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कमीशन का खेल:100 करोड़ से बनाई जा रही थी घटिया सड़क
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हरदोई। करीब 100 करोड़ से अधिक की लागत से बनवाए जा रहे मार्गों की लेपित सतह के नमूने फेल हो गए हैं। निर्माण सामग्री के नमूना फेल होने जानकारी लगते ही लोक निर्माण विभाग के अभियंताओं और ठेकेदारों को कार्रवाई का भय सता रहा है। जिसे लेकर अभियंताओं और ठेकेदारों में खलबली है।
लोक निर्माण विभाग की ओर से बनवाए जा रहे मार्गों की गुणवत्ता को लेकर मुख्यमंत्री ने विभागीय प्रमुख सचिव अजय चौहान की अध्यक्षता वाली समिति से निर्माणाधीन मार्गों की जांच कराई थी।
नौ नवंबर को प्रमुख सचिव की अध्यक्षता वाली समिति ने यहां पर लोक निर्माण विभाग के प्रांतीय खंड, निर्माण खंड एक और दो की ओर से बनवाए जा रहे मार्गों का औचक जायजा लिया था।
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समिति ने मार्ग के पूर्ण किए भाग की लेपित सतह से नमूना लिए थे। इन नमूनों की शासन स्तर पर प्रयोगशाला में जांच कराई गई। जांच में हरदोई के मार्गों में प्रयोग की जा रही सामग्री के नमूना फेल हो गए। सोमवार को इससे जुड़ी खबर प्रकाशित होने के बाद से विभाग में खलबली है।
प्रमुख सचिव ने 58,97,38,000 रुपये की लागत से सात मीटर चौड़ाई में बनवाई जा रही पिहानी चुंगी से रद्धेपुरवा होते हुए सांडी-शाहाबाद से जुड़ने वाली सड़क की सामग्री का नमूना लिया था। इस मार्ग को लोक निर्माण विभाग निर्माण खंड एक की ओर से बनवाया जा रहा है।
ऐसे ही प्रमुख सचिव ने प्रांतीय खंड की ओर से 40,65,46,000 रुपये की लागत से बनवाई जा रही बेहटा गोकुल-मंसूरनगर मार्ग, करीब तीन करोड़ से अधिक की लागत से बन रही खटेली-मंझगवां सड़क, निर्माण खंड दो की ओर से करीब 3.50 करोड़ की लागत से बनवाई जा रही कछौना-गौसगंज सड़क और निर्माण खंड एक की ओर से कराए गए हरदोई-सांडी मार्ग के नवीनीकरण की जांच की थी। सभी मार्गों से सामग्री के नमूना लिए थे।
बताया गया कि प्रमुख सचिव की ओर से ले जाए गए नमूनों की निर्माण सामग्री मानक में फेल हो गई। नमूना फेल होने की खबर लगते ही लोक निर्माण विभाग के जिम्मेदार अभियंताओं और काम करा रही फर्म के संचालकों में कार्रवाई का भय बैठ गया है।
सोमवार को कार्यालयों में नमूना फेल होने की रिपोर्ट की जानकारी के लिए फर्म संचालक और उनके लोग भी प्रयास करते रहे। वैसे चालू वित्तीय वर्ष में लोक निर्माण विभाग 97 परियोजनाओं पर काम करा रहा है।
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लोक निर्माण विभाग की ओर से बनवाए जा रहे मार्गों की गुणवत्ता को लेकर मुख्यमंत्री ने विभागीय प्रमुख सचिव अजय चौहान की अध्यक्षता वाली समिति से निर्माणाधीन मार्गों की जांच कराई थी।
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नौ नवंबर को प्रमुख सचिव की अध्यक्षता वाली समिति ने यहां पर लोक निर्माण विभाग के प्रांतीय खंड, निर्माण खंड एक और दो की ओर से बनवाए जा रहे मार्गों का औचक जायजा लिया था।
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समिति ने मार्ग के पूर्ण किए भाग की लेपित सतह से नमूना लिए थे। इन नमूनों की शासन स्तर पर प्रयोगशाला में जांच कराई गई। जांच में हरदोई के मार्गों में प्रयोग की जा रही सामग्री के नमूना फेल हो गए। सोमवार को इससे जुड़ी खबर प्रकाशित होने के बाद से विभाग में खलबली है।
प्रमुख सचिव ने 58,97,38,000 रुपये की लागत से सात मीटर चौड़ाई में बनवाई जा रही पिहानी चुंगी से रद्धेपुरवा होते हुए सांडी-शाहाबाद से जुड़ने वाली सड़क की सामग्री का नमूना लिया था। इस मार्ग को लोक निर्माण विभाग निर्माण खंड एक की ओर से बनवाया जा रहा है।
ऐसे ही प्रमुख सचिव ने प्रांतीय खंड की ओर से 40,65,46,000 रुपये की लागत से बनवाई जा रही बेहटा गोकुल-मंसूरनगर मार्ग, करीब तीन करोड़ से अधिक की लागत से बन रही खटेली-मंझगवां सड़क, निर्माण खंड दो की ओर से करीब 3.50 करोड़ की लागत से बनवाई जा रही कछौना-गौसगंज सड़क और निर्माण खंड एक की ओर से कराए गए हरदोई-सांडी मार्ग के नवीनीकरण की जांच की थी। सभी मार्गों से सामग्री के नमूना लिए थे।
बताया गया कि प्रमुख सचिव की ओर से ले जाए गए नमूनों की निर्माण सामग्री मानक में फेल हो गई। नमूना फेल होने की खबर लगते ही लोक निर्माण विभाग के जिम्मेदार अभियंताओं और काम करा रही फर्म के संचालकों में कार्रवाई का भय बैठ गया है।
सोमवार को कार्यालयों में नमूना फेल होने की रिपोर्ट की जानकारी के लिए फर्म संचालक और उनके लोग भी प्रयास करते रहे। वैसे चालू वित्तीय वर्ष में लोक निर्माण विभाग 97 परियोजनाओं पर काम करा रहा है।