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अनजानों के 3,125 बने फरिश्ते, जोड़ा खून का रिश्ता
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई
Updated Fri, 20 Mar 2015 12:44 AM IST
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खून क ा रिश्ता दुनिया का सबसे अटूट बंधन माना जाता
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है और अपनी रगों में घुले खून के चंद कतरे दान करके ऐसे अनजाने लोगों से भी
खून का रिश्ता कायम किया जा सकता है, जो जरूरत के वक्त खून के एक एक कतरे
को तड़पते हैं। जिले में 11 माह में 3125 लोगों ने सोच कर अपना लहू दूसरों
की जान बचाने को दिया।
यह कहें कि अस्पताल को 3125 फरिश्ते मिले तो अतिशयोक्ति न होगी। रक्त जिंदगी का आधार है। हवा न मिले तो संसार चंद मिनटोंतक तड़प कर तो जी सकता है लेकिन यदि रक्त न मिले या रक्त का प्रवाह न बनने की प्रणाली काम करना बंद कर दे तो इंसान की मौत और भी दर्दनाक होती है।
जिंदगी का यह अनमोल रत्न हर किसी के अंदर भगवान ने प्रवाहित किया है। जरूरतमंद लोगों की मदद रक्तदान कर की जा सकती है। यह हम आप ही नहीं, बल्कि जिले के 3125 लोग भी जानते हैं, जो वर्ष 14-15 के मध्य ब्लड बैंक पहुंचकर अपना रक्त दूसरों की जान बचाने को दान कर चुके हैं।
लैब टेक्नीशियन मो. अकील खान ने बताया कि इस रक्तदान की संख्या में वह लोग भी शामिल हैं, जो अपनों की जान बचाने को रक्तदान करते हैं, पर सच तो यह भी है कि इन लोगों में भी अपनों की जान बचाने को जज्बा होता है। इसके अलावा वह लोग जो कैंपों में रक्तदान करते हैं, उनको यह भी नहीं मालूम कि आखिर रक्त किसको जाएगा।
उनके जज्बे की बात करें तो वास्तव में यह महादान ही है। कुल मिलाकर कहना गलत नहीं होगा कि जिले में दूसरों की जान बचाने को लोगों में जागरूकता आई है। उधर, अनजानों की जान बचाने को जिले की कई संस्थाएं भी इस वित्तीय वर्ष आगे आई हैं।
जिसके चलते एक दो नहीं, बल्कि इस वित्तीय वर्ष में 17 संस्थाओं ने रक्तदान शिविर लगवाकर सैकड़ाें की संख्या में रक्तदान करवाया और कई की उखड़ती सांसों को संभालने का काम किया है। उधर, उत्तर प्रदेश राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी द्वारा यूपी के दो जिले केे साथ ही इस जनपद को भी मेजर ब्लड बैंक की सौगात मिल चुकी है।
एड्स नियंत्रण विभाग, भारत सरकार द्वारा वर्ष 14 में यूपी की तीन ब्लड बैंकों को उच्चीकृत कर मेजर ब्लड बैंक का दर्जा प्रदान कर दिया गया है, जिसमें बुलंदशहर, ललितपुर व हरदोई की ब्लड बैंक शामिल हैं। शीघ्र ही यहां की ब्लड बैंक की क्षमता बढ़ाने के साथ ही जिले की ब्लड बैंक को वह सुविधाएं प्रदान की जाएंगी, जो आस पास जिलों की ब्लड बैंकों में भी नहीं है।
यह कहें कि अस्पताल को 3125 फरिश्ते मिले तो अतिशयोक्ति न होगी। रक्त जिंदगी का आधार है। हवा न मिले तो संसार चंद मिनटोंतक तड़प कर तो जी सकता है लेकिन यदि रक्त न मिले या रक्त का प्रवाह न बनने की प्रणाली काम करना बंद कर दे तो इंसान की मौत और भी दर्दनाक होती है।
जिंदगी का यह अनमोल रत्न हर किसी के अंदर भगवान ने प्रवाहित किया है। जरूरतमंद लोगों की मदद रक्तदान कर की जा सकती है। यह हम आप ही नहीं, बल्कि जिले के 3125 लोग भी जानते हैं, जो वर्ष 14-15 के मध्य ब्लड बैंक पहुंचकर अपना रक्त दूसरों की जान बचाने को दान कर चुके हैं।
लैब टेक्नीशियन मो. अकील खान ने बताया कि इस रक्तदान की संख्या में वह लोग भी शामिल हैं, जो अपनों की जान बचाने को रक्तदान करते हैं, पर सच तो यह भी है कि इन लोगों में भी अपनों की जान बचाने को जज्बा होता है। इसके अलावा वह लोग जो कैंपों में रक्तदान करते हैं, उनको यह भी नहीं मालूम कि आखिर रक्त किसको जाएगा।
उनके जज्बे की बात करें तो वास्तव में यह महादान ही है। कुल मिलाकर कहना गलत नहीं होगा कि जिले में दूसरों की जान बचाने को लोगों में जागरूकता आई है। उधर, अनजानों की जान बचाने को जिले की कई संस्थाएं भी इस वित्तीय वर्ष आगे आई हैं।
जिसके चलते एक दो नहीं, बल्कि इस वित्तीय वर्ष में 17 संस्थाओं ने रक्तदान शिविर लगवाकर सैकड़ाें की संख्या में रक्तदान करवाया और कई की उखड़ती सांसों को संभालने का काम किया है। उधर, उत्तर प्रदेश राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी द्वारा यूपी के दो जिले केे साथ ही इस जनपद को भी मेजर ब्लड बैंक की सौगात मिल चुकी है।
एड्स नियंत्रण विभाग, भारत सरकार द्वारा वर्ष 14 में यूपी की तीन ब्लड बैंकों को उच्चीकृत कर मेजर ब्लड बैंक का दर्जा प्रदान कर दिया गया है, जिसमें बुलंदशहर, ललितपुर व हरदोई की ब्लड बैंक शामिल हैं। शीघ्र ही यहां की ब्लड बैंक की क्षमता बढ़ाने के साथ ही जिले की ब्लड बैंक को वह सुविधाएं प्रदान की जाएंगी, जो आस पास जिलों की ब्लड बैंकों में भी नहीं है।