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त्योहारों के मोती जीवन में पिरोते हैं संस्कारों की माला-किरीट महाराज
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हरदोई। प्रत्येक त्योहार संस्कार रूपी मोती समान हैं और यही त्योहार एक साथ मिलकर नई पीढ़ी को संस्कारों की माला के रूप में प्राप्त होते हैं और हमारे जीवन में संस्कार डालते हैं। इसलिए कोशिश करें कि त्योहार अपने परिवार के साथ और पूरे उत्साह से मनाएं। ये बात नघेटा रोड स्थित बाल विद्या भवन में आयोजित होली महोत्सव में गुरु किरीट महाराज ने कही।
आध्यात्मिक होली महोत्सव समिति की ओर से आयोजित होली मिलन महोत्सव में उन्होंने भक्तों को होली का महत्व बताते हुए कहा कि होली प्रेम व सद्भावना का पर्व है। इस पर्व को बड़े ही उत्साह के साथ मानना चाहिए। पर्व के उत्सव में यदि उत्साह नहीं है तो यह नीरस हो जाता है। जीवन को रंगों से भरा हुआ होना चाहिए। यदि जीवन में रंग नहीं है तो जीवन रंगहीन हो जाता है। लोगों का कहना होता है कि हमारी संतानें बिगड़ रही हैं। उन अभिभावकों को हमारा यही संदेश है कि संतान को प्रेम मिले, वात्सल्य मिले, माता-पिता का साथ मिले। तो वह मोबाइल टेलीविजन आदि में अपना समय नहीं व्यतीत करेंगे और उनमें संस्कार बने रहेंगे। उन्होंने कहा कि पानी और रंग की अपेक्षा फूलों से होली खेलनी चाहिए, जिससे वातावरण भी स्वच्छ रहता है। 25 मार्च को फॉग होली खेली जाएगी। इस मौके पर अतुल कपूर, सजीव अग्रवाल, मुकेश अग्रवाल, राकेश अग्रवाल, अनूप पुरी, अपूर्व माहेश्वरी, गिरीश डिडवानिया, नरेश गोयल, दीपक महिंद्रा आदि मौजूद रहे।
अध्यात्मिक होली महोत्सव समिति की ओर से बताया गया कि जिले में पहली बार आध्यात्मिक होली महोत्सव मनाया जा रहा है। कोशिश की जाएगी कि यह हर वर्ष मनाया जाए।
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गुरु किरीट भाई ने कहा कि होली पानी व गुलाल से कतई नहीं खेलनी चाहिए। पानी अनमोल है उसकी कीमत समझकर उसे व्यर्थ नहीं गवाना चाहिए। गुलाल त्वचा रोग पैदा करता है इससे भी बचना चाहिए। असली होली फॉग यानी फूलों की होली होती है। वह इसके पक्षधर हैं।
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आध्यात्मिक होली महोत्सव समिति की ओर से आयोजित होली मिलन महोत्सव में उन्होंने भक्तों को होली का महत्व बताते हुए कहा कि होली प्रेम व सद्भावना का पर्व है। इस पर्व को बड़े ही उत्साह के साथ मानना चाहिए। पर्व के उत्सव में यदि उत्साह नहीं है तो यह नीरस हो जाता है। जीवन को रंगों से भरा हुआ होना चाहिए। यदि जीवन में रंग नहीं है तो जीवन रंगहीन हो जाता है। लोगों का कहना होता है कि हमारी संतानें बिगड़ रही हैं। उन अभिभावकों को हमारा यही संदेश है कि संतान को प्रेम मिले, वात्सल्य मिले, माता-पिता का साथ मिले। तो वह मोबाइल टेलीविजन आदि में अपना समय नहीं व्यतीत करेंगे और उनमें संस्कार बने रहेंगे। उन्होंने कहा कि पानी और रंग की अपेक्षा फूलों से होली खेलनी चाहिए, जिससे वातावरण भी स्वच्छ रहता है। 25 मार्च को फॉग होली खेली जाएगी। इस मौके पर अतुल कपूर, सजीव अग्रवाल, मुकेश अग्रवाल, राकेश अग्रवाल, अनूप पुरी, अपूर्व माहेश्वरी, गिरीश डिडवानिया, नरेश गोयल, दीपक महिंद्रा आदि मौजूद रहे।
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अध्यात्मिक होली महोत्सव समिति की ओर से बताया गया कि जिले में पहली बार आध्यात्मिक होली महोत्सव मनाया जा रहा है। कोशिश की जाएगी कि यह हर वर्ष मनाया जाए।
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गुरु किरीट भाई ने कहा कि होली पानी व गुलाल से कतई नहीं खेलनी चाहिए। पानी अनमोल है उसकी कीमत समझकर उसे व्यर्थ नहीं गवाना चाहिए। गुलाल त्वचा रोग पैदा करता है इससे भी बचना चाहिए। असली होली फॉग यानी फूलों की होली होती है। वह इसके पक्षधर हैं।