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‘जिसने समय नष्ट किया, समय ने उसे नष्ट किया’
ब्यूूराे/अमर उजाला, हरदाेई
Updated Fri, 18 Sep 2015 11:55 PM IST
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श्रीमद्भागवत कथा का शुक्रवार को समापन हो गया। अंतिम दिन की कथा में कथा
व्यास पंडित सुशील दीक्षित ने कहा कि समय बहुमूल्य है। जो उसे नष्ट करता
है, समय उसे नष्ट कर देता है।
उन्होंने कहा कि हमें चाहिए कि समय का मूल्य समझें और इसे श्रेष्ठ कार्यों में लगाएं। डर्रा में सियाराम के आवास पर जारी कथा के अंतिम दिन कथा व्यास सुशील दीक्षित ने उमड़ी नर नारियों की भीड़ को समझाया कि समय मूल्यवान है। जिसने समय का मूल्य समझा वह सफल हो गया और जिसने समय को नष्ट किया, बाद में समय ने उसे नष्ट कर दिया।
उन्होंने कहा कि समय का सदुपयोग करना सीखना होगा। कहा कि परोपकार से ही हमारा जीवन सफल होता है। कर्मों का फल अवश्य ही भोगना पड़ता है। उन्होंने कहा कि अपना आत्मनिर्माण हम स्वयं करें।
इससे पृथ्वी स्वर्ग में परिवर्तित हो जाएगी। अपनी शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्थिति को ऊंचा उठाना अपने को एक आदर्श नागरिक बनाना बड़ा धर्म-कार्य है। कथा के बाद विशाल भंडारा और कन्या भोज के साथ ही कार्यक्रम का समापन हो गया। आयोजन में कमलेश कुमार समेत ग्रामीणों का खासा सहयोग शामिल रहा।
उन्होंने कहा कि हमें चाहिए कि समय का मूल्य समझें और इसे श्रेष्ठ कार्यों में लगाएं। डर्रा में सियाराम के आवास पर जारी कथा के अंतिम दिन कथा व्यास सुशील दीक्षित ने उमड़ी नर नारियों की भीड़ को समझाया कि समय मूल्यवान है। जिसने समय का मूल्य समझा वह सफल हो गया और जिसने समय को नष्ट किया, बाद में समय ने उसे नष्ट कर दिया।
उन्होंने कहा कि समय का सदुपयोग करना सीखना होगा। कहा कि परोपकार से ही हमारा जीवन सफल होता है। कर्मों का फल अवश्य ही भोगना पड़ता है। उन्होंने कहा कि अपना आत्मनिर्माण हम स्वयं करें।
इससे पृथ्वी स्वर्ग में परिवर्तित हो जाएगी। अपनी शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्थिति को ऊंचा उठाना अपने को एक आदर्श नागरिक बनाना बड़ा धर्म-कार्य है। कथा के बाद विशाल भंडारा और कन्या भोज के साथ ही कार्यक्रम का समापन हो गया। आयोजन में कमलेश कुमार समेत ग्रामीणों का खासा सहयोग शामिल रहा।