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Hardoi News: तारीख पर तारीख ... गवाह आए न सुनवाई बढ़ी, किसी ने खुद कबूला जुर्म ताे कोई हो गया बरी
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हरदोई। अंग्रेजी कहावत है कि जस्टिस डिलेड इज जस्टिस डिनाइड। मतलब देर से मिला न्याय, न्याय नहीं होता। अदालतों में लंबित मामलों में अभियोजन की लचर पैरवी के कारण अदालतों से मुकदमों का बोझ कम नहीं हो पा रहा। लचर कार्यशैली का आलम यह है कि 13 से 30 साल पुराने मामलों तक में अभियोजन पक्ष की ओर से न्यायालयों में गवाह ही पेश नहीं किए जा सके, मुकदमे चलते रहे।
तारीखें पड़ती रहीं और आरोपी न्यायालय में हाजिरी लगाते रहे। दशकों तक पैर घिसने के बाद आर्थिक नुकसान उठाते हुए परेशान हो चुके आरोपियों ने खुद ही जुर्म कबूल कर मुकदमा खत्म कराया। किसी पर 500 रुपये का तो किसी पर एक हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। कुछ मामलों में साक्ष्य के अभाव में आरोपी बरी कर दिए गए।
केस - 1
30 साल तक लगाए न्यायालय के चक्कर, फिर खुद ही कबूला जुर्म
बसभेरिया निवासी रमेश तिवारी के खिलाफ मझिला पुलिस ने 29 अक्तूबर 1995 को प्राथमिकी दर्ज कराई थी। दावा था कि रमेश को तमंचे के साथ गिरफ्तार किया गया। न्यायालय ने उसे जेल भेज दिया था। लगभग एक माह तक रमेश जेल में बंद रहा था। मामले की सुनवाई अपर सिविल जज (सीडी) कोर्ट संख्या तीन अर्शी नूर के यहां चल रही थी। लगभग 30 साल पुराने मामले में अभियोजन पक्ष कोई भी साक्ष्य न्यायालय में पेश नहीं कर पाया। 30 साल से पेशी पर आते-आते थक कर रमेश ने जुर्म स्वीकार कर लिया। अदालत ने भी 500 रुपये का जुर्माना लगाकर मामला निस्तारित कर दिया।
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केस 2
20 साल हुआ इंतजार, गवाह मिले ही नहीं
जराहापुरवा मजरा उचवल निवासी राजकुमार को 27 सितंबर 2005 को पुलिस ने कोट तिराहे से मुखबिर की सूचना पर पकड़ा था। हरियावां के तत्कालीन थानाध्यक्ष जावेद सिद्दीकी की शिकायत पर आयुध अधिनियम के तहत मामला दर्ज हुआ था। मामले की सुनवाई अपर न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट संख्या तीन अनुराग यादव के यहां चल रही थी। इस मामले में भी अभियोजन पक्ष को साक्ष्य देने के कई अवसर दिए गए। इसके बाद भी कोई गवाह पेश नहीं कर सके। 20 साल तक मुकदमा चलता रहा। अदालत के चक्कर और खर्च से परेशान होकर आरोपी ने जुर्म स्वीकार कर लिया। न्यायालय ने भी एक हजार का जुर्माना लगाकर मामला खत्म कर दिया।
केस 3
13 साल बाद बोला आरोपी... हुजूर अब केस खत्म करिए
शाहजहांपुर जनपद के सेहरामऊ दक्षिणी के दिलावलपुर निवासी प्रदीप कुमार को शाहाबाद कोतवाली पुलिस ने 16 अगस्त 2012 को गिरफ्तार करने का दावा किया था। आरोप था कि शाहजहांपुर-हरदोई रोड पर हरियाली बाजार के आगे के उधरनपुर गांव के पास चोरी की बाइक के साथ प्रदीप पकड़ा गया है। नौ मार्च 2016 को आरोप तय हुए थे। तब से अब तक अभियोजन पक्ष की ओर से कोई साक्ष्य नहीं पेश किया जा सका। आरोपी ने न्यायालय में खुद ही जुर्म स्वीकार कर लिया। खुद को गरीब बताते हुए मुकदमा लड़ पाने में असमर्थता जताई।
केस चार...
