{"_id":"37-197920","slug":"Hardoi-197920-37","type":"story","status":"publish","title_hn":"हेल्दी किचन देगा बच्चों को पोषण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हेल्दी किचन देगा बच्चों को पोषण
Hardoi
Updated Tue, 16 Sep 2014 05:31 AM IST
विज्ञापन
हरदोई। कहते हैं बेहतर आहार के लिए किचन भी हेल्दी होना चाहिए, तभी स्वास्थ्य का भी पोषण हो सकेगा। कुपोषित बच्चों के मामले में तो ऐसे पर्यावरण पर और अधिक ध्यान दिया जाना जरूरी है। जिले में भी कुपोषित बच्चों को पोषण देने के लिए पोषण पुनर्वास केंद्र का संचालन हो रहा, जिसमें भी अब रसोईघर को बेहतर बनाया गया। इतना ही नहीं बच्चों को दिए जाने वाले आहार के संबंध में दिशा निर्देश भी चस्पा कर दिए गए, ताकि बच्चों को मिलने वाले आहार के बारे में उनके परिजनों को भी जानकारी हो सके।
कुपोषण के बढ़ते मामलों को देखते हुए केंद्र सरकार के निर्देश पर जिले में पोषण पुनर्वास केंद्र का संचालन किया गया। स्वास्थ्य विभाग व बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के सह समन्वयक से संचालित किए गए पोषण पुनर्वास केंद्र पर बच्चों को लाने की जिम्मेदारी आईसीडीएस विभाग को सौंपी गई है, जबकि बच्चों की देखरेख करना और उनके इलाज का जिम्मा स्वास्थ्य विभाग को मिला। ज्ञात हो कि करीब डेढ़ वर्ष पहले संचालित किए गए पोषण पुनर्वास केंद्र पर कैलेंडर के अनुसार हर 14 दिनों पर बच्चे लाए जाते हैं, जहां उनका इलाज होता है।
संचालन से अभी तक करीब दो सौ बच्चों का इलाज किया जा चुका है। पोषण पुनर्वास केंद्र पर आने वाले बच्चों के लिए शुरू से अभी तक केंद्र से ही डाइट दी गई है जिसको तैयार करने के लिए रसोइए की नियुक्ति की गई। वैसे तो बच्चों को केंद्र से ही भोजन पकाकर दिया जाता रहा है, लेकिन अब पोषण पुनर्वास केंद्र के किचन और अधिक बेहतर बनाया गया। स्टाफ नर्स रुचि त्रिवेदी ने बताया गया कि बच्चों के लिए उनकी डाइट के अनुसार ही भोजन दिया जाता है, जिसको केंद्र पर ही पकाया जाता है।
विज्ञापन
इंसेट---
बच्चों को इस प्रकार दिया जाता भोजन
हरदोई। कुपोषित बच्चों की डाइट भर्ती के समय ही तय कर दी जाती है, जो तीन प्रकार की होती है। 14 दिनों की भर्ती के दौरान कुपोषित बच्चों का एपेटाइट टेस्ट होता है। जिसके अनुसार बच्चों को एफ-100 व एफ-75 प्रकार की डाइट बनाई जाती है। अतिकुपोषण पर एफ-100 डाइट दी जाती है, जिसमेें बच्चे को 900 एमएल दूध, 20 एमएल वेजीटेबल ऑयल व 100 एमएल पानी दिया जाता है, जबकि कुपोषण की मात्रा कम होने पर एफ-75 की डाइट में दूध व चीनी तथा लाई का पाउडर खाने को दिया जाता है, जबकि भर्ती के 11वें दिन से जब बच्चों की सेहत बेहतर होने लगती है, तो उनको खिचड़ी व हलवा खाने को दिया जाता है।
इंसेट---
भर्ती कराने के प्रति गंभीर नहीं जिम्मेदार
