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Hardoi News: लॉकडाउन में बनाया समूह, दुकान से तय किया आत्मनिर्भरता का सफर
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फोटो 23: परचून की दुकान का संचालन करतीं राजश्री। स्रोत : स्वयं
शाहाबाद के इशेपुर की राजश्री ने गांव की महिलाओं को जोड़कर बनाया समूह
दुकान संचालन से परिवार की बढ़ी आमदनी और भी कारोबार को गति देने का संकल्प
संवाद न्यूज एजेंसी
हरदोई। शाहाबाद की ग्राम पंचायत धियरई के मजरा इशेपुर की राजश्री ने कोविड-19 में लगे लॉकडाउन में खाली समय का सदुपयोग कर समूह बनाया। गांव की 10 महिलाओं को जोड़कर स्वयं सहायता समूह बनाया और बचत की आदत डाली। उप्र राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से समूह को जोड़ने के साथ ही उन्होंने आत्मनिर्भर बनने के लिए स्वरोजगार का रास्ता चुना।
इशेपुर निवासी राजश्री ने बताया कि वह इंटरमीडिएट तक पढ़ी हैं। शादी के बाद ससुराल आ गईं। यहां पर पति सतीश चंद्र खेती किसानी करते हैं। खेती-किसानी और घर के कामकाज से बचे समय के सदुपयोग के लिए गांव की दस महिलाओं को जोड़कर ज्योति महिला आजीविका स्वयं सहायता समूह बनाया। साल-2020 में लॉकडाउन के दौरान गांव में भी कोई कामकाज खास नहीं बचा था, इससे हम सभी के पास समय-समय ही था। लॉकडाउन में खाली समय को देखते हुए अपना स्वरोजगार स्थापित करने का मन बनाया।
बताया कि समूह की महिलाओं को बचत की आदत डाली। इसी के साथ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की तरफ से मिलने वाली आर्थिक मदद से परचून की दुकान संचालित किए जाने की रणनीति बनाई। खुद के रुपये के साथ ही समूह से रुपये लेकर परचून की दुकान संचालित की। दुकान संचालन से आमदनी बढ़ी है। इससे परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है।
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शाहाबाद के इशेपुर की राजश्री ने गांव की महिलाओं को जोड़कर बनाया समूह
दुकान संचालन से परिवार की बढ़ी आमदनी और भी कारोबार को गति देने का संकल्प
संवाद न्यूज एजेंसी
हरदोई। शाहाबाद की ग्राम पंचायत धियरई के मजरा इशेपुर की राजश्री ने कोविड-19 में लगे लॉकडाउन में खाली समय का सदुपयोग कर समूह बनाया। गांव की 10 महिलाओं को जोड़कर स्वयं सहायता समूह बनाया और बचत की आदत डाली। उप्र राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से समूह को जोड़ने के साथ ही उन्होंने आत्मनिर्भर बनने के लिए स्वरोजगार का रास्ता चुना।
इशेपुर निवासी राजश्री ने बताया कि वह इंटरमीडिएट तक पढ़ी हैं। शादी के बाद ससुराल आ गईं। यहां पर पति सतीश चंद्र खेती किसानी करते हैं। खेती-किसानी और घर के कामकाज से बचे समय के सदुपयोग के लिए गांव की दस महिलाओं को जोड़कर ज्योति महिला आजीविका स्वयं सहायता समूह बनाया। साल-2020 में लॉकडाउन के दौरान गांव में भी कोई कामकाज खास नहीं बचा था, इससे हम सभी के पास समय-समय ही था। लॉकडाउन में खाली समय को देखते हुए अपना स्वरोजगार स्थापित करने का मन बनाया।
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बताया कि समूह की महिलाओं को बचत की आदत डाली। इसी के साथ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की तरफ से मिलने वाली आर्थिक मदद से परचून की दुकान संचालित किए जाने की रणनीति बनाई। खुद के रुपये के साथ ही समूह से रुपये लेकर परचून की दुकान संचालित की। दुकान संचालन से आमदनी बढ़ी है। इससे परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है।
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