फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Hardoi News ›   BSNL 's decision not to approve sharing

बीएसएनएल को बांटने का निर्णय मंजूर नहीं

Thu, 13 Aug 2015 12:14 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई Updated Thu, 13 Aug 2015 12:14 AM IST
विज्ञापन
BSNL 's decision not to approve sharing

बीएसएनएल में नई सहायक कंपनी बनाकर मोबाइल बीटीएस टावर

विज्ञापन
अलग किए जाने को लेकर कर्मचारियों ने मंगलवार को टेलीफोन एक्सचेंज परिसर में विरोध प्रदर्शन कर नारेबाजी की।

फोरम आफ बीएसएनएल यूनियंस एवं एसोसिएशन के जिला संयोजक वाईपी गुप्ता ने कहा कि केंद्र सरकार बीएसएनएल को नष्ट करने पर तुली हुई है और इसके लिए लगातार साजिश कर पूंजीपतियों को लाभ पहुंचा रही है।

इसी क्रम में 5 अगस्त को बीएसएनएल के देश भर में संचालित 65 हजार मोबाइल टावरों को अलग कर सहायक कंपनी बनाने का निर्णय ले लिया। इससे कर्मचारियों एवं यूनियंस में खासा रोष है। इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और इसको लेकर हर स्तर पर विरोध किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि बीएसएनएल को बांटकर खत्म करने का प्रयास कर रही केंद्र सरकार के मंसूबे कर्मचारी अपनी सांस रहने तक पूरे नहीं होने देंगे। उन्होंने कहा कि निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए बीएसएनएल के टुकड़े करने पर अमादा केंद्र सरकार के खिलाफ आम जनता भी आगे आए ताकि देश की सबसे बड़ी सरकारी दूर संचार कंपनी को बचाया जा सके।

इस मौके पर सेवानिवृत्त एसडीई नासिर अली, एमयूखान, जाहिद अली, शैलेंद्र मिश्रा, मनोरमा गुप्ता, राजेश सक्सेना, सुनील त्रिपाठी, प्रहलाद सिंह, मदनपाल, जितेंद्र सिंह आदि मौजूद रहे।

बीएसएनएल की मोबाइल सेवाओं के लिए देश भर में लगे 65 हजार मोबाइल बीटीएस एवं टावरों के प्रबंधन आदि के लिए नई कंपनी बनाकर उसे हैंडओवर करने के प्रस्ताव से कर्मियों में उबाल आ गया है। कर्मचारी नेताओं ने विरोध का ऐलान करते हुए कहा कि नई कंपनी को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

बीएसएनएल इंप्लाइज यूनियन के जिला सचिव वाईपी गुप्ता ने कहा कि केंद्र सरकार ने बीएसएनएल को तोड़ने को नई कंपनी बना देश भर के 65 हजार टावरों एवं मोबाइल बीटीएस नई कंपनी को सौंपने का प्रस्ताव किया है।  प्रस्ताव पर कैबिनेट की स्वीकृति हो गई, पर कर्मचारी स्वीकार नहीं करेंगे, क्योंकि इस समय मोबाइल सेवाएं ही राजस्व का प्रमुख आधार है।

इनके लिए नई कंपनी बनने से बीएसएनएल खोखला हो जाएगा और कर्मियों के सामने वेतन के लाले पड़ जाएंगे। इस बाबत यूनियन के हाईकमान के निर्देशानुसार हर स्तर पर विरोध किया जाएगा और बीएसएनएल को बेंचने की केंद्र सरकार की मंशा को पूरा नहीं होने देंगे।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed