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अधिवक्ता व न्यायिक कर्मचारियों के बीच मारपीट, अधिवक्तता हड़ताल पर

Thu, 17 Aug 2017 11:48 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, हरदोई
अमर उजाला ब्यूरो, हरदोई Updated Thu, 17 Aug 2017 11:48 PM IST
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Criminalization of judicial staff, on advocacy strike
न्यायालय परिसर में कंप्यूटर कक्ष का टूटा हुआ दरवाजा। - फोटो : amarujala

हरदोई। दीवानी न्यायालय परिसर के कंप्यूटर कक्ष में कंप्यूटर पर फाइल की फीडिंग को लेकर कर्मचारी और अधिवक्ताओं के बीच गुरुवार को वाद-विवाद हो गया। मामला इतना बढ़ गया कि दोनों पक्षों में मारपीट हो गई। कर्मचारियों ने अधिवक्ताओं पर मारपीट करने और कंप्यूटर रूम व नजारत कक्ष में तोड़फोड़ का आरोप लगाते हुए रिपोर्ट दर्ज कराने की मांग करते हुए काम काज ठप कर दिया। वहीं, अधिवक्ताओं ने भी बैठक कर न्यायालय के कर्मचारियों पर महिला अधिवक्ता से अश्लील भाषा का प्रयोग करने और साथी अधिवक्ता से मारपीट का आरोप लगाया है। अधिवक्ता संघ ने बैठक कर घटना के विरोध में बेमियादी हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया।

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कचहरी में गुरुवार को दोपहर 12 बजे के बाद अचानक हंगामा शुरू हो गया। न्यायालय परिसर के कंप्यूटर कक्ष में कर्मचारियों और कुछ अधिवक्ताओं के बीच कहासुनी के बाद मामला मारपीट और तोड़-फोड़ तक पहुंच गया। जानकारी मिलते ही कर्मचारी और अधिवक्ता बड़ी संख्या में मौके पर पहुंच गए। मारपीट के बाद कंप्यूटर कक्ष के कर्मचारी ऋषभ शुक्ला ने जनपद न्यायाधीश को दिए गए अपने प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया कि वह अपने कार्यालय में कार्य कर रहा था। करीब 12:30 बजे अधिवक्ता आलोक अवस्थी, अतुल चतुर्वेदी एवं अन्य 15 अधिवक्ता कार्यालय के बाहर फाइल फीडिंग के लिए कहने लगे।
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जब उसने समय अधिक हो जाने के कारण फीडिंग होने में असमर्थता जाहिर की तो यह लोग कंप्यूटर कक्ष में घुस आए और उसे पीटा और जान से मार देने की धमकी दी। न्यायालय कर्मचारी ने आरोप लगाया कि इन लोगों ने कंप्यूटर कक्ष का शीशा तोड़ दिया तथा सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाई। जब कर्मचारी भागकर नजारत विभाग में गया तो वहां भी अधिवक्ताओं ने सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया। कर्मचारी के अनुसार मौके पर अन्य कई कर्मचारी एकत्रित हो गए जिन्होंने उसे बचाया। कर्मचारी ने मामले की रिपोर्ट दर्ज कराने की मांग जिला जज से की। कर्मचारियों ने घटना के विरोध में अदालतों में काम काज ठप कर दिया और बैठक कर कार्रवाई की मांग की।
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वहीं, इस मसले पर अधिवक्ता खुशबू शेख ने अधिवक्ता संघ अध्यक्ष और महामंत्री को संबोधित प्रार्थना पत्र अधिवक्ता संघ को दिया। जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि वह दीवानी के एक मुकदमे की कंप्यूटर रूम में फीडिंग कराने गई थीं। जहां पर मौजूद कर्मचारी ऋषभ व अन्य कर्मचारियों ने उनसे अश्लील बातें कहते हुए 200 रुपये की मांग की और वहां मौजूद अन्य अधिवक्ताओं को भी बेइज्जत किया। जब महिला अधिवक्ता के साथी अतुल चतुर्वेदी वहां पर पहुंचे तो सभी कर्मचारी अधिवक्ता अतुल पर टूट पड़े तथा धक्का देकर अतुल के साथ मारपीट कर चाकू से हमला कर दिया। महिला अधिवक्ता के प्रार्थना पत्र पर सैकड़ों वकीलों ने हस्ताक्षर कर संघ के पदाधिकारियों से तत्काल आम सभा की बैठक बुलाकर कार्रवाई की मांग की।

