{"_id":"4e243e1fcd58a7e961f83780286d7186","slug":"difficulties-do-away-with-the-blessings-of-parents-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"माता-पिता के आशीर्वाद से दूर होतीं मुश्किलें ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
माता-पिता के आशीर्वाद से दूर होतीं मुश्किलें
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई
Updated Fri, 22 May 2015 11:47 PM IST
विज्ञापन
बालाजी हनुमान मंदिर संत सेवाश्रम के तत्वावधान में
विज्ञापन
खेतुई बालाजी मंदिर पर चल रही श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन
शुक्रवार को अयोध्या से आए अयोध्या धाम के राजेंद्र दास महाराज ने भक्त और
भगवान के बीच के रिश्ते को समझाते हुए कहा कि भगवान की भक्ति नि:स्वार्थ
भाव से करनी चाहिए और मन और श्रद्धा से भक्ति करने पर उसकी शक्ति इतनी
प्रबल हो जाती है कि भगवान भक्त के वश में हो जाते हैं।
श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि आनंदमय जीवन के लिए तीन सिद्धांतों पर चलना जरूरी है। पुराणों में तीन सिद्धांतों में शामिल नीति यानी हम सभी कार्य नीति पूर्वक करें और अनीति से कोई कार्य न करें। दूसरा है प्रीति यानी भगवान के प्रति सच्ची प्रीति लगाए न केवल दिखावे के लिए आडंबर करें, क्योंकि दिखावे के लिए की जाने वाली आराधना नहीं महज प्रचार और अहम का परिचायक होती है, इसलिए प्रभु से सच्ची प्रीति करें।
तीसरा है रीति यानी हमारा व्यवहार रीति परक सद्भाव पूर्ण होना चाहिए। ऐसा होने पर हम जीवन मेें कठिनाइयां आने पर भी उनसे पार पा जाते हैं। स्वामी नागेंद्र दास महाराज ने कहा कि जिनके पास धर्म, संतोष, धैैर्य के साथ माता-पिता का आशीर्वाद और भगवान की भक्ति होती है दुनिया की कोई भी ताकत उसका अहित नहीं कर सकती।
इस बारे में उन्होंने नासाग्र महाराज के प्रसंग का वर्णन कर सभी को भाव विह्वल कर दिया। उन्होंने भगवान के मत्स्य और वामन अवतार का प्रसंग सुनाकर दान के महत्व को बताया। इस मौके पर अयोध्या के रामशंकर, राजेश मिश्र, राकेश मोहन शुक्ला, शशिकांत शुक्ला आदि मौजूद थे।
श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि आनंदमय जीवन के लिए तीन सिद्धांतों पर चलना जरूरी है। पुराणों में तीन सिद्धांतों में शामिल नीति यानी हम सभी कार्य नीति पूर्वक करें और अनीति से कोई कार्य न करें। दूसरा है प्रीति यानी भगवान के प्रति सच्ची प्रीति लगाए न केवल दिखावे के लिए आडंबर करें, क्योंकि दिखावे के लिए की जाने वाली आराधना नहीं महज प्रचार और अहम का परिचायक होती है, इसलिए प्रभु से सच्ची प्रीति करें।
तीसरा है रीति यानी हमारा व्यवहार रीति परक सद्भाव पूर्ण होना चाहिए। ऐसा होने पर हम जीवन मेें कठिनाइयां आने पर भी उनसे पार पा जाते हैं। स्वामी नागेंद्र दास महाराज ने कहा कि जिनके पास धर्म, संतोष, धैैर्य के साथ माता-पिता का आशीर्वाद और भगवान की भक्ति होती है दुनिया की कोई भी ताकत उसका अहित नहीं कर सकती।
इस बारे में उन्होंने नासाग्र महाराज के प्रसंग का वर्णन कर सभी को भाव विह्वल कर दिया। उन्होंने भगवान के मत्स्य और वामन अवतार का प्रसंग सुनाकर दान के महत्व को बताया। इस मौके पर अयोध्या के रामशंकर, राजेश मिश्र, राकेश मोहन शुक्ला, शशिकांत शुक्ला आदि मौजूद थे।