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समितियों पर बजट का संकट, नहीं पहुंची खाद
Hardoi
Updated Sun, 26 Oct 2014 05:32 AM IST
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हरदोई/पाली। रबी की बुआई का सीजन शुरू हो चुका है, पर जिले में सभी विक्रय केंद्रों तक खाद नहीं पहुंची है, जिससे अबकी भी किसानों को खाद की किल्लत का सामना करने की संभावनाएं बन सकती हैं। हालांकि, कृषि विभाग का दावा है कि पर्याप्त मात्रा में खाद बीज मुहैया है और सभी विक्रय केंद्रों पर भी खाद की उपलब्धता हो जाएगी। विभाग की माने तो इस बार खाद की किल्लत नहीं होगी।
ज्ञात हो कि पिछले वर्ष किसानों को खाद के लिए काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। गत वर्ष रबी की फसलों के लिए किसानों को खाद खास तौर से डीएपी तथा यूरिया खाद के लिए लाइन लगानी पड़ी थी और समय से खाद के अभाव में बहुत से किसानों को बिना खाद के ही बुआई करनी पड़ी थी। इस बार कृषि विभाग द्वारा किसानों को खाद बीज की किल्लत से बचाने को विशेष प्रयास किए गए हैं। हालांकि, अभी सभी सरकारी विक्रय केंद्रों पर खाद मुहैया नहीं हैं, पर माना जा रहा है कि रबी सीजन के पीक पर पहुंचने से पहले खाद की भरपूर उपलब्धता सभी विक्रय केंद्रों तक हो जाएगी।
कृषि विभाग के अफसरों का कहना है कि निजी क्षेत्र की दुकानों पर भी खाद मुहैया है। यह अलग बात है कि अगर पर्याप्त मात्रा में खाद की उपलब्धता नहीं हो पाई तो किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा। उधर, भरखनी विकास खंड के किसानों को खाद वितरित करने के लिए 15 सहकारी समितियां खोली गई थीं, पर इनमें 7 समितियां आमतारा, गिरधरपुर, धसा, सराय राघव, कूड़ी, असमधा, अनंगपुर, खितौली, चकौती ही किसी तरह चल रही है। अन्य समितियां आर्थिक कमी के चलते बंद हो गई। कोआपरेटिव बैंक के शाखा प्रबंधक राकेश शुक्ला ने बताया कि समितियां घाटे में हैं, बैंक को इसके लिए धन मुहैया नहीं कराया गया।
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बताया कि शासन से बजट मिलने पर ही समितियों को पुनर्जीवित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि बीज और खाद के लिए अभी तक किसी भी समिति के सचिव ने ड्राफ्ट नहीं किया है, जिससे खाद और बीज समितियों पर नहीं भेजा गया। उधर, साधन सहकारी समिति खारा कुंआ के सचिव अश्वनी शुक्ला का कहना है कि पैसा न होने के कारण वह खाद नहीं मंगा पा रहे। उन्होंनेे कहा कि समिति के सदस्यों से अग्रिम धन लेकर खाद व बीज मुहैया कराने की प्रक्रिया है, इसके लिए वह प्रयासरत हैं।
इंसेट---
साढ़े तीन लाख हेक्टेयर में होगी रबी फसल
हरदोई। अबकी करीब 3.5 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में रबी की फसलों की बुआई का लक्ष्य है, जिसमें 3 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में गेहूं की फसल होगी। जब शेष क्षेत्रफल में आलू, तिलहन, दलहन आदि की फसलें होंगी।
इंसेट---
खाद की उपलब्धता---
