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एक लाख वैक्सीन और आईं
Hardoi
Updated Tue, 13 Aug 2013 05:35 AM IST
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हरदोई। जिले के कई ब्लाकों के गांवों से गई शिकायतों के बाद पशुपालन निदेशालय ने दो लाख वैक्सीन के बाद एक लाख एफएमडी यानी फु ट एंड माउथ डिजीज वैक्सीन जिले को और उपलब्ध करा दी है।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. राजेश मोहन दीक्षित ने बताया कि बारिश का सीजन शुरू होते ही जिले में एफएमडी का टीकाकरण शुरू करा दिया गया था। जिले को एफएमडी की दो लाख से अधिक वैक्सीन उपलब्ध कराई गई थी जिसे चिकित्सालय वार लक्ष्य साधकर वितरित किया गया था तथा पशुओं के समय रहते लगवाने के निर्देश दिए गए थे। अब एक बार फिर से निदेशालय की ओर से जिले को एक लाख से अधिक एफएमडी की वैक्सीन उपलब्ध कराई गई है। जिसे पशु चिकित्सालयों को वितरित किया जा रहा है। उन्होंने एफएमडी यानी फु ट एंड माउथ डिजीज को खुरपका व मुंहपका के नाम से जाना जाता है। यह एक संक्रामक रोग है।
जो रोगग्रस्त पशुओं से स्वस्थ पशुओं में केवल संपर्क से ही नहीं वरन चारा, दाना, पानी आदि से भी फैलता है। इसमें मृत्यु की संभावना तो कम रहती है परंतु मादा पशुओं का दुग्ध उत्पादन, उनकी गर्भधारण क्षमता और बैलों व भैंसों के कार्य करने की क्षमता पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। सीवीओ ने बताया कि अचानक तेज बुखार आने पर पशु बेचैन रहता हो। खाना-पीना बंद कर देता हो और उसका दूध भी घट जाता हो। मसूढ़े, जीभ और खुरों में छाले निकल रहे हो और फूटने से घाव बन जाते हों तो यह सभी खुरपका व मुंहपका के लक्षण हैं। इसकी रोकथाम के लिए पशुओं को नियमित रूप से टीका लगवाना चाहिए।
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मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. राजेश मोहन दीक्षित ने बताया कि बारिश का सीजन शुरू होते ही जिले में एफएमडी का टीकाकरण शुरू करा दिया गया था। जिले को एफएमडी की दो लाख से अधिक वैक्सीन उपलब्ध कराई गई थी जिसे चिकित्सालय वार लक्ष्य साधकर वितरित किया गया था तथा पशुओं के समय रहते लगवाने के निर्देश दिए गए थे। अब एक बार फिर से निदेशालय की ओर से जिले को एक लाख से अधिक एफएमडी की वैक्सीन उपलब्ध कराई गई है। जिसे पशु चिकित्सालयों को वितरित किया जा रहा है। उन्होंने एफएमडी यानी फु ट एंड माउथ डिजीज को खुरपका व मुंहपका के नाम से जाना जाता है। यह एक संक्रामक रोग है।
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जो रोगग्रस्त पशुओं से स्वस्थ पशुओं में केवल संपर्क से ही नहीं वरन चारा, दाना, पानी आदि से भी फैलता है। इसमें मृत्यु की संभावना तो कम रहती है परंतु मादा पशुओं का दुग्ध उत्पादन, उनकी गर्भधारण क्षमता और बैलों व भैंसों के कार्य करने की क्षमता पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। सीवीओ ने बताया कि अचानक तेज बुखार आने पर पशु बेचैन रहता हो। खाना-पीना बंद कर देता हो और उसका दूध भी घट जाता हो। मसूढ़े, जीभ और खुरों में छाले निकल रहे हो और फूटने से घाव बन जाते हों तो यह सभी खुरपका व मुंहपका के लक्षण हैं। इसकी रोकथाम के लिए पशुओं को नियमित रूप से टीका लगवाना चाहिए।
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