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‘सच का सामना’ में फरियादी-विवेचक आमने-सामने

Thu, 05 Nov 2020 11:21 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 05 Nov 2020 11:21 PM IST
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Compliant face-to-face in 'Truth's face'
हरदोई। सच का सामना, पढ़ते या सुनते ही जेहन में फिल्मी सीरियल, टीवी न्यूज की डिबेट, उपन्यास की तस्वीर बनती है, लेकिन यहां ऐसा नहीं है। जनपद के पुलिस अधीक्षक ने विभिन्न विवेचनाओं में पुलिस पर लगने वाले आरोपों की हकीकत जानने के लिए अनूठी पहल की है। इसका नाम ‘सच का सामना’ है। इसमें एसपी की मौजूदगी में शिकायतकर्ता और विवेचक का आमना-सामना कराया जाता है।
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थाने-कोतवाली में दर्ज विभिन्न मामलों में विवेचक के स्तर से जान-बूझकर लापरवाही किए जाने या फिर गलत कार्रवाई किए जाने की शिकायत एसपी अनुराग वत्स के पास आए दिन पहुंचतीं हैं। कई बार ये शिकायतें जायज और सही होती हैं, लेकिन कई बार ये गलत होतीं हैं। ऐसे में फरियादियों को संतुष्ट करने और विवेचना में जान-बूझकर खेल करने वाले विवेचकों के विरुद्ध कार्रवाई के उद्देश्य से एसपी ने ‘सच का सामना’ कराना शुरू किया है।
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जब कोई फरियादी विवेचना मेें गड़बड़ी किए जाने का आरोप लगाते हुए शिकायत एसपी को देता है तो एसपी इसी प्रार्थनापत्र पर ‘सच का सामना’ मार्क कर देते हैं। ऐसे प्रार्थनापत्रों पर संबंधित विवेचक को संबंधित प्रकरण के बारे में पूरी जानकारी, अभिलेख लेकर एसपी के सामने पेश होना पड़ता है। इसी दौरान शिकायतकर्ता को भी बुलाया जाता है। अभिलेखों औैर विवेचक के तर्क जायज होने पर फरियादी को यह भी बताया जाता है कि कहीं कोई गड़बड़ी और गलती नहीं है, सिर्फ आशंका न की जाए, लेकिन अगर विवेचक की कोई गलती पकड़ी जाती है तो एसपी उसके विरुद्ध गोपनीय कार्रवाई शुरू कर देते हैं।
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पिछले कुछ दिनों मेें सच का सामना मेें पहुंचे विवेचक एसपी कार्यालय के बाहर ही कांपते नजर आए। दरअसल एसपी का रुख बेहद स्पष्ट है। अगर विवेचक ने गलती की है तो उसे सजा मिलना तय रहती है। कहीं न कहीं विवेचक के मन में भय रहता है कि कोई गड़बड़ी पकड़ी गई तो सजा मिलनी तय है। वहीं कुछ पुलिसकर्मी इस व्यवस्था से बेहद खुश भी हैं। यह ऐसे पुलिसकर्मी हैं जिन्होंने विवेचना तो पारदर्शी तरीके से की है, लेकिन राजनीतिक दबाव को दरकिनार किए जाने के कारण उनके विरुद्ध साजिश के तहत शिकायती पत्र दिलाए जाते हैं।

एसपी अनुराग वत्स ने बताया कि ‘सच का सामना’ का उद्देश्य बिल्कुल स्पष्ट है। किसी भी फरियादी के मन में पुलिस के प्रति यह नकारात्मक भाव नहीं जाना चाहिए कि उसके साथ जानबूझकर विवेचना में गलती की गई है। आमना-सामना होने पर फरियादी भी संतुष्ट हो जाता है। इसके अलावा विवेचक भी पूरी ईमानदारी से कार्य करते हैं, क्योंकि उन्हें जवाब देेना होता है।
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