यूरिया-लक्ष्य-68 हजार एमटी, उपलब्धता 37 फीसदी एमटी, डीएपी-32 हजार-30 प्रतिशत, एनपीके-6000, 85 प्रतिशत, एमओपी-1100-शत प्रतिशत
इंसेट---
‘इस समय जिले में कृषक सेवा केंद्रों और निजी दुकानाें पर खाद तथा सभी ब्लाक गोदामों पर बीज मुहैया हैं। जिले में किसी प्रकार से खाद बीज की कमी नहीं होने दी जाएगी और लगातार क्रम में जिले में खाद मुहैया होती रहेगी। सभी विक्रय सेंटरों एवं समितियों से खाद विक्रय को जरूरी प्रबंध किए जा रहे हैं। लक्ष्य के अनुसार उर्वरकों की शत प्रतिशत उपलब्धता जिले मेें रहेगी, जैसे-जैसे बुआई का सीजन तेजी पकड़ने के साथ खाद की मांग बढ़ेगी उससे कहीं ज्यादा तेजी के साथ जिले में खाद की रैकें आती रहेंगी। खाद बीज की कोई कमी नहीं होगी।’ डा. वीके यादव, जिला कृषि अधिकारी
इंसेट---
बोले किसान, सूख गई खरीफ की फसल
पाली। प्रगतिशील कृषक विजय मिश्र ने बताया कि बरसात न होने से खरीफ की फसल सूख गई। अब खेत बुआई को तैयार हैं, पर उन्हें प्रमाणित बीज को भटकना पड़ रहा है। बीज न मिलने से फसल पिछड़ रही है। कृषक जोरावर सिंह यादव ने बताया कि खरीफ में कुछ नहीं मिला मिला, तो बस महाजनी कर्ज, अब खेत तैयार हैं, पर सरकारी खाद बीज संस्थानों में प्रमाणित बीज गायब है। समय से बुआई न हो पाई तो उनका परिवार दो जून की रोटी को मोहताज हो जाएगा। कहा कि नेताओं को राजनीति नहीं, बल्कि किसान नीति बनाकर अन्नदाता को मजबूत करना होगा। कुछ इसी तरह से ग्राम पचदेवरा निवासी गंगा सागर मिश्रा, शिवा मिश्रा, अकोढ़ा के राकेश शुक्ला, बाबरपुर के पंडित सत्य स्वरूप मिश्रा, विदुर त्रिवेदी, मनोज मिश्रा, दिलीप कुमार, मनोज पांडेय, ऋषीकांत, श्रीकांत, कमलेश कुमार, शिवरतन पांडेय, रामरतन आदि ने खाद व बीज न मिलने पर रोष जताया।
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ज्ञात हो कि पिछले वर्ष किसानों को खाद के लिए काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। गत वर्ष रबी की फसलों के लिए किसानों को खाद खास तौर से डीएपी तथा यूरिया खाद के लिए लाइन लगानी पड़ी थी और समय से खाद के अभाव में बहुत से किसानों को बिना खाद के ही बुआई करनी पड़ी थी। इस बार कृषि विभाग द्वारा किसानों को खाद बीज की किल्लत से बचाने को विशेष प्रयास किए गए हैं। हालांकि, अभी सभी सरकारी विक्रय केंद्रों पर खाद मुहैया नहीं हैं, पर माना जा रहा है कि रबी सीजन के पीक पर पहुंचने से पहले खाद की भरपूर उपलब्धता सभी विक्रय केंद्रों तक हो जाएगी।
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कृषि विभाग के अफसरों का कहना है कि निजी क्षेत्र की दुकानों पर भी खाद मुहैया है। यह अलग बात है कि अगर पर्याप्त मात्रा में खाद की उपलब्धता नहीं हो पाई तो किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा। उधर, भरखनी विकास खंड के किसानों को खाद वितरित करने के लिए 15 सहकारी समितियां खोली गई थीं, पर इनमें 7 समितियां आमतारा, गिरधरपुर, धसा, सराय राघव, कूड़ी, असमधा, अनंगपुर, खितौली, चकौती ही किसी तरह चल रही है। अन्य समितियां आर्थिक कमी के चलते बंद हो गई। कोआपरेटिव बैंक के शाखा प्रबंधक राकेश शुक्ला ने बताया कि समितियां घाटे में हैं, बैंक को इसके लिए धन मुहैया नहीं कराया गया।
