त हुई।
कथा व्यास सत्यदेव ने श्रीमद्भागवत पुराण की महत्ता का वर्णन किया। कहा कि कलियुग में भागवत कथा श्रवण से ही मोक्ष की प्राप्ति होती है। कलियुग के प्रवेश करते ही राजा परीक्षित की बुद्धि का हरण हुआ और अज्ञानता वश तपस्या में लीन ऋषि के गले में सर्प डाल दिया।
इस पाप से मुक्ति पाने को राजा परीक्षित ने सात दिनों तक कथा का श्रवण किया। कथा श्रवण से ही उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई। बताया कि सनातन धर्म में मनुष्य को पाप कर्म और असामाजिक कृत्यों को करने से रोकने के लिए पुराणों और धार्मिक ग्रंथों में अनेक प्रसंग दिए गए हैं।
इन प्रसंगों के श्रवण से जीवन में सात्विकता आती है। सात्विक जीवन ही व्यक्ति को पुण्य की ओर ले जाता है और जो व्यक्ति पुण्य कर्म करता है, वह मोक्ष की प्राप्ति करता है। परीक्षित बुध पाल सिंह, सर्वेश अमित, आशीष, रिंकी, अनुष्का आदि मौजूद रहे।
मां मंगला का महिलाओं ने लिया आशीर्वाद
सांडी। होली अष्टमी पर मां मंगला देवी मंदिर में मेला लगा है। इस दौरान भक्तों ने मां के दर्शन कर पूजा अर्चना कर आशीर्वाद लिया। ऐसी मान्यता है कि यहां नई मिट्टी की गगरी खरीद कर ले जाया जाता है।
वहीं पुरानी गगरी को घरों के बाहर फोड़ने की प्रथा है। इसे महिलाओं ने मनाया। मान्यता है कि ऐसा करने से लक्ष्मी जी प्रसन्न होती हैं, जिससे घर धन धान्य से परिपूर्ण रहता है।
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कहा कि परमात्मा के दरबार में जाकर शिकायत नहीं सेवा करें। इसी से मानव जीवन का कल्याण संभव है। कहा कि इस संसार में कर्म बंधनों में बंधकर जीव का जन्म होता है और भगवान का अवतार अपनी इच्छा से होता है।
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भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव बड़े धूमधाम से कई महीनों तक बृज में मनाया गया। भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी दिव्य बाल लीलाओं से बृज के गोपी, ग्वालों को आनंद प्रदान किया। महाराज ने कहा कि ग्वाल बालों के साथ यमुना किनारे खेलते समय गेंद कालियादह में चली गई।
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यहां कालिया नाग के विष से घाट का पानी तक जहरीला हो गया था। भगवान श्रीकृष्ण गेंद लेने यमुना में कूद गए और कालिया नाग के फन पर खड़े होकर नृत्य करने लगे।
भगवान को पहचान कर नाग कन्याओं ने उनकी स्तुति की और कालिया नाग क्षमा मांगते हुए वहां से चला गया। आयोजक मोनू सिंह राठौड़, श्रीकृष्ण सिंह राठौड़, बलराम सिंह राठौड़, श्याम सिंह, पुलंदर सिंह, रामदत्त मिश्रा, सूरज त्रिवेदी समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु रहे।
बुद्ध का पंचशील अपनाने पर जोर
पिहानी। छुट्टूपुरवा में जारी बुद्ध कथा के दौरान कथा वाचक मुरैना मध्य प्रदेश के देशराज बौद्ध ने कहा कि संगठित और शिक्षित समाज ही अपने अंदर बदलाव ला सकता है।
उन्होंने भगवान बुद्ध के त्याग पर प्रकाश डालते हुए नेक बनने की नसीहत दी। कथा व्यास ने भगवान बुद्ध के जीवन से जुड़े प्रेरक प्रसंग सुनाकर कहा कि उनके बताए मार्ग पर चलें। आज विश्व में फैली हुई अशांति का इलाज केवल बुद्ध का पंचशील सिद्धांत है, इसे अपनाएं।
बौद्ध गायक राजेश बौद्ध, बबलू, बंटी व बब्ली व अनुष्का बौद्ध ने समाज सुधार के गीत सुनाए। कार्यक्रम में दिनेश कुमार भारती, संजय भारती, जमुना प्रसाद, नीरज व धर्मेंद्र आदि ने व्यवस्थाएं देखीं।
