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करोड़ों खर्च फिर भी वही पुराना मर्ज

Sun, 20 Feb 2022 10:31 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 20 Feb 2022 10:31 PM IST
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crores spent yet same old merge
हरदोई। पिछले एक दशक में जिले में स्वच्छता अभियान के नाम पर करोड़ों खर्च हो गए, मगर जिम्मेदारों की बेखबरी से सिस्टम में लगे भ्रष्टाचार के दीमकों ने बजट को चट कर लिया।
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आंकड़ों में जिला ओडीएफ है और शहर से लेकर गांवों तक सभी साफ स्वच्छ है, मगर हकीकत दूर है। स्वच्छता अभियान के नाम पर जिले को भारत सरकार एवं उत्तर प्रदेश सरकारों से मिली करोड़ों की धनराशि का दुरुपयोग कर कुछ लोगों ने अपने आलीशान भवन बना लिए, मगर जिन भवनों एवं स्थानों को साफ स्वच्छ रखना था, उन्हें भूल गए।
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आलम यह है कि शहर से लेकर गांवों तक कूड़े के ढेर और टूटे पड़े शौचालय जिम्मेदारों को आइना दिखा रहे हैं। जिले में सात पालिका एवं छह नगर पंचायतों के साथ 1306 ग्राम पंचायतें हैं।
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इन ग्राम पंचायतों के अंतर्गत करीब दो हजार राजस्व गांव हैं। कमोवेश हर राजस्व गांव के लिए एक सफाई कर्मचारी हैं, तो पालिका एवं नगर पंचायतों के पास सफाई कर्मचारियों एवं दिहाड़ी पर कार्य करने वालों की लंबी फौज है।
इसके बाद भी साफ सफाई की व्यवस्था बेपरवाही की भेंट चढ़ रही है। नगर पालिकाओं का मसला हो या फिर नगर पंचायत और ग्राम पंचायतों का, कहीं भी अफसरों एवं कर्मचारियों से ज्यादा वहां चेयरमैन एवं प्रधानों की ही चलती है।
आलम यह है कि कार्य प्रणाली चंद लोगों तक सिमटी है। ठेकेदारी से लेकर हर कार्य में चंद लोगों के हस्तक्षेप के चलते वहां के कर्मचारी कुछ बोलने से भी परहेज करते हैं।
यही कारण है कि आम जनता की शिकायतों एवं तकलीफों पर कर्मचारी व अफसर कार्यवाही करने से पहले इन हावी रहने वाले लोगों के निर्देश मिलने का इंतजार करते हैं। इस लाचारी के चलते कमोवेश आंकड़ों में सब कुछ साफ स्वच्छ नजर आता है, मगर हकीकत किसी से छिपी हुई नहीं है।
भ्रष्टाचार के दीमक चट कर रहा करोड़ों का बजट
आंकड़ों में जिले में करीब पांच लाख शौचालय बनाए गए हैं। शौचालयों का निर्माण कराकर जिले को खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) घोषित कर दिया गया, जबकि जिले में निवास करने वाले परिवारों की संख्या पर नजर डालें, तो यह करीब 12 लाख के करीब है।
इसके अलावा यदि राशन कार्ड की संख्या एवं लंबित राशन कार्ड के आवेदनों की कुल संख्या आठ लाख को भी माने तो बात आइने की तरह साफ हो जाती है कि अभी हर घर तक शौचालय नहीं बन सका है।
यह अलग बात है कि लोगों ने निजी स्तर से शौचालय बनाए हैं। इसके अलावा आंकड़ों में जो करोड़ों खर्च कर पांच लाख शौचालय बनाने की बात कही गई, उनकी भी लाभार्थियों के नाम एवं स्थलीय निरीक्षण से जांच हो जाए, तो सच सामने आ जाएगा।
गांवों से जुड़े लोग बताते हैं कि भ्रष्टाचार के दीमकों ने लाभ की राशि देने के नाम पर खूब उगाही की, जिससे शौचालय पूर्ण करने के लिए जैसे तैसे ईंटें लगानी पड़ी। यही कारण है कि बनने के कुछ समय बाद ही यह शौचालय जमींदोज होने की कगार पर आ गए हैं।
