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Hardoi News: कॉपियों की जांच होगी आसान, छात्रों की बढ़ेगी परेशानी
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- माध्यमिक शिक्षा परिषद की बोर्ड परीक्षाओं में डिजिटल कॉपी जांचने की तैयारी
- मूल्यांकन की सटीकता पर उठेंगे सवाल, शिक्षकों को आर्थिक नुकसान का डर
संवाद न्यूज एजेंसी
हरदोई। माध्यमिक शिक्षा परिषद अब मुख्य बोर्ड परीक्षाओं की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन ऑनलाइन कराने की कार्ययोजना बना रहा है। कंपार्टमेंट परीक्षा में डिजिटल मूल्यांकन के प्रयोग के बाद बोर्ड प्रशासन इसे आगामी मुख्य परीक्षाओं में लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। हालांकि, बोर्ड की इस नई कवायद ने परीक्षार्थियों और शिक्षकों की चिंता बढ़ा दी है। एक ओर जहां छात्रों में स्क्रीन पर कॉपियों के सही ढंग से न जांचे जाने को लेकर संशय है, वहीं दूसरी ओर परीक्षार्थियों का भविष्य तय करने वाले शिक्षकों को आर्थिक चपत लगने का डर सता रहा है।
जनपद में 630 माध्यमिक विद्यालय संचालित है। इन विद्यालयों के प्रतिवर्ष एक लाख के आसपास विद्यार्थी हाईस्कूल व इंटर की बोर्ड परीक्षा में शामिल होते हैं। इन विद्यार्थियों के उत्तर पुस्तिकाओं को मूल्यांकन बोर्ड की ओर से आवंटित परीक्षकों की ओर से कराया जाता था। जिले में प्रतिवर्ष 25 सौ से 28 सौ शिक्षक मूल्यांकन कार्य को करते थे। उनको उत्तर पुस्तिकाओं के आधार पर पारिश्रमिक दिया जाता था।
बोर्ड की ओर से परीक्षा फल जल्द देने और आधुनिक तकनीक से मूल्यांकन कार्य करने की प्रक्रिया शुरू की है। विगत माह बोर्ड की ओर से आयोजित कंपार्टमेंट परीक्षा में डिजिटल मूल्यांकन किया गया। जिसे बोर्ड अब मुख्य परीक्षाओं में लागू करने की कार्य योजना बना रहा है। इसकी जानकारी होते ही शिक्षक व विद्यार्थियों के माथे पर चिंता की लकीर खिंच गई है। डिजिटल मूल्यांकन को लेकर सबसे बड़ा संशय विद्यार्थियों के मन में है। छात्रों का मानना है कि कंप्यूटर स्क्रीन पर लंबी उत्तर पुस्तिकाओं को पढ़ना और हर पन्ने पर लिखे गए उत्तरों का सही आकलन करना भौतिक मूल्यांकन जितना सटीक नहीं हो सकता। वहीं उत्तर पुस्तिकाएं जांचने वाले परीक्षकों में भी इस निर्णय को लेकर गहरा असंतोष है। शिक्षकों का कहना है कि मैनुअल मूल्यांकन में प्रतिदिन तय कॉपियां जांचने पर जो मानदेय मिलता था, ऑनलाइन व्यवस्था में खत्म हो जाएगा।
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वर्जन
अगर नेटवर्क की समस्या या किसी तकनीकी त्रुटि के कारण कोई पन्ना छूट गया या अंक दर्ज करने में गड़बड़ी हुई, तो इसका सीधा असर परिणाम पर पड़ेगा। बोर्ड बिना बुनियादी ढांचा मजबूत किए जल्दबाजी में यह कदम उठा रहा है। इससे शिक्षकों को पारिश्रमिक का नुकसान तो होगा ही, साथ ही अन्य समस्याएं भी आएंगी। - डॉ. राजेश तिवारी, अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश प्रधानाचार्य परिषद
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- मूल्यांकन की सटीकता पर उठेंगे सवाल, शिक्षकों को आर्थिक नुकसान का डर
संवाद न्यूज एजेंसी
हरदोई। माध्यमिक शिक्षा परिषद अब मुख्य बोर्ड परीक्षाओं की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन ऑनलाइन कराने की कार्ययोजना बना रहा है। कंपार्टमेंट परीक्षा में डिजिटल मूल्यांकन के प्रयोग के बाद बोर्ड प्रशासन इसे आगामी मुख्य परीक्षाओं में लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। हालांकि, बोर्ड की इस नई कवायद ने परीक्षार्थियों और शिक्षकों की चिंता बढ़ा दी है। एक ओर जहां छात्रों में स्क्रीन पर कॉपियों के सही ढंग से न जांचे जाने को लेकर संशय है, वहीं दूसरी ओर परीक्षार्थियों का भविष्य तय करने वाले शिक्षकों को आर्थिक चपत लगने का डर सता रहा है।
जनपद में 630 माध्यमिक विद्यालय संचालित है। इन विद्यालयों के प्रतिवर्ष एक लाख के आसपास विद्यार्थी हाईस्कूल व इंटर की बोर्ड परीक्षा में शामिल होते हैं। इन विद्यार्थियों के उत्तर पुस्तिकाओं को मूल्यांकन बोर्ड की ओर से आवंटित परीक्षकों की ओर से कराया जाता था। जिले में प्रतिवर्ष 25 सौ से 28 सौ शिक्षक मूल्यांकन कार्य को करते थे। उनको उत्तर पुस्तिकाओं के आधार पर पारिश्रमिक दिया जाता था।
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बोर्ड की ओर से परीक्षा फल जल्द देने और आधुनिक तकनीक से मूल्यांकन कार्य करने की प्रक्रिया शुरू की है। विगत माह बोर्ड की ओर से आयोजित कंपार्टमेंट परीक्षा में डिजिटल मूल्यांकन किया गया। जिसे बोर्ड अब मुख्य परीक्षाओं में लागू करने की कार्य योजना बना रहा है। इसकी जानकारी होते ही शिक्षक व विद्यार्थियों के माथे पर चिंता की लकीर खिंच गई है। डिजिटल मूल्यांकन को लेकर सबसे बड़ा संशय विद्यार्थियों के मन में है। छात्रों का मानना है कि कंप्यूटर स्क्रीन पर लंबी उत्तर पुस्तिकाओं को पढ़ना और हर पन्ने पर लिखे गए उत्तरों का सही आकलन करना भौतिक मूल्यांकन जितना सटीक नहीं हो सकता। वहीं उत्तर पुस्तिकाएं जांचने वाले परीक्षकों में भी इस निर्णय को लेकर गहरा असंतोष है। शिक्षकों का कहना है कि मैनुअल मूल्यांकन में प्रतिदिन तय कॉपियां जांचने पर जो मानदेय मिलता था, ऑनलाइन व्यवस्था में खत्म हो जाएगा।
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अगर नेटवर्क की समस्या या किसी तकनीकी त्रुटि के कारण कोई पन्ना छूट गया या अंक दर्ज करने में गड़बड़ी हुई, तो इसका सीधा असर परिणाम पर पड़ेगा। बोर्ड बिना बुनियादी ढांचा मजबूत किए जल्दबाजी में यह कदम उठा रहा है। इससे शिक्षकों को पारिश्रमिक का नुकसान तो होगा ही, साथ ही अन्य समस्याएं भी आएंगी। - डॉ. राजेश तिवारी, अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश प्रधानाचार्य परिषद