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बोर्ड परीक्षा की पारदर्शिता पर सवाल उठा रहे यह घनघनाते फोन
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हरदोई। बोर्ड परीक्षा में पास कराने के नाम पर रुपये मांगने वाले ठगों के फोन आना बदस्तूर जारी है। सोमवार को भी शहर के सुभाष नगर निवासी एक डाक एजेंट के पास फोना आया। ठग ने उनसे 3500 रुपये की मांग की। उन्होंने मामले की जानकारी डीआईओएस को दी है।
सिविल लाइन्स स्थित डाक खाने में जितेंद्र दीक्षित एजेंट हैं। उनकी बेटी अंजली दीक्षित जीजीआईसी की छात्रा है। उसने इस बार 12 वीं बोर्ड की परीक्षा दी है। जितेंद्र ने बताया कि सोमवार सुबह वह रोज की तरह डाकखाने जाने के लिए निकलने वाले थे कि एक फोन आया और उसने पहले उनका नाम, बेटी का नाम व बोर्ड परीक्षा का अनुक्रमांक बताया। उसने यह भी बताया कि डाटा चढ़ रहा है। उनकी बेटी अंग्रेजी विषय में फेल है। यदि पास कराना चाहते हैं तो 3500 रुपये एकाउंट में भेज दो
। बताया कि उन्होंने इस फोन पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया लेकिन कई लोग सशंकित हो जाते हैं। अगर वास्तव में इन लोगों का बोर्ड से कोई लिंक हुआ। क्योंकि नाम से लेकर रोल नंबर तक यह सब बता रहे हैं। डाटा यदि इन लोगों द्वारा हैक किया गया है तो बोर्ड व संबंधित विभाग को इस ओर कुछ करना चाहिए। यह लोग तो एकाउंट नंबर भी दे रहे हें जिनसे पकड़ हो सकती है। इस संबंध मेें डीआईओएस वीके दुबे का कहना है कि उन्हें जो भी जानकारी अभिभावकों या शिक्षकों द्वारा दी जाती है उसको वह बोर्ड अधिकारियों तक पहुंचा रहे हैं।
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सिविल लाइन्स स्थित डाक खाने में जितेंद्र दीक्षित एजेंट हैं। उनकी बेटी अंजली दीक्षित जीजीआईसी की छात्रा है। उसने इस बार 12 वीं बोर्ड की परीक्षा दी है। जितेंद्र ने बताया कि सोमवार सुबह वह रोज की तरह डाकखाने जाने के लिए निकलने वाले थे कि एक फोन आया और उसने पहले उनका नाम, बेटी का नाम व बोर्ड परीक्षा का अनुक्रमांक बताया। उसने यह भी बताया कि डाटा चढ़ रहा है। उनकी बेटी अंग्रेजी विषय में फेल है। यदि पास कराना चाहते हैं तो 3500 रुपये एकाउंट में भेज दो
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। बताया कि उन्होंने इस फोन पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया लेकिन कई लोग सशंकित हो जाते हैं। अगर वास्तव में इन लोगों का बोर्ड से कोई लिंक हुआ। क्योंकि नाम से लेकर रोल नंबर तक यह सब बता रहे हैं। डाटा यदि इन लोगों द्वारा हैक किया गया है तो बोर्ड व संबंधित विभाग को इस ओर कुछ करना चाहिए। यह लोग तो एकाउंट नंबर भी दे रहे हें जिनसे पकड़ हो सकती है। इस संबंध मेें डीआईओएस वीके दुबे का कहना है कि उन्हें जो भी जानकारी अभिभावकों या शिक्षकों द्वारा दी जाती है उसको वह बोर्ड अधिकारियों तक पहुंचा रहे हैं।
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