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दिल्ली से पटना तीन साइकिलों से निकले चार श्रमिक
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हरदोई। कौन कहता है कि आसमान में छेद नहीं होता, एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारो...। ऐसा ही कुछ पटना के गांधी नगर में रहने वाले राज मिस्त्रियों ने करके दिखाया है। दिल्ली से एक हजार 61 किलोमीटर का सफर तीन साइकिलों से इन चारों श्रमिकों ने शुरू किया है। करीब 472 किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद जब यह लोग जनपद पहुंचे तो उनकी कहानी सुनने वालों के भी रोंगटे खड़े हो गए।
बुधवार को शहर के सिनेमा चौराहे साइकिल से पहुंचे अब्दुल कयूम, अल्ताब आलम, परवेज व अनीश ने बताया कि वह सभी पटना के गांधी नगर के रहने वाले हैं। वह सभी दिल्ली में काफी समय से राजमिस्त्री का काम करते हैं और अपने परिवार का भरण पोषण करने के लिए पैसे बैंक के द्वारा घर में भेजते रहते हैं। लॉकडाउन के दौरान उन्होंने घर में भी कुछ पैसे ही भेज पाए जो बचे उससे अब तक काम चलाया। लॉकडाउन खुलता न देख उन लोगों ने साइकिल से घर पहुंचने का मन बनाया लेकिन नई साइकिल की कीमत 45 सौ रुपये थी। ऐसे में घर फोन करके किसी तरह बैंक में पैसे मंगवाए गए। घर से पैसे किस तरह आए, क्या बेंच कर भेजे गए उन्हें अभी नहीं मालूम। वह तो घर जाकर ही पता लगेगा। चार लोगों में तीन साइकिलें खरीदी गईं। उसके बाद वह चार लोग सोमवार को दिल्ली से निकले और बुधवार की सुबह हरदोई पहुंचे और यहां से आगे का सफर तय करेंगे। दिल्ली से पटकना करीब 1061 किलोमीटर है। पहले उन्हें डर लगा लेकिन जब देखा कि यहां भूखों मरने से अच्छा है अपने गांव जाएं और वहीं कुछ करें और परिवार का पोषण करें तो इरादा और मजबूत होता चला गया। कुल मिलाकर उनके पक्के इरादों को जिसने भी सुना वह हैरान रह गया।
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बुधवार को शहर के सिनेमा चौराहे साइकिल से पहुंचे अब्दुल कयूम, अल्ताब आलम, परवेज व अनीश ने बताया कि वह सभी पटना के गांधी नगर के रहने वाले हैं। वह सभी दिल्ली में काफी समय से राजमिस्त्री का काम करते हैं और अपने परिवार का भरण पोषण करने के लिए पैसे बैंक के द्वारा घर में भेजते रहते हैं। लॉकडाउन के दौरान उन्होंने घर में भी कुछ पैसे ही भेज पाए जो बचे उससे अब तक काम चलाया। लॉकडाउन खुलता न देख उन लोगों ने साइकिल से घर पहुंचने का मन बनाया लेकिन नई साइकिल की कीमत 45 सौ रुपये थी। ऐसे में घर फोन करके किसी तरह बैंक में पैसे मंगवाए गए। घर से पैसे किस तरह आए, क्या बेंच कर भेजे गए उन्हें अभी नहीं मालूम। वह तो घर जाकर ही पता लगेगा। चार लोगों में तीन साइकिलें खरीदी गईं। उसके बाद वह चार लोग सोमवार को दिल्ली से निकले और बुधवार की सुबह हरदोई पहुंचे और यहां से आगे का सफर तय करेंगे। दिल्ली से पटकना करीब 1061 किलोमीटर है। पहले उन्हें डर लगा लेकिन जब देखा कि यहां भूखों मरने से अच्छा है अपने गांव जाएं और वहीं कुछ करें और परिवार का पोषण करें तो इरादा और मजबूत होता चला गया। कुल मिलाकर उनके पक्के इरादों को जिसने भी सुना वह हैरान रह गया।
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