प्रभारी अध्यक्ष दिनेश चंद्र अस्थाना ने तुरंत आम सभा की आपात बैठक बुलाकर मामले में चर्चा कराई। जिसका संचालन प्रभारी मंत्री शाहब हसन ने किया। बैठक में अधिवक्ता आलोक अवस्थी, अतुल चतुर्वेदी, रामेंद्र सिंह तोमर, पीके मिश्रा, कर्मवीर सिंह, दिग्विजय सिंह आदि कई वकीलों ने अपने विचार रखते हुए मामले में गंभीर निर्णय लेने की बात कही। बैठक की अध्यक्षता कर रहे दिनेश चंद्र अस्थाना ने प्रस्ताव पारित करते हुए कहा कि अधिवक्ताओं के विरुद्ध अन्याय किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और जब तक अधिवक्ताओं की मांगें पूरी नहीं होगीं तब तक अधिवक्ता बेमियादी हड़ताल पर रहेंगे। वहीं इस मसले पर शुक्रवार को सुबह 11 बजे पुन: अग्रिम रूपरेखा तय करने के लिए बैठक बुलाई गई है। विवाद और हंगामेे के कारण गुरुवार को दूर दराज से कार्यों को लेकर कचहरी आए वादकारियों को अगली पेशियां लेकर घर लौटना पड़ा।

जिंदाबाद-मुर्दाबाद से गूंजता रहा न्यायालय परिसर
 दोपहर 12 बजे के बाद कर्मचारियों और अधिवक्ताओं के मध्य हुए विवाद के  कारण न्यायालय परिसर में दोनों पक्षों के विरोध-प्रदर्शन के चलते जिंदाबाद और मुर्दाबाद के नारों से परिसर गूंजता रहा। एक ओर जहां कर्मचारियों ने विवाद के बाद अपनी-अपनी सीटें छोड़कर परिसर में कर्मचारी संघ के अध्यक्ष अंगनेलाल के साथ घूमकर घटना के विरोध में नारेबाजी की और काम काज को बंद रखा।  बैठक के बाद सैकड़ों की संख्या में वकीलों ने प्रभारी अध्यक्ष दिनेशचंद्र अस्थाना के नेतृत्व में न्यायालय परिसर में जुलूस निकालकर घटना के विरोध में नारेबाजी की। वहीं माहौल की नजाकत को देखकर न्यायालय परिसर में भारी संख्या में  पुलिस फोर्स भी मौजूद रहा। खुफिया विभाग भी घटनाक्रम पर बारीकी से  नजर बनाए रहा।  

वकीलों और न्यायिक अधिकारियों में हुई वार्ता
कर्मचारियों और अधिवक्ताओं के बीच हुए विवाद के बाद प्रभारी जिला जज अलका श्रीवास्तव के समक्ष न्यायिक अधिकारियों और बार एसोसिएशन के प्रतिनिधि मंडल के मध्य शाम को वार्ता भी हुई। प्रभारी अध्यक्ष अधिवक्ता संघ दिनेश चंद्र अस्थाना ने बताया कि उन्होंने साथी अधिवक्ताओं के साथ प्रभारी जिला जज से मुलाकात कर उन्हें पूरे मामले से और अधिवक्ताओं के पक्ष से अवगत करा दिया है।


न्यायिक अधिकारियों ने किया घटना स्थल का निरीक्षण
इंफ्रास्ट्रक्चर कमेटी के अध्यक्ष अपर जिला जज शिवमणि शुक्ला और कंप्यूटर विभाग के प्रभारी अधिकारी एसीजेएम देवाशीष ने कंप्यूटर रूम और नजारत कक्ष पहुंचकर वहां के कर्मचारियों से मामले की जानकारी ली। अधिकारियों ने पूरे मामले की गहनता से जांच की। सूत्रों के अनुसार पूरे मामले से उच्च न्यायालय को भी अवगत कराया जाएगा।

 

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