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हत्या में सात को आजीवन कारावास की सजा
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हरदोई। शहर कोतवाली क्षेत्र में लगभग साढ़े 11 वर्ष पहले हुए सनसनीखेज हत्याकांड के मामले की सुनवाई पूरी कर अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या-3 संजीव कुमार सिंह ने सात दोषियों को आजीवन कारावास सुनाया है। सभी पर 55-55 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है। मामले की सुनवाई के दौरान एक आरोपी की मौत हो चुकी है, जबकि उसका पुत्र फरार है। ये दोनों आरोपी शाहाबाद से भाजपा विधायक रजनी तिवारी के जेठ और भतीजे हैं, लेकिन कई दशक से इन लोगों से विधायक के कोई संबंध नहीं है।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता कौशल किशोर त्रिपाठी ने बताया कि शहर कोतवाली क्षेत्र के आवास विकास कालोनी निवासी बृजकिशोर गुप्ता ने 27 जनवरी 2010 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें बताया था कि उसका पुत्र आशीष गुप्ता 26 जनवरी की शाम को दुर्घटना में घायल मित्र के पिता को देखने के लिए अस्पताल के लिए निकला, फिर नहीं लौटा। 27 जनवरी को उसकी बाइक सांडी रोड पर मिली थी। पता चला कि 26 जनवरी की रात आठ बजे आशीष को इंद्रेश गुप्ता के साथ देखा गया था। तहरीर में आशंका जताई गई थी कि इंद्रेश ने दोस्तों के साथ मिलकर आशीष का अपहरण कर लिया। पुलिस को 27 जनवरी को ही वैटगंज में योगेंद्र नारायण तिवारी के निर्माणाधीन मकान में आशीष का शव मिला। जांच में पता चला कि इंद्रेश गुप्ता, रवि पाल, हनी उर्फ अंकित जायसवाल, मनीष अग्निहोत्री, मोनू उर्फ रोहित सक्सेना, दीतू गुप्ता, पुनीत गुप्ता, अंकुर तिवारी ने आशीष की हत्या कर दी। शव को अंकुर के पिता योगेंद्र नारायण तिवारी के मकान में छिपाया गया, इसलिए उन्हें भी आरोपी बनाया गया।
सुनवाई के बाद कोर्ट ने इंद्रेश गुप्ता, रवि पाल, अंकित जायसवाल, मनीष अग्निहोत्री, रोहित सक्सेना, दीपू गुप्ता और पुनीत गुप्ता को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
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मामले की सुनवाई के दौरान योगेंद्र तिवारी की मौत हो गई, जबकि उनका पुत्र अंकुर तिवारी मामले की सुनवाई के दौरान ही फरार हो गया। जुर्माने की आधी रकम मृतक के पित्रा बृजकिशोर गुप्ता को देने के निर्देश दिए गए हैं।
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सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता कौशल किशोर त्रिपाठी ने बताया कि शहर कोतवाली क्षेत्र के आवास विकास कालोनी निवासी बृजकिशोर गुप्ता ने 27 जनवरी 2010 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें बताया था कि उसका पुत्र आशीष गुप्ता 26 जनवरी की शाम को दुर्घटना में घायल मित्र के पिता को देखने के लिए अस्पताल के लिए निकला, फिर नहीं लौटा। 27 जनवरी को उसकी बाइक सांडी रोड पर मिली थी। पता चला कि 26 जनवरी की रात आठ बजे आशीष को इंद्रेश गुप्ता के साथ देखा गया था। तहरीर में आशंका जताई गई थी कि इंद्रेश ने दोस्तों के साथ मिलकर आशीष का अपहरण कर लिया। पुलिस को 27 जनवरी को ही वैटगंज में योगेंद्र नारायण तिवारी के निर्माणाधीन मकान में आशीष का शव मिला। जांच में पता चला कि इंद्रेश गुप्ता, रवि पाल, हनी उर्फ अंकित जायसवाल, मनीष अग्निहोत्री, मोनू उर्फ रोहित सक्सेना, दीतू गुप्ता, पुनीत गुप्ता, अंकुर तिवारी ने आशीष की हत्या कर दी। शव को अंकुर के पिता योगेंद्र नारायण तिवारी के मकान में छिपाया गया, इसलिए उन्हें भी आरोपी बनाया गया।
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सुनवाई के बाद कोर्ट ने इंद्रेश गुप्ता, रवि पाल, अंकित जायसवाल, मनीष अग्निहोत्री, रोहित सक्सेना, दीपू गुप्ता और पुनीत गुप्ता को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
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मामले की सुनवाई के दौरान योगेंद्र तिवारी की मौत हो गई, जबकि उनका पुत्र अंकुर तिवारी मामले की सुनवाई के दौरान ही फरार हो गया। जुर्माने की आधी रकम मृतक के पित्रा बृजकिशोर गुप्ता को देने के निर्देश दिए गए हैं।