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दोपहर होते-होते बैंकों में नहीं बचा पैसा, मायूस लौटे लोग

Sat, 26 Nov 2016 12:01 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, हरदोई
अमर उजाला ब्यूरो, हरदोई Updated Sat, 26 Nov 2016 12:01 AM IST
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By midday save money in the banks, desperate people returned
महात्मा गांधी मार्ग पर यूनियन बैंक के बाहर लगी ग्राहकों की भीड़ - फोटो : अमर उजाला

हरदोई।  एसबीआई, यूनियन बैंक और निजी बैंकों को छोड़कर जिले की ज्यादातर बैंकों में शुक्रवार को दोपहर बाद ही नो कैश के बोर्ड टांग दिए गए। शनिवार और रविवार लगातार दो दिन अवकाश होनेे के कारण पिछले चार दिनों की अपेक्षा शुक्रवार को बैंकों में भीड़ ज्यादा रही। ग्रामीण क्षेत्रों की कई बैंकों में तो लंबी-लंबी लाइनें लगीं। जमा होने वाले छोटे नोटों से ही कुछ खाताधारकों को भुगतान किया जा सका। सबसे ज्यादा दिक्कत एजीबी की शाखाओं में हुई। 

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जिले में 26 बैंकों की 298 शाखाएं हैं। शुक्रवार को ज्यादातर बैंकों में करेंसी नोट नहीं पहुंचे। एसबीआई और यूनियन बैंक की कुछ शाखाओं में करेंसी पहुंची। शनिवार और रविवार को बैंकों में अवकाश के कारण ज्यादातर बैंकों में पिछले दो दिनों की अपेक्षा भीड़ अधिक रही। करेंसी नोट की कमी के कारण दोपहर बाद नो कैश के बोर्ड लग गए। बैंक ऑफ बड़ौदा शाखा आनंद सिनेमा के मैनेजर आसी वर्मा ने बताया कि तीन दिन पहले करीब 30 लाख रुपया आया था।
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पूरा रुपया बांटा जा चुका है। शुक्रवार को जो रुपया ग्राहकों ने जमा किया उसे ही कुछ खाताधारकों को दिया जा सका। दोपहर बाद कैश खत्म हो गया। सिडिंकेट बैंक अस्पताल रोड में भी कम नोट होने से ग्राहकों को 2 से 5 हजार रुपये ही भुगतान किया गया। मैनेजर अभिनव वर्मा ने बताया कि गुरुवार से कैश नहीं है। ग्राहक को जमा कर रहे हैं उसी से काम चल रहा है।
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सेंट्रल बैंक नवीन गल्ला मंडी के मैनेजर ने बताया कि गुरुवार से ही पैसा नहीं है। आज केवल बडे़ नोट जमा हुए। इससे ग्राहकों को दिए नहीं जा सके। बैंक ऑफ इंडिया रेलवेगंज के मैनेजर ने कहा कि कम पैसा था इससे ग्राहकों को 2 से 3 हजार रुपये का पेेमेंट ही किया जा सका। यूनियन बैंक एमजी रोड के मैनेजर ने बताया कि रुपया निकालने वालों की भीड़ ज्यादा हो गई थी।
इससे करीब 400 खाताधारकों को 6-6 हजार रुपये ही भुगतान किया जा सका। निजी बैंक एचडीएफसी, एक्ससिस बैंक, आईडीबीआई में जरूरत के अनुसार रुपये थे। इन बैंकों के ग्राहकों को ज्यादा दिक्कत नहीं हुई। 

 एलडीएम नवीन कुमार ने बताया कि जैसा कि रिजर्व बैंक के अफसरों से संकेत मिल रहा है, उससे 500-500 रुपये के पर्याप्त नोट जिले में आने की संभावना अभी कम है। जल्द ही जरूरत के मुताबिक नए नोट आएंगे किंतु ये नोट 2000-2000 रुपये के ही ज्यादा होंगे। 

जिले में एसबीआई के 40 एटीएम हैं। मुख्य शाखा प्रबंधक रमेश चंद्रा ने बताया कि हमारी बैंक के सभी एटीएम चालू हैं। सभी में पर्याप्त पैसा भी डाल दिया गया है। लोग अगर जरूरत के अनुसार ही रुपया निकालें तो शनिवार और रविवार को एटीएम चलते रहेंगे। रविवार को पैसा नहीं लोड किया जाएगा। 

नोट बंदी के 17 दिन बाद भी जिले की सभी बैंकों को जरूरत के अनुसार करेंसी नोट नहीं मिल पा रहे हैं। सबसे ज्यादा दिक्कत 69 शाखाओं वाले ग्रामीण बैंक ऑफ आर्यावर्त (एजीबी) में है। ग्रामीण क्षेत्रोें में खुलीं इस बैंक की शाखाओं में शुक्रवार को भी नाममात्र ही करेंसी पहुंची। इससे कई कई घंटे लाइन लगाने के बाद लोग मायूस लौटे।

गुरुवार को एसबीआई मेन ब्रांच और एलडीएम ने एजीबी के लिए 1 करोड़ रुपये की व्यवस्था कराई। शुक्रवार को कुछ ही देर में रुपये बंट गए और बैंकों में नो कैश के नोटिस लगा दिए गए। मैनेजर पीडी मिश्रा ने बताया कि नोटबंदी के बाद से हमारी बैंक को जरूरत के अनुसार करेंसी नोट नहीं मिल पा रहे हैं।


इससे ग्राहकों को लौटना पड़ रहा है। क्षेत्रीय प्रबंधक और अन्य अधिकारी दूसरी बैंकों के संपर्क में हैं। एलडीएम नवीन कुमार ने बताया कि एजीबी की शाखाओं को रुपयों की ज्यादा जरूरत है। जल्द ही एजीबी में करेंसी नोट का संकट दूर कराया जाएगा।

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