24 साल चला मामला, साक्ष्य न मिलने आरोपी बरी
पिहानी कोतवाली क्षेत्र के दहेलिया निवासी विनोद के खिलाफ पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसमें बताया था कि दो जनवरी 2002 को पुलिस ने दमगढ़ा के पास विनोद को तमंचे के साथ पकड़ा था। 20 नवंबर 2003 को न्यायालय ने आरोप तय कर दिए। तब से अब तक अभियोजन पक्ष न तो कोई प्रभावी साक्ष्य प्रस्तुत कर सका न ही गवाह। इस पर विनोद को दोषमुक्त कर दिया गया। न्यायालय ने पैरवी और साक्ष्य के अभाव को आधार बनाया।
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तारीखें पड़ती रहीं और आरोपी न्यायालय में हाजिरी लगाते रहे। दशकों तक पैर घिसने के बाद आर्थिक नुकसान उठाते हुए परेशान हो चुके आरोपियों ने खुद ही जुर्म कबूल कर मुकदमा खत्म कराया। किसी पर 500 रुपये का तो किसी पर एक हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। कुछ मामलों में साक्ष्य के अभाव में आरोपी बरी कर दिए गए।
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केस - 1
30 साल तक लगाए न्यायालय के चक्कर, फिर खुद ही कबूला जुर्म
बसभेरिया निवासी रमेश तिवारी के खिलाफ मझिला पुलिस ने 29 अक्तूबर 1995 को प्राथमिकी दर्ज कराई थी। दावा था कि रमेश को तमंचे के साथ गिरफ्तार किया गया। न्यायालय ने उसे जेल भेज दिया था। लगभग एक माह तक रमेश जेल में बंद रहा था। मामले की सुनवाई अपर सिविल जज (सीडी) कोर्ट संख्या तीन अर्शी नूर के यहां चल रही थी। लगभग 30 साल पुराने मामले में अभियोजन पक्ष कोई भी साक्ष्य न्यायालय में पेश नहीं कर पाया। 30 साल से पेशी पर आते-आते थक कर रमेश ने जुर्म स्वीकार कर लिया। अदालत ने भी 500 रुपये का जुर्माना लगाकर मामला निस्तारित कर दिया।
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केस 2
20 साल हुआ इंतजार, गवाह मिले ही नहीं
जराहापुरवा मजरा उचवल निवासी राजकुमार को 27 सितंबर 2005 को पुलिस ने कोट तिराहे से मुखबिर की सूचना पर पकड़ा था। हरियावां के तत्कालीन थानाध्यक्ष जावेद सिद्दीकी की शिकायत पर आयुध अधिनियम के तहत मामला दर्ज हुआ था। मामले की सुनवाई अपर न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट संख्या तीन अनुराग यादव के यहां चल रही थी। इस मामले में भी अभियोजन पक्ष को साक्ष्य देने के कई अवसर दिए गए। इसके बाद भी कोई गवाह पेश नहीं कर सके। 20 साल तक मुकदमा चलता रहा। अदालत के चक्कर और खर्च से परेशान होकर आरोपी ने जुर्म स्वीकार कर लिया। न्यायालय ने भी एक हजार का जुर्माना लगाकर मामला खत्म कर दिया।
केस 3
13 साल बाद बोला आरोपी... हुजूर अब केस खत्म करिए
शाहजहांपुर जनपद के सेहरामऊ दक्षिणी के दिलावलपुर निवासी प्रदीप कुमार को शाहाबाद कोतवाली पुलिस ने 16 अगस्त 2012 को गिरफ्तार करने का दावा किया था। आरोप था कि शाहजहांपुर-हरदोई रोड पर हरियाली बाजार के आगे के उधरनपुर गांव के पास चोरी की बाइक के साथ प्रदीप पकड़ा गया है। नौ मार्च 2016 को आरोप तय हुए थे। तब से अब तक अभियोजन पक्ष की ओर से कोई साक्ष्य नहीं पेश किया जा सका। आरोपी ने न्यायालय में खुद ही जुर्म स्वीकार कर लिया। खुद को गरीब बताते हुए मुकदमा लड़ पाने में असमर्थता जताई।
केस चार...
24 साल चला मामला, साक्ष्य न मिलने आरोपी बरी
पिहानी कोतवाली क्षेत्र के दहेलिया निवासी विनोद के खिलाफ पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसमें बताया था कि दो जनवरी 2002 को पुलिस ने दमगढ़ा के पास विनोद को तमंचे के साथ पकड़ा था। 20 नवंबर 2003 को न्यायालय ने आरोप तय कर दिए। तब से अब तक अभियोजन पक्ष न तो कोई प्रभावी साक्ष्य प्रस्तुत कर सका न ही गवाह। इस पर विनोद को दोषमुक्त कर दिया गया। न्यायालय ने पैरवी और साक्ष्य के अभाव को आधार बनाया।