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Hardoi News: बाल संप्रेक्षण गृह के बाल बंदी व कारागार के बंदी बनेंगे हुनरमंद

Mon, 21 Aug 2023 11:02 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 21 Aug 2023 11:02 PM IST
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Child prisoners of child communication home and prisoners of prison will become skilled
संवाद न्यूज एजेंसी
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हरदोई। जाने-अनजाने अपराध की दुनिया में कदम रखने वाले बंदियों को अब हुनरमंद बनाया जाएगा। प्रधानमंत्री कौशल विकास मिशन के तहत जिला कारागार व राजकीय बाल संप्रेक्षण गृह में विभिन्न ट्रेडों में प्रशिक्षण की व्यवस्था कराई गई है। बंदियों को उनकी रूचि व कौशल के हिसाब से 90 से 180 दिन का प्रशिक्षण दिलाया जा रहा है।
युवाओं में कौशल विकास के उद्देश्य से संचालित कौशल विकास मिशन में संस्थाओं के माध्यम से छात्र-छात्राओं को प्रशिक्षण के साथ ही जिला कारागार में विभिन्न आपराधिक मामलों में बंद युवा बंदियों को भी हुनरमंद बनाने के लिए प्रशिक्षण की व्यवस्था दी गई है। जिला कारागार में प्रथम चरण में 119 बंदियों ने प्रशिक्षण के लिए पंजीकरण कराया है। बंदियों में सिलाई (टेलरिंग), कंस्ट्रक्शन, लाईनमैन डिस्ट्रीब्यूशन व कंप्यूटर प्रशिक्षण में रूचि दिखाई है। बंदियों की रूचि के अनुसार ही प्रशासन ने कारागार में ट्रेड संचालन की स्वीकृति भी दी है।
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राजकीय बाल संप्रेक्षण गृह में 76 बाल बंदियों ने पढ़ाई के साथ कंप्यूटर प्रशिक्षण में रूचि दिखाई है। यहां पर बाल बंदियों को पंजीकृत किए जाने के साथ ही प्रशिक्षण प्रारंभ कराया गया है। कौशल विकास मिशन के एमआईएस प्रबंधक अरविंद कुमार सिंह ने बताया कि जिला कारागार के साथ ही राजकीय बाल संप्रेक्षण गृह में संस्थाओं को नामित करते हुए प्रशिक्षण शुरू करा दिया गया है। जिला कारागार में कंस्ट्रक्शन, लाईनमैन डिस्ट्रीब्यूशन, कंप्यूटर व सिलाई की ट्रेड का प्रशिक्षण दिलाया जा रहा है। राजकीय बाल संप्रेक्षण गृह में बाल बंदियों को कंप्यूटर का प्रशिक्षण दिलाया जा रहा है। बताया कि राजकीय संप्रेक्षण गृह में बाल बंदियों को उनकी आयु व योग्यताा के अनुसार कक्षाओं में पढ़ाई भी कराई जा रही है।
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कौशल विकास से आत्मनिर्भर बन सकेंगे यह
आपराधिक मामलों में जिला कारागार व राजकीय संप्रेक्षण में बंद बंदियों को स्वयं के आचरण में सुधार के साथ ही अपने जीवन कौशल को भी विकसित करने का मौका मिला है। आपराधिक मामलों में कारागार व राजकीय संप्रेक्षण गृह से रिहा होने के बाद यह युवा बंदी व बाल बंदी अपने कौशल के बल पर स्वरोजगार प्राप्त कर आत्मनिर्भर बन सकेंगे। स्वयं के साथ परिवार के पालन-पोषण की जिम्मेदारी भी उठा सकेंगे।
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