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Hardoi News: सीएचसी पर धूल फांक रही बायोकेमेस्ट्री मशीन, जांच कराने भटक रहे मरीज

Sun, 01 Mar 2026 11:08 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 01 Mar 2026 11:08 PM IST
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Biochemistry machine gathering dust at CHC, patients wandering for tests
फोटो- 18- हरियावां सीएचसी ​स्थित ब्लॉक हेल्थ यूनिट पर लगा ताला। संवाद
हरदोई/हरियावां। ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के दावे धरातल पर दम तोड़ते नजर आ रहे हैं। हरियावां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर मरीजों की सहूलियत के लिए बनाई गई पब्लिक हेल्थ यूनिट पर अभी भी ताला जड़ा हुआ है। बायोकेमिस्ट्री मशीन से होने वाली जांचों के लिए मरीजों को जिला मुख्यालय तक 16 किलोमीटर की दौड़ लगानी पड़ रही है जबकि सीएचसी पर बायोकेमिस्ट्री मशीन भी है और संचालन के लिए टेक्नीशियन भी तैनात है।
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स्वास्थ्य सुविधाओं की बेहतरी के लिए सरकार ने सीएचसी पर ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट बनवाई है। सरकार ने 15वें वित्त आयोग की राशि से एक बीपीएचयू पर करीब 48 लाख रुपये खर्च किए हैं। साथ ही करीब आठ से 10 लाख रुपये की बायोकेमिस्ट्री मशीन भी रक्त नमूनों के परीक्षण के लिए लगाई है। जिले में भी तमाम सीएचसी पर बीपीएचयू बनकर तैयार हैं और सभी संसाधन मुहैया कराए जा चुके हैं।
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इसके बाद भी जिम्मेदारों की हीलाहवाली से मरीजों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। हरियावां सीएचसी पर भी ऐसा ही हाल है। बीपीएचयू बने डेढ़ साल होने को है लेकिन संचालन अभी तक नहीं हुआ जबकि बीपीएचयू पर बायोकेमिस्ट्री मशीन आ चुकी है और लैब टेक्नीशियन भी तैनात है। मरीजों को थायराइड, लिपिड प्रोफाइल, यूरिक एसिड, लिवर फंक्शन टेस्ट, किडनी फंक्शन टेस्ट जैसी जांचों के लिए जिला मुख्यालय आना पड़ रहा है।
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सिर्फ किट के भरोसे हो रहीं जांचें

हरियावां सीएचसी में सिर्फ वही जांचें हो रही हैं जो साधारण किट के माध्यम से संभव हैं। इनमें सीबीसी, मलेरिया, हीमोग्लोबिन, शुगर, टाइफाइड और यूरिन प्रेग्नेंसी टेस्ट ही हो पाते हैं। गंभीर बीमारियों की पहचान और रक्त के विस्तृत विश्लेषण के लिए आवश्यक बायोकेमिस्ट्री मशीन को चालू नहीं कराया जा रहा है।


रोजाना 40 से 45 मरीजों की हो पाती जांच

हरियावां सीएचसी पर हर रोज 150 से 200 के करीब मरीज उपचार कराने पहुंचते हैं। इनमें सिर्फ 40 से 45 मरीजों की साधारण जांच होती है जबकि गंभीर मरीजों को उपचार के लिए जांच कराना होता है तो उन्हें जिला मुख्यालय तक ही आना पड़ता है। जो जांचें अस्पताल रियायती दरों पर होनी चाहिए उनके लिए क्षेत्र के मरीजों को समय और पैसा दोनों बर्बाद करना पड़ रहा है।



वर्जन

बायोकेमिस्ट्री मशीन को चलाने के लिए लगातार प्रयास किया जा रहा है। कभी टेक्नीशियन तो कभी बिजली की समस्या के चलते समस्या बनी हुई है। उच्चाधिकारियों से बात करके जल्द ही मशीन को चालू करवाया जाएगा। ताकि क्षेत्र के मरीजों को परेशान न होना पड़े। -डॉ. अंकुर अवस्थी,
अधीक्षक, सीएचसी हरियावां
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