धर्म के बिना मनुष्य अधूरा : राजीव लोचन
मल्लावां। शांति सत्संग मंच श्यामपुर के तत्वावधान में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में संत राजीव लोचन दास महाराज ने शुक्रवार को सत्संग में भागवत कथा में धर्म की महत्ता का वर्णन किया।
बताया कि धर्म के वास्तविक स्वरूप को पहचान कर उस पर चलने वाला मनुष्य ही समाज व देश एवं राष्ट्र का कल्याण कर सकता है। धर्म को धारण करने के लिए समर्पण के साथ साथ चरित्रवान होना परम जरूरी है।
भारतीय संस्कृति के स्थान पर धर्म के प्रति मनुष्य अनाशक्त होता जा रहा, जो उसके पतन का प्रतीक है। कहा कि हर व्यक्ति को राष्ट्र के संरक्षण के बारे में सोचना चाहिए, जो धर्म के बिना असंभव है।
समाज व राष्ट्र के उत्थान और सही मार्ग पर ले जाने के लिए धर्म की बड़ी आवश्यकता है। धर्म के बिना मनुष्य अधूरा है।
महाराज ने बताया कि विशिष्ट क्षमताओं से परिपूर्ण मानव शरीर का जीव को सदुपयोग कर इसे भगवान के प्रति अर्पित कर देना चाहिए, क्योंकि मानव जीवन में ईश्वर की कथा सुनने के बाद उसका चिंतन करना जरूरी है।
महायज्ञ और प्रज्ञा पुराण का समापन
संडीला। घुमना खेड़ा गांव में शांतिकुंज हरिद्वार के तत्वावधान में चल रहे नौ कुंडीय गायत्री महायज्ञ व प्रज्ञा पुराण का शुक्रवार को पूर्णाहुति एवं कन्या भोज के साथ समापन हो गया।
सुबह हवन पूजन किया गया। बृहस्पतिवार को शाम कथा वाचक आर्यन पाल ने प्रज्ञा पुराण की कथा सुनाई। दीप यज्ञ में 1100 दीपक जलाकर गायत्री मंत्रों के साथ आहुतियां दी गईं।
शांतिकुंज हरिद्वार से आई टोली पर फूलों की वर्षा कर विदाई दी। इस मौके पर श्रीराम यादव, रवि शर्मा, शिवदत्त यादव, उमेश यादव, हरनाम यादव, अनिल गुप्ता, ऋषि कुमार गुप्ता, रामानुज यादव आदि रहे।
कलश यात्रा के साथ कथा का शुभारंभ
सवायजपुर। भरखनी ब्लाक के ग्राम बिरुआपुर में श्रीमद्भागवत कथा का शुक्रवार को कलश यात्रा के साथ शुभारंभ हुआ। कलश यात्रा पांचाल घाट से अमिरता स्थित बाबा लक्ष्मण दास आश्रम होकर कथा स्थल पर समाप्त हुई।
कथा व्यास सत्यदेव ने श्रीमद्भागवत पुराण की महत्ता का वर्णन किया। कहा कि कलियुग में भागवत कथा श्रवण से ही मोक्ष की प्राप्ति होती है। कलियुग के प्रवेश करते ही राजा परीक्षित की बुद्धि का हरण हुआ और अज्ञानता वश तपस्या में लीन ऋषि के गले में सर्प डाल दिया।
इस पाप से मुक्ति पाने को राजा परीक्षित ने सात दिनों तक कथा का श्रवण किया। कथा श्रवण से ही उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई। बताया कि सनातन धर्म में मनुष्य को पाप कर्म और असामाजिक कृत्यों को करने से रोकने के लिए पुराणों और धार्मिक ग्रंथों में अनेक प्रसंग दिए गए हैं।
इन प्रसंगों के श्रवण से जीवन में सात्विकता आती है। सात्विक जीवन ही व्यक्ति को पुण्य की ओर ले जाता है और जो व्यक्ति पुण्य कर्म करता है, वह मोक्ष की प्राप्ति करता है। परीक्षित बुध पाल सिंह, सर्वेश अमित, आशीष, रिंकी, अनुष्का आदि मौजूद रहे।
मां मंगला का महिलाओं ने लिया आशीर्वाद
सांडी। होली अष्टमी पर मां मंगला देवी मंदिर में मेला लगा है। इस दौरान भक्तों ने मां के दर्शन कर पूजा अर्चना कर आशीर्वाद लिया। ऐसी मान्यता है कि यहां नई मिट्टी की गगरी खरीद कर ले जाया जाता है।
वहीं पुरानी गगरी को घरों के बाहर फोड़ने की प्रथा है। इसे महिलाओं ने मनाया। मान्यता है कि ऐसा करने से लक्ष्मी जी प्रसन्न होती हैं, जिससे घर धन धान्य से परिपूर्ण रहता है।