फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Hardoi News ›   Chaos in the health department received 129 TB patients

129 टीबी के मरीज मिलने से स्वास्थ्य महकमे में अफरातफरी

Thu, 09 Jun 2016 11:52 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/हरदोई
अमर उजाला ब्यूरो/हरदोई Updated Thu, 09 Jun 2016 11:52 PM IST
विज्ञापन
Chaos in the health department received 129 TB patients
जांच करता स्वास्थ्यकर्मी - फोटो : अमर उजाला

हरदोई। तीन माह से चिकित्सालय में उपलब्ध सीवी नाट मशीन ने जिले में 129 एमडीआर रोगी यानी टीबी की थर्ड स्टेज के रोगी खोज निकाले हैं। इससे स्वास्थ्य विभाग में अफरातफरी मची है। इस मशीन ने 228 रोगियों की जांच की थी।

विज्ञापन


टीबी को जड़ से समाप्त करने के लिए जिले में क्षय रोग नियंत्रण सरीखे कार्यक्रम चल रहे हैं। साधारण टीवी के छह और आठ माह के  कोर्स के पूरा होने के बावजूद तीसरी और डेंजर स्टेज में पहुंचने वाली एमडीआर टीवी के रोगी भी जिले में कम नहीं हैं। इसकी जांच मार्च माह से पूर्व बरेली में होती थी। अब सीवी नाट मशीन तीन माह में 228 जांचें करने के बाद 129 पॉजिटिव एमडीआर रोगी पाए गए।
विज्ञापन


जिला क्षयरोग अधिकारी डा. आरपी रावत ने बताया कि अभी तक जो भी एमडीआर के संभावित रोगी आते थे वह पॉजिटिव हैं या नहीं उनको परीक्षण के लिए बरेली भेज दिया जाता था। इस मशीन के आने के बाद एक घंटा 40 मिनट में ही परिणाम सामने आ जाता है जिससे जांचें अधिक व समय पर हो रही हैं इसलिए रोगी अधिक मिल रहे हैं। इससे स्वास्थ्य विभाग व क्षय रोग कार्यक्रम और भी अलर्ट कर दिया गया है। अभी 32 एमडीआर रोगियों को ठीक भी किया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


एमडीआर पॉजिटिव आने पर भेजे जाते मेडिकल कालेज
क्षय रोग विभाग के  चिकित्सकों का कहना है कि सामान्य तौर पर टीबी का इलाज छह से आठ माह का होता है। ये दवाएं फेल होने के बाद रोगियों का सीवी नाट से परीक्षण होता है और पॉजिटिव पाए जाते हैं तो मेडिकल कालेज उस जांच को भेजे जाते हैं। वहां पर उनको देखकर यह बताया जाता है कि कौन सी दवाएं उन्हें शूट नहीं कर रही हैं जिनको बदलकर उन्हें परामर्श दे दिया जाता है। उसी से जिले में आकर उनका फिर से इलाज चलता है।
 
एक रोगी पर खर्च हो रहे ढाई लाख
एक एमडीआर रोगी को स्वस्थ करने के लिए कार्यक्रम में शासन की ओर से अनुमानित खर्चा ढाई लाख बताया गया है। इसलिए रोगियों का दवाओं को बीच में बंद करने से रोगी का पुन: इलाज शुरू करना होता है और कार्यक्रम में लाखों का नुकसान होता है।

24 से 27 माह का होता है एमडीआर इलाज
चिकित्सकाें की माने तो सामान्य तौर पर टीबी का इलाज छह माह का होता है। न ठीक होने पर उसे आठ माह का कर दिया जाता है। इसके बाद भी न ठीक हो तो उसे एमडीआर टीबी की श्रेणी में रखा गया है। जो काफी खतरनाक स्टेज बताई गई है।


एक मरीज बना देता 12 से 17 एमडीआर रोगी
एमडीआर टीबी को खतरनाक इसलिए कहा जाता है क्योंकि संपर्क में रहने वाले लोग भी इसकी चपेट में आ जाते हैं। चिकित्सकों का कहना है कि गलत न होगा कि एक टीबी का मरीज 12 से 17 मरीज और बना देता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed