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कांग्रेस व जनसंघ के प्रत्याशी रहे शिष्टाचार की मिसाल
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शाहाबाद। विधानसभा चुनावों के शुरुआती दौर में शाहाबाद विधानसभा सीट में सवायजपुर क्षेत्र भी आता था। उस समय कांग्रेस से राजा हरिहर बख्श सिंह तथा जनसंघ से नगर के प्रख्यात चिकित्सक डॉ. प्यारेलाल मिश्रा के बीच कड़ा संघर्ष होता था।
लोगों का कहना है कि चुनाव प्रचार के दौरान जब दोनों प्रतिद्वंद्वियों का सामना होता तो राजा हरिहर बख्श सिंह अपने विरोधी ब्राह्मण प्रत्याशी से विजयी होने का आशीर्वाद मांगते तो डॉक्टर चुनाव मैदान में होने के बावजूद शिष्टाचार का पालन करते हुए मुक्तकंठ से उन्हें आशीर्वाद दे देते थे।
1962 में डॉ. प्यारेलाल मिश्रा ने जनसंघ प्रत्याशी के रूप में विजय दर्ज की थी। इसके बाद 1967 व 1969 में राजा हरिहर बख्श सिंह ने उन्हें पराजित कर दिया था।
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उस दौर के चुनाव में संपर्क मार्गों का अभाव था, सड़कें भी ऊबड़ खाबड़ थी। आने जाने के लिए पगडंडियों का ही सहारा था। प्रत्याशी केवल एक जीप से अपना जनसंपर्क अभियान चलाते थे।
पार्टी कार्यकर्ता बिना किसी लाभ हानि के समर्पित भाव से अपने प्रत्याशी को जिताने के लिए रात दिन मेहनत करते थे। अपने निर्धारित बूथों पर ही रहते थे। चुनाव कराकर ही अपने घरों मे लौटते थे। उस समय केवल टोपी, बिल्ला और झंडा ही प्रचार के प्रमुख साधन थे।
समय-समय पर परिसीमन के बाद क्षेत्र बदलते रहे, मगर शाहाबाद सीट का अस्तित्व उसी के नाम से है।
विधान सभा चुनाव 2012 से पहले हुए परिसीमन के बाद पहले चुनाव 2012 में इस सीट पर सपा के बाबू खां ने जीत दर्ज की थी, जबकि 2017 के चुनाव में बसपा से सवायजपुर से विधायक रही रजनी तिवारी को भाजपा ने चुनाव लड़ाया और उन्होंने जीत दर्ज की थी।
2012 के चुनाव के पहले यहां से बसपा से आसिफ खां बब्बू चुनाव जीतकर विधायक रह चुके हैं।
अबकी चुनाव में भाजपा से रजनी तिवारी, सपा से आसिफ खां बब्ब्बू एवं बसपा से एबी सिंह व कांग्रेस से डॉ. अजीमुश्शान के अलावा भाजपा के बागी अखिलेश पाठक के अलावा अन्य दलों एवं निर्दल प्रत्याशी चुनावी मैदान में हैं।
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लोगों का कहना है कि चुनाव प्रचार के दौरान जब दोनों प्रतिद्वंद्वियों का सामना होता तो राजा हरिहर बख्श सिंह अपने विरोधी ब्राह्मण प्रत्याशी से विजयी होने का आशीर्वाद मांगते तो डॉक्टर चुनाव मैदान में होने के बावजूद शिष्टाचार का पालन करते हुए मुक्तकंठ से उन्हें आशीर्वाद दे देते थे।
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1962 में डॉ. प्यारेलाल मिश्रा ने जनसंघ प्रत्याशी के रूप में विजय दर्ज की थी। इसके बाद 1967 व 1969 में राजा हरिहर बख्श सिंह ने उन्हें पराजित कर दिया था।
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उस दौर के चुनाव में संपर्क मार्गों का अभाव था, सड़कें भी ऊबड़ खाबड़ थी। आने जाने के लिए पगडंडियों का ही सहारा था। प्रत्याशी केवल एक जीप से अपना जनसंपर्क अभियान चलाते थे।
पार्टी कार्यकर्ता बिना किसी लाभ हानि के समर्पित भाव से अपने प्रत्याशी को जिताने के लिए रात दिन मेहनत करते थे। अपने निर्धारित बूथों पर ही रहते थे। चुनाव कराकर ही अपने घरों मे लौटते थे। उस समय केवल टोपी, बिल्ला और झंडा ही प्रचार के प्रमुख साधन थे।
समय-समय पर परिसीमन के बाद क्षेत्र बदलते रहे, मगर शाहाबाद सीट का अस्तित्व उसी के नाम से है।
विधान सभा चुनाव 2012 से पहले हुए परिसीमन के बाद पहले चुनाव 2012 में इस सीट पर सपा के बाबू खां ने जीत दर्ज की थी, जबकि 2017 के चुनाव में बसपा से सवायजपुर से विधायक रही रजनी तिवारी को भाजपा ने चुनाव लड़ाया और उन्होंने जीत दर्ज की थी।
2012 के चुनाव के पहले यहां से बसपा से आसिफ खां बब्बू चुनाव जीतकर विधायक रह चुके हैं।
अबकी चुनाव में भाजपा से रजनी तिवारी, सपा से आसिफ खां बब्ब्बू एवं बसपा से एबी सिंह व कांग्रेस से डॉ. अजीमुश्शान के अलावा भाजपा के बागी अखिलेश पाठक के अलावा अन्य दलों एवं निर्दल प्रत्याशी चुनावी मैदान में हैं।