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बताया कि शासन से बजट मिलने पर ही समितियों को पुनर्जीवित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि बीज और खाद के लिए अभी तक किसी भी समिति के सचिव ने ड्राफ्ट नहीं किया है, जिससे खाद और बीज समितियों पर नहीं भेजा गया। उधर, साधन सहकारी समिति खारा कुंआ के सचिव अश्वनी शुक्ला का कहना है कि पैसा न होने के कारण वह खाद नहीं मंगा पा रहे। उन्होंनेे कहा कि समिति के सदस्यों से अग्रिम धन लेकर खाद व बीज मुहैया कराने की प्रक्रिया है, इसके लिए वह प्रयासरत हैं।
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साढ़े तीन लाख हेक्टेयर में होगी रबी फसल
हरदोई। अबकी करीब 3.5 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में रबी की फसलों की बुआई का लक्ष्य है, जिसमें 3 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में गेहूं की फसल होगी। जब शेष क्षेत्रफल में आलू, तिलहन, दलहन आदि की फसलें होंगी।
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खाद की उपलब्धता---
यूरिया-लक्ष्य-68 हजार एमटी, उपलब्धता 37 फीसदी एमटी, डीएपी-32 हजार-30 प्रतिशत, एनपीके-6000, 85 प्रतिशत, एमओपी-1100-शत प्रतिशत
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‘इस समय जिले में कृषक सेवा केंद्रों और निजी दुकानाें पर खाद तथा सभी ब्लाक गोदामों पर बीज मुहैया हैं। जिले में किसी प्रकार से खाद बीज की कमी नहीं होने दी जाएगी और लगातार क्रम में जिले में खाद मुहैया होती रहेगी। सभी विक्रय सेंटरों एवं समितियों से खाद विक्रय को जरूरी प्रबंध किए जा रहे हैं। लक्ष्य के अनुसार उर्वरकों की शत प्रतिशत उपलब्धता जिले मेें रहेगी, जैसे-जैसे बुआई का सीजन तेजी पकड़ने के साथ खाद की मांग बढ़ेगी उससे कहीं ज्यादा तेजी के साथ जिले में खाद की रैकें आती रहेंगी। खाद बीज की कोई कमी नहीं होगी।’ डा. वीके यादव, जिला कृषि अधिकारी
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बोले किसान, सूख गई खरीफ की फसल
पाली। प्रगतिशील कृषक विजय मिश्र ने बताया कि बरसात न होने से खरीफ की फसल सूख गई। अब खेत बुआई को तैयार हैं, पर उन्हें प्रमाणित बीज को भटकना पड़ रहा है। बीज न मिलने से फसल पिछड़ रही है। कृषक जोरावर सिंह यादव ने बताया कि खरीफ में कुछ नहीं मिला मिला, तो बस महाजनी कर्ज, अब खेत तैयार हैं, पर सरकारी खाद बीज संस्थानों में प्रमाणित बीज गायब है। समय से बुआई न हो पाई तो उनका परिवार दो जून की रोटी को मोहताज हो जाएगा। कहा कि नेताओं को राजनीति नहीं, बल्कि किसान नीति बनाकर अन्नदाता को मजबूत करना होगा। कुछ इसी तरह से ग्राम पचदेवरा निवासी गंगा सागर मिश्रा, शिवा मिश्रा, अकोढ़ा के राकेश शुक्ला, बाबरपुर के पंडित सत्य स्वरूप मिश्रा, विदुर त्रिवेदी, मनोज मिश्रा, दिलीप कुमार, मनोज पांडेय, ऋषीकांत, श्रीकांत, कमलेश कुमार, शिवरतन पांडेय, रामरतन आदि ने खाद व बीज न मिलने पर रोष जताया।