हरदोई। पोषण पुनर्वास केंद्र पर 10 बेडों का एक वार्ड बनाया गया है, जिसमें बच्चों को भर्ती कराने को एक कैलेंडर बनाया गया है। उसी कैलेंडर के अनुसार बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग को बच्चों को भर्ती कराने के जिम्मेदारी दी गई। हर 14 दिनों पर सीडीपीओ को अपने क्षेत्र के 10 बच्चों को भर्ती कराया जाना है, पर सीडीपीओ से लेकर सुपरवाइजर इस कार्य में लापरवाही बरत रही हैं, जिससे केंद्र पर बेड खाली पड़े रहते हैं। मौजूदा समय में भी सिर्फ छह बच्चे ही भर्ती हैं। बताया जा रहा कि बच्चों को उनकी आयु के अनुसार पोषाहार की मात्रा दी जाती है, जो सबकी अलग-अलग है।
विज्ञापन
कुपोषण के बढ़ते मामलों को देखते हुए केंद्र सरकार के निर्देश पर जिले में पोषण पुनर्वास केंद्र का संचालन किया गया। स्वास्थ्य विभाग व बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के सह समन्वयक से संचालित किए गए पोषण पुनर्वास केंद्र पर बच्चों को लाने की जिम्मेदारी आईसीडीएस विभाग को सौंपी गई है, जबकि बच्चों की देखरेख करना और उनके इलाज का जिम्मा स्वास्थ्य विभाग को मिला। ज्ञात हो कि करीब डेढ़ वर्ष पहले संचालित किए गए पोषण पुनर्वास केंद्र पर कैलेंडर के अनुसार हर 14 दिनों पर बच्चे लाए जाते हैं, जहां उनका इलाज होता है।
विज्ञापन
संचालन से अभी तक करीब दो सौ बच्चों का इलाज किया जा चुका है। पोषण पुनर्वास केंद्र पर आने वाले बच्चों के लिए शुरू से अभी तक केंद्र से ही डाइट दी गई है जिसको तैयार करने के लिए रसोइए की नियुक्ति की गई। वैसे तो बच्चों को केंद्र से ही भोजन पकाकर दिया जाता रहा है, लेकिन अब पोषण पुनर्वास केंद्र के किचन और अधिक बेहतर बनाया गया। स्टाफ नर्स रुचि त्रिवेदी ने बताया गया कि बच्चों के लिए उनकी डाइट के अनुसार ही भोजन दिया जाता है, जिसको केंद्र पर ही पकाया जाता है।
विज्ञापन
इंसेट---
बच्चों को इस प्रकार दिया जाता भोजन
हरदोई। कुपोषित बच्चों की डाइट भर्ती के समय ही तय कर दी जाती है, जो तीन प्रकार की होती है। 14 दिनों की भर्ती के दौरान कुपोषित बच्चों का एपेटाइट टेस्ट होता है। जिसके अनुसार बच्चों को एफ-100 व एफ-75 प्रकार की डाइट बनाई जाती है। अतिकुपोषण पर एफ-100 डाइट दी जाती है, जिसमेें बच्चे को 900 एमएल दूध, 20 एमएल वेजीटेबल ऑयल व 100 एमएल पानी दिया जाता है, जबकि कुपोषण की मात्रा कम होने पर एफ-75 की डाइट में दूध व चीनी तथा लाई का पाउडर खाने को दिया जाता है, जबकि भर्ती के 11वें दिन से जब बच्चों की सेहत बेहतर होने लगती है, तो उनको खिचड़ी व हलवा खाने को दिया जाता है।
इंसेट---
भर्ती कराने के प्रति गंभीर नहीं जिम्मेदार
हरदोई। पोषण पुनर्वास केंद्र पर 10 बेडों का एक वार्ड बनाया गया है, जिसमें बच्चों को भर्ती कराने को एक कैलेंडर बनाया गया है। उसी कैलेंडर के अनुसार बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग को बच्चों को भर्ती कराने के जिम्मेदारी दी गई। हर 14 दिनों पर सीडीपीओ को अपने क्षेत्र के 10 बच्चों को भर्ती कराया जाना है, पर सीडीपीओ से लेकर सुपरवाइजर इस कार्य में लापरवाही बरत रही हैं, जिससे केंद्र पर बेड खाली पड़े रहते हैं। मौजूदा समय में भी सिर्फ छह बच्चे ही भर्ती हैं। बताया जा रहा कि बच्चों को उनकी आयु के अनुसार पोषाहार की मात्रा दी जाती है, जो सबकी अलग-अलग है।