ये है स्वच्छता अभियान का सच
पिछले कुछ वर्षों में स्वच्छता अभियान के नाम पर जिले में पालिकाओं, नगर पंचायतों एवं ग्राम पंचायतों ने बड़े पैमाने पर कूडे़दान, कचरा बाक्स से लेकर तमाम उपकरणों की खरीद पर करोड़ों की धनराशि खर्च की।
इसमें बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुईं, जिसको लेकर तमाम ग्राम पंचायतें शक के दायरे में रही और जांच भी हुई, मगर कुछ समय पूर्व हुए पंचायत चुनाव के बाद यह जांचे आदि सब किनारे हो गई है।
जांचों को राजनीतिक रूप देकर ठेकेदारों ने विरोध शुरू किया, तो तरह-तरह के मायने निकाले जाने लगे, जिससे मामला फिलहाल ठंडे बस्ते में चला गया।
कुछ समय पूर्व स्वच्छता अभियान में गांव-गांव लगाए गए मानदेय आधारित कार्यकर्ताओं के लाखों के भुगतान का मसला भी उठा था, मगर विभागीय जिम्मेदारों ने इस ओर खबर नहीं ली। बताते हैं कि भुगतान न होने को लेकर शिकायतें भी हुई हैं।
असरदारों के घरों में काम कर रहे सफाईकर्मी
यूं तो सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति सेवा क्षेत्रों में सफाई कार्य करने के लिए की गई थी और शहर हो या गांव जो जहां तैनात है, उसको अपने विभाग और निकाय के अनुसार साफ सफाई कार्य करना चाहिए, मगर इसमें भी असरदार लोग खेल कर रहे हैं।
तमाम सफाई कर्मचारी असरदारों के घरों पर काम कर रहे हैं। कोई किसी का वाहन चला रहा, तो किसी के घर की चौकीदारी कर रहा है।
सफाई कर्मचारियों के एक संगठन से जुड़े लोगों ने बताया कि इस मसले पर संगठन भी खुलकर विरोध नहीं जता पाते, क्योंकि मामला काफी बड़े स्तर तक हो जाता है।
सदर में ही अगर-मगर तो फिर कैसी होगी डगर
स्वच्छता अभियान की बात करें तो सदर में ही जगह-जगह लगने वाले कूड़े के ढेर और साफ सफाई की व्यवस्था बदहाल है। यहां इस ओर होने वाली शिकायतों पर ही कर्मचारी अगर मगर की बात करते है, तो अंदाजा लगाना सहज है कि जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में क्या हाल होगा।
बोले डीपीआरओ
ग्राम पंचायतों में क्या कार्य कैसे होता है, इसकी जानकारी ग्राम प्रधान एवं पंचायत सचिव को होती है। उनके पास जब कोई शिकायत आती है, तो जांच करते हैं। फिलहाल कोई शिकायत जांच के लिए लंबित नहीं है।
ओडीएफ को लेकर पूर्व में जो कार्य वो बनाई गई सूची के आधार पर हुए थे। अगर गरीबों को शौचालय नहीं मिल सके, तो इसमें विभाग कुछ नहीं कर सकता, क्योंकि विभाग ने पूर्व की सूची पर शौचालय निर्माण के लिए अनुदान दिया और इस हिसाब से पूरा जिला खुले में शौच से मुक्त हो चुका है।
साफ-सफाई कार्य यदि गांव में नहीं हो रहे, तो जानकारी प्रधान एवं सचिव को देनी चाहिए। जब वो कार्रवाई न करें तो जिला प्रशासन से शिकायत करें। नियमानुुसार जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।

- गिरीश चंद्र, डीपीआरओ
ऐसा नहीं है कि साफ-सफाई की व्यवस्था ठीक नहीं है। नियमित रूप से सफाई का कार्य होता है। शहर के बदहाल सार्वजनिक शौचालयों आदि के बाबत जानकारी करने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
- रविशंकर, ईओ पालिका
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